सरोगेसी! संतान सुख पाने का नया ज़रिया | Surrogacy Hindi

Surrogacy in hindi

इन दिनों आपने सरोगेसी (Surrogacy) से संबंधित काफी सारी खबरे पढ़ी या सुनी होगी कि कैसे कई अभिनेता इसके माध्यम से मां-बाप बन रहे हैं। इन सभी खबरों को पढ़कर आपके मन में इसके बारे में विस्तार से जानने की इच्छा जगी होगी। जाहिर सी बात है कि आपने इसके लिए काफी संघर्ष किया होगा, लेकिन अगर समय की कमी के चलते आप इसके बारे में पूरी तरह से जान नहीं पाए हैं, तो आप इस लेख को पढ़े :

क्या है सरोगेसी? (What is Surrogacy- in Hindi)

आम तौर पर, सरोगेसी को ‘किराए की कोख’ के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा सरोगेसी ऐसा माध्यम है, जिससे वे दंपत्ति संतान सुख प्राप्त कर सकते हैं, जो इससे वंचित हैं।

यह ऐसी व्यवस्था है, जिसमें एक महिला किसी अन्य युगल के बच्चे को अपनी कोख में पालती है और उसे जन्म देती है, उस महिला को “सरोगेट मदर” कहा जाता है और उसके गर्भ से जन्मा बच्चा “सरोगेट चाइल्ड”  कहलाता है।

सरोगेसी को अपनाने के कौन-कौन से कारण होते हैं? (Indications for Surrogacy in Hindi)

अगर आप संतान सुख पाना चाहते हैं लेकिन किसी कारणवश उसे प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो आप सरोगेसी का चयन कर सकते हैं। आप निम्नलिखित स्थितियों में इसे करा सकते हैं-

  • अगर आप ऐसे दंपत्ति हैं, जिनकी महिला साथी की बच्चेदानी में कोई दिक्कत है, उसका बार-बार गर्भपात हुआ है या फिर आईवीएफ बार-बार असफल हो चुका है।
  • अगर आप अविवाहित पुरूष हैं और अपनी संतान चाहते हैं।
  • अगर आप समलैंगिक दंपत्ति हैं।

सरोगेट मदर क्या होती है? (Surrogate Mother in Hindi)

सरोगेसी प्रक्रिया पूर्ण रूप से उस महिला पर निर्भर करती है, जो अपनी कोख में नि:संतान दंपत्ति की संतान को पालती है और उसे जन्म देने के बाद उन्हें सौंप देती है। उस महिला को “सरोगेट मदर” कहा जाता है।

सरोगेट मदर  की निम्नलिखित विशेषताएं होनी चाहिए-

  • उसकी उम्र 21 से 38 के बीच की होनी चाहिए
  • वह महिला पूर्ण रूप से सेहतमंद होनी चाहिए, ताकि इस दौरान होने वाले तमाम परिवर्तनों का सामना कर सके।
  • उसके खुद के बच्चे हो, ताकि वह इस कार्य को बेहतर तरीके से कर सके।
  • आईसीएमआर के दिशा-निर्देश के अनुसार वह अपने जीवन में तीन से अधिक बार सरोगेट मदर न बनी हो क्योंकि इससे उसे भी कुछ परेशानी हो सकती है।
  • वह भावनात्मक और मानसिक रूप से मौजूद हो क्योंकि उसे बच्चे को जन्म देने के बाद दूसरे लोगों को सौंपना होता है।

सरोगेट फादर क्या होता है? (Surrogate Father in Hindi)

सरोगेट फादर का अर्थ उस व्यक्ति से है, जो बॉयोलाजिकल, गोद या सौतला पिता नहीं होता है लेकिन जो सरोगेसी प्रक्रिया में पिता की भूमिका निभाता है। यह महिला का रिश्तेदार, अंकल, प्रेमी, परिवार का दोस्त या ऐसा कोई पुरूष हो सकता है, जो अजन्मे बच्चे को पिता का प्यार देता है, उसका मार्गदर्शन करता है और उसे वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

अधिक जानकारी के लिए इस पर क्लिक करें सरोगेट फादर .

