जोड़ों का दर्द से कैसे पाएं छुटकारा (Joint pain in hindi)

What is joint pain?

जोड़ों का दर्द को मुख्य रूप से उम्रदराज़ लोगों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से यह समस्या युवाओं में भी देखने को मिल रही है।
हालांकि, लोग इसका इलाज कराने के लिए सभी तरीके को अपनाते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें इससे राहत नहीं मिल पाती है।
ऐसा मुख्य रूप से जोड़ों का दर्द की पूरी जानकारी न होने के कारण होता है, जिसे दूर करने की कोशिश नहीं की जाती है।
यदि आप भी इस समस्या से पीड़ित हैं, तो आपको इस लेख को ज़रूर पढ़ना चाहिए क्योंकि इसमें हमने जोड़ों का दर्द से जुड़ी आवश्यक जानकारी दी है।

जोड़ों का दर्द क्या है? (what is joint pain? in hindi)

जोड़ों का दर्द (Joint pain) से तात्पर्य शरीर के किसी अंग के जोड़ में खिंचाव, दर्द, अकड़न इत्यादि होना है।

हालांकि, इसका इलाज सामान्य घरेलू नुस्खे के द्वारा किया जा सकता है, लेकिन यदि यह समस्या लंबे समय तक वैसी ही बने रहे, तो फिर इसका इलाज करने का एकमात्र विकल्प जोड़ों को बदलना ही होता है।

जोड़ों का दर्द के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Joint pain in hindi)

जोड़ों का दर्द की शुरूआत सामान्य दर्द से होती है, इसलिए कुछ लोग इसकी गंभीरता को समझ नहीं पाते हैं।
इसकी वजह से कुछ समय बाद जब जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है, तब उन्हें मेडिकल सहायता लेनी पड़ती है।
अत: यदि किसी व्यक्ति को अपने शरीर में ये 5 लक्षण नज़र आए तो उसे इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि ये जोड़ों का दर्द के संकेत होते हैं-

  1. चलने में परेशानी होना- जोड़ों का दर्द का प्रमुख लक्षण चलने में परेशानी होना है।
    ऐसा मुख्य रूप से तब होता है, जब घुटनों के जोड़ों में दर्द होता है, ऐसी स्थिति में इससे पीड़ित लोगों को उठने-बैठने में भी परेशानी होती है।
  2. जोड़ों में सूजन होना- जोड़ों का दर्द का अन्य लक्षण जोड़ों में सूजन होना या आना है।
    ऐसी स्थिति में सिकाई करना काफी नहीं होता है बल्कि मेडिकल सहायता लेनी पड़ती है।
  3. जोड़ों में नरमी होना- यदि किसी व्यक्ति को जोड़ों में नरमी महसूस होती है, तो उसे इसकी सूचना अपने डॉक्टर को देनी चाहिए क्योंकि यह जोड़ों का दर्द का संकेत हो सकता है।
  4. जोड़ों में अकड़न महसूस होना- अक्सर, कुछ लोगों को अपने जोड़ों में अकड़न महसूस होती है।
    ऐसे लोगों को तुरंत डॉक्टर से मिलकर उनकी जांच करानी चाहिए क्योंकि यह जोड़ों का दर्द का लक्षण हो सकता है।
  5. जोड़ों में लालपन होना- अचानक से जोड़ों में लालपन होना भी जोड़ों का दर्द का लक्षण हो सकता है।
    ऐसी स्थिति तुरंत मेडिकल सहायता लेना ही समझदार भरा कदम हो सकता है।

जोड़ों का दर्द किन कारणों से होता है? (Causes of joint pain in hindi)

जोड़ों का दर्द होने के काफी सारे कारण होते हैं, इसलिए इसके किसी सटीक कारण पता लगाना काफी मुश्किल है।
इसके बावजूद, इस समस्या पर किए गए अध्ययनों से स्पष्ट है कि जोड़ा का दर्द के संभावित कारण निम्नलिखित हो सकते हैं-