सरोगेसी के कितने प्रकार होते हैं? (Types of Surrogacy- in Hindi)

सरोगेसी के प्रकार मुख्य रूप से विभिन्न तत्वों पर निर्भर करते हैं जैसे भुगतान (पेमेंट), देश, विधि (मेथड) इत्यादि। लेकिन सरोगेसी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं-

ट्रेडिशनल सरोगेसी / परंपरागत सरोगेसी –

  • यह सामान्य प्रकार की सरोगेसी होती है, जिसमें सरोगेट मदर के एग (अंडाणु) और उस पुरूष के स्पर्म (शुक्राणु) को मिलाया जाता है, जो संतान सुख चाहता है और उन दोनों को कृत्रिम तरीके से सरोगेट मदर के गर्भाशय में डाला जाता है।
  • इस सरोगेसी के जन्मे बच्चे का सीधा संबंध बॉयोलॉजिकल पिता से होता है और उन दोनों का संबंध भावनात्मक और कानूनी रूप से अधिक मजबूत होता है।
  • इसे मुख्य रूप से एकल पुरूष (सिंगल मेन), समलैंगिक, वह महिला जिसके गर्भाशय में एग का निर्माण नहीं हो पाता है इत्यादि।
  • इसमें एग डोनेशन की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि इसमें सरोगेट मदर के एग का उपयोग किया जाता है।

जेस्‍टेशनल सरोगेसी / गर्भावधि सरोगेसी –

  • यह ऐसी सरोगेसी होती है, जिसमें उस पुरूष और महिला के क्रमश: स्पर्म (शुक्राणु) और एग (अंडाणु) को टेस्ट ट्यूब तरीके से मिलाकर भ्रूण (एम्ब्रो) का निर्माण किया जाता है, जो अपनी संतान चाहते हैं, उन्हें कृत्रिम तरीके से सरोगेट मदर के गर्भाशय में डाला जाता है।
  • इस प्रक्रिया से जन्में बच्चे का संबंध सरोगेट मदर की बजाय उसके जैविक मां-बाप (बायोलॉजिकल पैरेंट्स) से होता है।
  • इसे मुख्य रूप से इन विर्टी फर्टिलाइजेशन (IVF) की तकनीक से किया जाता है

सरोगेसी को कैसे किया जाता है? (Procedure of Surrogacy- in Hindi)

सरोगेसी की प्रक्रिया में मुख्य रूप से निम्नलिखित क्रम शामिल होते हैं-

स्टेप 1: डॉक्टर से मिलना:  सरोगेसी प्रक्रिया की शुरूआत नि:संतान दंपत्ति के डॉक्टर से मिलने के साथ ही हो जाती है। वहां पर उनके नि:संतान होने के कारण का पता लगाया जाता है, जिसके लिए पुरूष और महिला दोनों के कुछ टेस्ट किए जाते हैं।

अगर उन टेस्टों में इस बात की पुष्टि होती है कि उस महिला के यूट्रस में कोई ऐसी कमी है, जो किसी दवाई या सर्जरी से ठीक नहीं की जा सकती और उसके कारणवश वह महिला कभी गर्भाधरण नहीं कर सकती, तब डॉक्टर उन्हें सरोगेसी कराने की सलाह देते हैं।

स्टेप 2: निर्णय लेना:  जब डॉक्टर किसी नि:संतान दंपत्ति को सरोगेसी कराने की सलाह देते हैं, तो उन्हें यह निर्णय लेना होता है, कि क्या उन्हें इसे अपनाना है या नहीं? अगर वह यह निर्णय लेते हैं कि उन्हें यह कराना है तो उसके बाद उन्हें इससे संबंधित सभी प्रकार की जानकारी जैसे लागत, समय, जोखिम इत्यादि प्राप्त करनी होती है।

स्टेप 3: पेशेवर सलाह लेना:  जब वह सरोगेसी कराने का निर्णय ले लेते हैं तो उन्हें किसी विशेषज्ञ से मिलना होता है ताकि वे उन्हें इससे संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी दे।

स्टेप 4: सरोगेट मदर की तलाश करना:  इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण कदम सरोगेट मदर को चुनना होता है। यह पूरी प्रक्रिया इस पर ही निर्भर करती है इसलिए उसे काफी सावधानी से चुना जाता है।

अगर कोई महिला सरोगेट मदर बनना चाहती है तो वह उपर दी गई जानकारी (सरोगेट मदर) को पढ़ सकती है और इसके अलावा उसे निम्नलिखित पड़ावों से गुजरना पड़ता है-

  • उसकी मेडिकली जांच की जाती है।
  • उसे मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूत होना चाहिए।
  • उसे कानूनी कागजी कार्यवाही करनी होती है।