  • चोट लगना- जोड़ों का दर्द होना का प्रमुख कारण चोट लगना है।
    ऐसा अंदरूनी चोट लगने पर ही होता है, जिसकी तुरंत जांच करके ठीक करने की जरूरत होती है।
  • अर्थराइटिस से पीड़ित होना- जोड़ों का दर्द होने की संभावना मुख्य रूप से अर्थराइटिस से पीड़ित लोगों में रहती है।
    ऐसे लोगों को अपने स्वास्थ का विशेष ध्यान रखना चाहिए और सेहत संबंधी किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • जोड़ों का संक्रमण होना- अक्सर, जोड़ों का दर्द का कारण संक्रमण भी हो सकता है।
    हालांकि, इसे एंटीबायोटिक दवाई का सेवन करके ठीक किया जा सकता है, लेकिन यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रही तो यह जोड़ों का दर्द का कारण बन सकती है।
  • मोच आना- कभी-कभी मोच आने से भी जोड़ों का दर्द हो सकता है।
    ऐसी स्थिति में हड्डी विशेषज्ञ से मिलकर मोच को ठीक करने का ही एकमात्र विकल्प बचता है अन्यथा यह गंभीर रूप ले सकती है।
  • जोड़ों के बीच का ग्रीस या तरल पदार्थ का खत्म होना- जोड़ों का दर्द ऐसे लोगों को भी हो सकता है, जिनके जोड़ों के बीच का ग्रीस खत्म हो जाता है।
    जोडों के बीच का ग्रीस का मुख्य काम जोड़ों की कार्य क्षमता को बनाए रखना लेकिन जब ये समाप्त हो जाता है, तो यह जोड़ों का दर्द जैसी समस्याओं का कारण बनता है।

जोड़ों का दर्द की पहचान कैसे की जा सकती है? (How to diagnose joint pain? in hindi)

यदि जोड़ों का दर्द की पहचान समय रहते कर ली जाए तो इसका इलाज सही तरीके से किया जा सकता है।
ऐसा करने से इससे पीड़ित लोगों की परेशानियाँ थोड़ी कम हो सकती है, जिससे उनकी ज़िदगी बेहतर बन सकती है।
अत: जोड़ों का दर्द की पहचान करने के लिए इन 4 तरीके को अपनाया जा सकता है-

  1. मेडिकल हिस्ट्री की जांच करना- जोड़ों का दर्द की पहचान करने का सबसे आसान तरीका मेडिकल हिस्ट्री की जांच करना है।
    ऐसा करने से इस बात का पता चलता है कि किसी व्यक्ति पहले कोई बीमारी तो नहीं रही।
  2. एक्स-रे करना- चूंकि, जोड़ों का दर्द अंदरूनी कारण जैसे जोड़ों के बीच में अंतर आना का भी नतीजा होता है, इसलिए डॉक्टर इस बात की पुष्टि करने के लिए एक्स-रे का सहारा लेते हैं।
  3. ब्लड टेस्ट कराना- अक्सर, डॉक्टर इस समस्या की पहचान करने के लिए ब्लड टेस्ट भी करते हैं ताकि लोगों के शरीर की अंदरूनी स्थिति को मॉनिटर किया जा सके।
  4. सेडीमेंटशन टेस्ट कराना- वर्तमान समय में जोड़ों के दर्द का पता लगाने के लिए सेडीमेंटशन टेस्ट (sendimention test) का भी सहारा लिया जाता है, जिसमें मुख्य रूप से ब्लड सेल्स काउंट किया जाता है।

जोड़ों का दर्द का इलाज कैसे करें? (how to treat joint pain? in hindi)

जैसे ही किसी व्यक्ति के जोड़ों का दर्द से पीड़ित होने का पता चलता है, वैसे ही उसका इलाज शुरू कर देना चाहिए।
ऐसा करने से इससे पीड़ित लोगों को संभावित खतरे को बचाया जा सकता है।
इस प्रकार, जोड़ों का दर्द का इलाज निम्नलिखित तरीके से संभव है-

  • एक्सराइज़ करना- जोड़ों का दर्द का इलाज करने का सबसे आसान तरीका एक्सराइज़ करना है।
    एक्सराइज़ करने से जोड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है, जिससे उसमें होने वाला दर्द कम होता है।
  • दवाई देना- जोड़ों का दर्द का इलाज दवाई के द्वारा भी किया जाता है।
    ये दवाइयाँ इस दर्द को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ इसे ठीक भी करती हैं।
  • थेरेपी लेना- अक्सर, डॉक्टर जोड़ों का दर्द से पीड़ित लोगों को थेरेपी करने की भी सलाह देते हैं।
    यह थेरेपी जोड़ों के दर्द को कम करने में सहायक साबित होती है।
  • योगा करना- इस समस्या को योगा के माध्यम से भी ठीक किया जा सकता है।
    ऐसी स्थिति में प्राणायम,सेतुबंधासन, शवआसन इत्यादि करना लाभकारी साबित हो सकता है।
  • ऑपरेशन कराना- जब जोड़ों का दर्द से पीड़ित व्यक्ति को इलाज के किसी भी तरीके से आराम नहीं मिलता है, तो उसके लिए घुटनों का ऑपरेशन ही एकमात्र विकल्प बचता है।
    इसके अलावा, शरीर के अन्य जोड़ों के लिए आर्थ्रोप्लास्टी (Arthroplasty) नामक सर्जरी की जा सकती है।
HOW TO TREAT JOINT PAIN
How to treat joint pain