स्टेप 5: कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करना: इस प्रक्रिया का यह भी एक महत्वपूर्ण कद है। इसमें सरोगेट मदर और संतान इच्छुक दंपत्ति के बीच में एक एग्रीमेंट बनाया जाता है। इस एग्रीमेंट में मुख्य रूप से सभी प्रकार की शर्तें, नियम, प्रावधान इत्यादि शामिल होते हैं।

इस एग्रीमेंट पर दोनों पक्षों (सरोगेट मदर और दंपत्ति) को हस्ताक्षर करना होते हैं। इस कदम के पूरा होने के बाद ही इलाज पूरा होता है।

स्टेप 6: इलाज की शुरूआत करना: एक बार जब कागजी कार्यवाही हो जाती है तो इसके बाद इलाज की शुरूआत होती है।

भ्रूण का निर्माण करने के लिए दंपत्ति के स्पर्म और एग को एकत्रित किया जाता है और उन्हें सरोगेट मदर के गर्भाशय में डाला जाता है (गर्भावधि सरोगेसी)। कुछ मामलों में पुरूष दंपत्ति के स्पर्म और सरोगेट मदर के एग को एकत्रित करके उन्हें उसके गर्भाशय में डाला जाता है ( परंपरागत सरोगेसी)।

स्टेप 7: बच्चे का जन्म होना: यह इस प्रक्रिया का अंतिम और सुखद कदम है। इस पूरी प्रक्रिया में तमाम तरह के चरण आते हैं, जिससे सरोगेट मदर के साथ-साथ दंपत्ति को गुजरना पड़ता है।

इस प्रक्रिया के अंत में जब बच्चे का जन्म होता है तो डॉक्टर उसकी अच्छे से जांच करते हैं और उसके बाद उसे दंपत्ति को सौंप देते हैं। इस कार्य के साथ ही यह पूरी प्रक्रिया समाप्त हो जाती है।

सरोगेसी बिल/विधेयक 2016 (Surrogacy Bill in Hindi)

चूंकि, बहुत सारे लोग इसका गलत फायदा उठाने लगे थे और यह केवल शौषण या फैशन का ही तरीका बन कर रह गया था। इसलिए भारत सरकार ने इसकी अस्मिता को बनाए रखने के लिए साल 2016 में “सरोगेसी बिल/विधेयक 2016” बनाया था। इस बिल के महत्वपूर्ण बिंदू इस प्रकार हैं-

  • भारत में केवल भारतवासी ही सरोगेसी करा सकते हैं।
  • सरोगेसी को केवल वही दंपत्ति करा सकते हैं, जिनकी शादी को कम-से-कम 5 साल हो चुके हैं।
  • सरोगेसी  कराने के लिए पुरूष की उम्र 26 से 55 वर्ष और महिला की उम्र 23 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • अगर किसी दंपत्ति की पहले से ही एक संतान है, तो वह सरोगेसी  नहीं करा सकते।
  • अविवाहित, समलैंगिक, लिव-इन, सिंगल पैरेंट्स इत्यादि लोग सरोगेसी नहीं करा सकते हैं।
  • अब भारत में कमर्शियल सरोगेसी (वाणिज्यिक सरोगेसी) पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसका अर्थ है कि कोई भी दंपत्ति अपने रिश्तेदार के अलावा किसी अन्य महिला को सरोगेट मदर नहीं बना सकता है।
  • इस बिल के तहत “राष्ट्रीय सरोगेसी बोर्ड” का गठन किया जाएगा।
  • यह बिल जम्मू- कश्मीर के अलावा अन्य राज्यों में लागू है।

सरोगेसी का खर्चा कितना होता है? (Surrogacy Cost in Hindi)

सरोगेसी  मुख्य रूप से कई तत्वों पर निर्भर करती है, उनमें से एक तत्व पैसा है- जिसके आधार पर व्यावसायिक सरोगेसी (कर्मशियल सरोगेसी) और नीति परक सरोगेसी (ऐल्ट्रूइस्टिक सरोगेसी) दो प्रकार की सरोगेसी होती है।

व्यावसायिक सरोगेसी वे सरोगेसी होती है, जिसमें गर्भ धारण करने के लिए सरोगेट मदर को पैसे दिए जाते हैं तो वहीं दूसरी ओर नीति परक सरोगेसी ऐसी सरोगेसी होती है, जिसमें कोई महिला परोपकारी भाव से सरोगेट मदर बनती है।