जोड़ों का दर्द के संभावित खतरे क्या हो सकते हैं? (Complications of joint pain in hindi)

हालांकि, जोड़ों का दर्द का इलाज संभव है, जिससे करवाकर लोग बेहतर ज़िदगी जी सकते हैं।
इसके बावजूद, यह काफी दुख की बात है कि कुछ लोग इसका लाभ सही समय पर नहीं उठा पाते हैं, जिसकी वजह से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इस प्रकार, यदि कोई व्यक्ति जोड़ों का दर्द का इलाज सही तरीके से न कराए तो उसे इन 5 संभावित खतरे से जूझना पड़ सकता है-

  1. दर्द का बढ़ना- जोड़ों का दर्द का इलाज लंबे समय तक न कराने पर यह समय बीतने के साथ-साथ बढ़ सकता है।
    ऐसी स्थिति में इससे पीड़ित लोगों को असहनीय दर्द से जूझना पड़ सकता है, जिसमें दर्दनिवारक दवाई से भी आराम नहीं मिलता है।
  2. दर्द वाले अंग का खराब होना- यदि जोड़ों का दर्द को ठीक न किया जाए तो इसका असर उस अंग पर पड़ता है, जहां पर यह दर्द होता है।
    अत: दर्द वाला अंग खराब हो सकता है, जिसे बदलवाना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
  3. दिल या किडनी जैसी गंभीर बीमारियों की संभावना का बढ़ना- जोड़ों का दर्द के संभावित खतरों में गंभीर बीमारियों के खतरे का बढ़ना है।
    इसी कारण, इसकी वजह से इससे पीड़ित लोगों को दिल या किडनी संबंधी बीमारियाँ हो सकती हैं।
  4. जोड़ों की गतिशीलता में कमी आना- इस समस्या से जोड़ों की कार्यक्षमता या गतिशीलता में भी कमी आ सकती है।
  5. सामान्य काम करने में भी परेशानी होना- अक्सर, ऐसा देखा गया है कि इस समस्या से पीड़ित लोगों को सामान्य काम जैसे झुककर कोई चीज़ उठाना, ज़मीन पर बैठना, ज्यादातर देर तक घुटने मोड़कर बैठना इत्यादि को करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

जोड़ों का दर्द की रोकथाम कैसे करें? (How to prevent joint pain? in hindi)

निश्चित रूप से जोड़ा का दर्द किसी भी शख्स की ज़िदगी को कष्टदायक बना सकता है।
इसका असर इससे पीड़ित लोगों के साथ-साथ उनके प्रियजनों की ज़िदगियों पर भी पड़ता है।
इसके बावजूद, राहत की बात यह है कि किसी भी अन्य बीमारी की तरह जोड़ों का दर्द की भी रोकथाम संभव है।
इस कारण, यदि कोई शख्स निम्नलिखित चीज़ों का पालन करे, तो वह जोड़ों का दर्द की रोकथाम आसानी से कर सकता है-

  • एक्सराइज़ करना- ऐसा माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति हर रोज़ एक्सराइज़ करे, तो वह काफी सारी बीमारियों से अपनी रक्षा कर सकता है।
    यह बात जोड़ों का दर्द पर भी लागू होती है इसलिए इसकी रोकथाम में एक्सराइज़ करना लाभकारी साबित होता है।
  • हेल्थी फूड अपनाना- हम सभी लोगों को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इसका काफी गहरा असर अपनी सेहत पर पड़ता है।
    इसी कारण, हमें केवल हेल्थी फूड ही खाना चाहिए ताकि हमें जोड़ों का दर्द जैसी समस्या या बीमारी न हो।
  • वजन को कंट्रोल में रखना- अक्सर, ऐसा देखा गया है कि जिस व्यक्ति का वजन का अधिक होता है, उसे जोड़ों का दर्द होने की संभावना काफी अधिक रहती है।
    इस प्रकार, हम सभी लोगों को अपने वजन को कंट्रोल में रखने की कोशिश करनी चाहिए ताकि हमें इस तरह की कोई समस्या न हो।
  • थेरेपी लेना- जोड़ों का दर्द के लिए थेरेपी लेना काफी लाभकारी साबित होता है, इसलिए इसकी रोकथाम के लिए थेरेपी लेना सहायक साबित हो सकता है।
  • डॉक्टर के संपर्क में रहना- इस समस्या से पीड़ित सभी लोगों को जिस चीज़ का पालन करना चाहिए वह है डॉक्टर के संपर्क में रहना।
    उन्हें तब तक डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए जब तक वे उन्हें पूरी तरह से सेहतमंद घोषित न कर दें।