कुछ सालों से भारत में व्यावसायिक सरोगेसी काफी लोकप्रिय हुई है। जिसका उपयोग बहुत सारी हस्तियों जैसे करण जौहर, तुषार कपूर, शाहरूख खान इत्यादि ने की है। उनके नक्शे कदम पर चलते हुए बहुत सारे आम नागरिकों ने भी इसे अपनाया है। लेकिन चूंकि बहुत सारे लोग इस प्रक्रिया का दुष्प्रभाव करने लगे और कई सारी महिलाओं के शौषण की खबरे में आती हैं।

तो सरकार ने इसे रोकते हुए वर्ष 2016 में सरोगेसी बिल 2016 का निर्माण किया है, जिसके अनुसार अब भारत में व्यावसायिक सरोगेसी पूरी तरह से बंद है।

सरोगेसी के लाभ और नुकसान कौन-कौन से होते हैं? (Benefits and Side-Effects of Surrogacy -in Hindi)

इन दिनों सरोगेसी काफी लोकप्रिय प्रक्रिया बन गई है और इसके माध्यम से बहुत सारे लोगों की जिदगी में किलकरियां गूंजी हैं। यह एक मात्र ऐसी प्रक्रिया है, जिसका उपयोग आम नागरिक से लेकर नामचीन हस्तियों ने भी किया है। इसके अपने कायदे-कानून हैं, जिसका पालन हर उस व्यक्ति को करना होता है, जो इसे अपनाता है।

जिस तरह से हर सिक्के के दो पहलू होते हैं उसी तरह से इस प्रक्रिया के भी दो पहलू- लाभ और हानि है, जिसके बारे में जानना उतना ही जरूरी है,जितने इस पूरी प्रक्रिया के बारे में जानना। तो आइए, इस बात को समझते हैं कि सरोगेसी  के कौन-कौन से लाभ और हानि होते हैं-

सरोगेसी के निम्नलिखित लाभ हैं-

  • यह नि:संतान दंपत्ति के लिए सबसे बड़ा वरदान है।
  • जब कोई महिला इस प्रक्रिया से जुड़कर सरोगेट मदर बनती है, तो उसे इस बात पर गर्व होता है कि उसने किसी दूसरे की जिदगी को खुशियों से भरा है।
  • सरोगेट मदर इस प्रक्रिया के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार सकती है।
  • गर्भावधि सरोगेसी प्रक्रिया में दंपत्ति खुद के बच्चे को पा सकते हैं क्योंकि इसमें उनके एग और स्पर्म को मिलाकर उन्हें सरोगेट मदर के गर्भाशय में डाला जाता है।

सरोगेसी की मुख्य नुकसान इस प्रकार हैं-

  • सरोगेट मदर बनना काफी मुश्किल होता है, यह शारीरिक और भावनात्मक समस्या को उत्पन्न करता है। उदाहरण के लिए हॉर्मोन इंजेक्शन नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।
  • कुछ महिलाओं पर अत्याचार किए जाते हैं और उन्हें सरोगेट मदर बनने के लिए मजबूर किया जाता है।
  • कई बार सरोगेट मदर बच्चे को जन्म देने के बाद उसे दंपत्तियों को देने से मना कर देती है, ऐसे में उन दंपत्तियों और सरोगेट मदर को कानूनी कार्यवाही से गुजरना पड़ता है।
  • सरोगेसी काफी महंगी प्रक्रिया होती है, जिसमें काफी सारे टेस्ट, दवाईयां, मेडिकल बिल, सरोगेट मदर के खर्चे इत्यादि खर्चे शामिल होते हैं और इन सभी का खर्चा दंपत्ति को उठाना पड़ता है। अत: उन्हें इसके लिए काफी पैसों की जरूरत होती है।

हमने इस लेख में सरोगेसी से संबंधित आवश्यक जानकारी दी है, जैसे सरोगेसी क्या है, सरोगेट मदर और सरोगेट फादर क्या हैं, सरोगेसी के प्रकार, सरोगेसी प्रक्रिया, सरोगेसी बिल 2016, सरोगेसी  का खर्चा, सरोगेसी के लाभ और हानि इत्यादि जिसे पढ़कर आप अपनी/ किसी अन्य नि:संतान दंपत्ति की जिदगी को खुशियों से भर सकते हैं और इसके साथ में किसी महिला को गर्भावस्था का सुख मिल सके।

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