पहले के ज़माने में ऐसी काफी सारी बीमारियाँ थी, जिनका इलाज कराना मुश्किल था।
इसी कारण, लोग भी ऐसा ही सोचते थे कि यदि उन्हें एक बार जोड़ों का दर्द हो गया है तो फिर उन्हें अपनी सारी ज़िदगी इसी तरह से बीताने होगी।
लेकिन, अभी यह तस्वीर काफी हद तक बदल चुकी है क्योंकि अब मेडिकल साइंस में जोड़ों का दर्द का इलाज संभव है।
लोगों में इस समस्या की जानकारी को बढ़ाने के लिए विश्व स्वास्थ संगठन (world health organisation) ने काफी प्रयास किया है, उदाहरण के लिए हर साल 19 अक्टूबर को विश्व ज्वाइंट डे (world joint day) के रूप मनाया जाता है।
इसके अलावा, हम सभी को अपने-अपने स्तर पर जोड़ों का दर्द की जानकारी अधिक-से-अधिक लोगों को देनी चाहिए ताकि वे इसका इलाज सही तरीके से करा सकें।
इस प्रकार, हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित हुआ होगा क्योंकि इसमें हमने जोड़ों का दर्द की आवश्यक जानकारी दी है।

सबसे अधिक पूछे जाने वाले सवाल (FAQ’S)

Q1. जोड़ों का दर्द के कारण क्या हो सकते हैं?
Ans- जोड़ों का दर्द काफी सारे कारणों जैसे जेनेटिक कारण, सही भोजन न करना, किसी तरह की बीमारी से पीड़ित होना, चोट लगना इत्यादि हो सकते हैं।
Q2. जोड़ों का दर्द को कैसे कम किया जा सकता है?
Ans- जोड़ों का दर्द को कम करने में घरेलू नुस्खे अपनाना, एक्सराइज़ करना, थेरेपी लेना इत्यादि लाभकारी उपाय साबित हो सकते हैं।
Q3. किस बीमारी का परिणाम जोड़ों का दर्द हो सकता है?
Ans- जोड़ों का दर्द मुख्य रूप से अर्थराइटिस, लुपस, चोट, मोच इत्यादि का नतीजा हो सकता है।
इसी कारण, इन बीमारियों से पीड़ित लोगों को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि उन्हें जोड़ों का दर्द से जूझना न पड़े।
Q4. क्या स्ट्रेस से जोड़ों का दर्द हो सकता है?
Ans- स्ट्रेस से मानव-शरीर के अंगों में काम करने की क्षमता में कमी आती है, जिसकी वजह से उन्हें जोड़ों का दर्द जैसी समस्या होने की संभावना बढ़ सकती है।
इस प्रकार, यह कहना गलत नहीं है कि स्ट्रेस से जोड़ों का दर्द हो सकता है।
Q5. क्या जोड़ों का दर्द से किसी व्यक्ति की मौत हो सकती है?
Ans- जी नहीं, जोड़ों का दर्द से किसी व्यक्ति की मौत नहीं होती है, हालांकि जोड़ों का दर्द बढ़ने से उसे चलने में परेशानी हो सकती है।
Q6. जोड़ों का दर्द का इलाज संभव है?
Ans- जी हां, जोड़ों का दर्द का इलाज संभव है।
इस स्थिति में, दवाई लेना, थेरेपी लेना, एक्सराइज़ करना,ऑपरेशन कराना इसके इलाज के बेहतर तरीके साबित हो सकते हैं।
Q7. जोड़ों का दर्द होने पर किस तरह का भोजन करना चाहिए?
Ans- जोड़ों का दर्द होने पर मछली, अदरक, लहसून, ब्रोकली, पालक, अंगूर इत्यादि का सेवन किया जा सकता है।
इस तरह का भोजन जोड़ों का दर्द कम करने और इससे पीड़ित लोगों को जल्द से ठीक होने में सहायता कर सकते हैं।

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