फ्लू: लक्षण, कारण, उपचार इत्यादि (flu in Hindi)

फ्लू बदलते मौसम की देन है, जो किसी भी व्यक्ति को हो सकती है।
आमतौर पर, यह कुछ समय के बाद ठीक हो जाती है, लेकिन कुछ लोगों के लिए सिरदर्द बन जाती है, जिनकी वजह से उन्हें काफी सारी परेशानियों को झेलना पड़ता है।
ऐसा मुख्य रूप से उनकी फ्लू को नज़रअंदाज़ करने का नतीजा होता है क्योंकि उनकी नज़र में यह एक आम समस्या है, जिसके लिए घरेलू नुस्खे को अपनाना ही काफी होता है।
वर्तमान समय में लोगों के मन में फ्लू, सर्दी-जुखाम और कोरोनावायरस को लेकर काफी सारी दुविधाएं हैं क्योंकि कोरोनावायरस और फ्लू के लक्षण काफी हद तक एक समान ही होते हैं, इसलिए वे इनके बीच के अंतर को समझ नहीं पाते हैं।
यदि आप भी ऐसी ही दुविधा में हैं, तो आपको इस लेख को ज़रूर पढ़ना चाहिए क्योंकि यह लेख आपको फ्लू से जुड़ी आवश्यक जानकारी देने में सहायता करेगा ताकि आपके मन की यह दुविधा दूर हो सके।

फ्लू क्या है? (What is flu? in Hindi)

फ्लू को इन्फ्लूएंजा के नाम से भी जाना जाता है। इन्फ्लूएंजा (influenza) मुख्य रूप से ऐसा वायरस है, जो मौसम के बदलने पर सक्रिय होता है।
इसके अलावा,जिसके एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमित होने की संभावना काफी रहती है।
एक ओर, कुछ लोगों को फ्लू से 7-10 दिन में ठीक हो जाते हैं, तो वहीं दूसरी ओर, कुछ लोगों के लिए यह काफी सारी गंभीर समस्याओं का कारण भी बन सकता है।

फ्लू के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of flu in Hindi)

किसी भी व्यक्ति को फ्लू हो सकता है इसलिए उसके लिए इसके लक्षणों को पहचाना मुश्किल हो सकता है।
इसके बावजूद,यदि किसी शख्स को अपने शरीर में ये 5 लक्षण नज़र आए तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए क्योंकि ये फ्लू के संकेत हो सकते हैं-

  • बुखार होना- फ्लू होने का प्रमुख लक्षण बुखार होना है।
    आमतौर पर, बुखार 1-2 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन फ्लू होने पर यह 7-10 दिनों तक रहता है, जिसे किसी भी व्यक्ति को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
  • सुखी खांसी होना- यदि किसी शख्स को सुखी खांसी होती है, जो उसे इसकी जांच ज़रूर करानी चाहिए क्योंकि यह फ्लू का लक्षण हो सकता है।
  • गले में खराश होना- फ्लू का अन्य लक्षण गले में खराश होना है।
    यदि लोगों को काफी समय तक इसे जूझना पड़ रहा है, तो उन्हें तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए क्योंकि यह फ्लू जैसी बीमारी का संकेत हो सकता है।
  • सिरदर्द होना- अक्सर,फ्लू की शुरूआत सिरदर्द से भी हो सकती है।
    ऐसी स्थिति में लोगों को सिरदर्द को गंभीरता से लेना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से मिलकर अपनी सेहत की जांच करानी चाहिए।
  • कमज़ोरी महसूस होना- फ्लू के ऐसे काफी सारे मामले देखने को मिलते हैं, जिनमें इनकी शुरूआत कमज़ोरी महसूस से होती है।
    इसी कारण, यदि किसी व्यक्ति को अचानक से कमज़ोरी महसूस होती है, तो उसे इसकी सूचना अपने डॉक्टर को देनी चाहिए ताकि इसे बढ़ने से रोका जा सके।

फ्लू के कारण क्या हो सकते हैं? (Causes of flu in Hindi)

चूंकि, फ्लू कई सारे कारणों से हो सकता है, इसी कारण इसके सटीक कारणों का पता लगाना काफी मुश्किल होता है।
इसके बावजूद,अभी तक फ्लू पर किए गए अध्ययनों से स्पष्ट है कि यह बीमारी मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण से होती है-

  • बच्चे या उम्रदराज़ होना- फ्लू होने का सबसे अधिक खतरा बच्चे या उम्रदराज़ लोगों को होता है।
    ऐसे लोगों को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए और सेहत संबंधी किसी तरह की परेशानी होने पर तुरंत हेल्थचेकअप कराना चाहिए।
  • कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का होना- फ्लू ऐसे लोगों को होने की संभावना सबसे अधिक रहती है, जिनकी कमज़ोरी रोग-प्रतिरोधक क्षमता होती है।
    ऐसे लोगों को मौसम के बदलने पर पूरी सावधानी बरतनी चाहिए ताकि उन्हें फ्लू जैसी समस्या न हो।
  • अन्य बीमारी से पीड़ित होना- यदि कोई व्यक्ति डायबिटीज़, दिल संबंधी बीमारियों, ब्लड प्रेशर इत्यादि से पीड़ित हैं, तो उन्हें अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि उन्हें फ्लू न हो।
  • गर्भवती होना- यदि कोई महिला गर्भवती है, तो उसे फ्लू होने की संभावना काफी अधिक रहती है।
    ऐसी महिलाओं को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि उन्हें फ्लू जैसी बीमारी न हो।
  • वजन का अधिक होना- फ्लू ऐसी स्थिति में भी हो सकता है, जब किसी व्यक्ति का वजन का अधिक होता है।

फ्लू की पहचान कैसे करें? (Diagnosis of flu? in Hindi)

हालांकि, फ्लू कुछ समय के बाद स्वयं ही ठीक हो जाता है, लेकिन इसके बावजूद यदि इसकी पहचान समय रहते पर कर ली जाए तो इसके साइड-इफेक्ट्स को रोका जा सकता है।
इस प्रकार, डॉक्टर फ्लू की पहचान मुख्य रूप से इन 5 तरीके से करते हैं-

  • मेडिकल हिस्ट्री देखना- फ्लू की पहचान करने का सबसे आसान तरीका मेडिकल हिस्ट्री देखना है।
    डॉक्टर ऐसा करके इस बात की पुष्टि करते है कि व्यक्ति के परिवार में अन्य कोई व्यक्ति फ्लू से पीड़ित तो नहीं है।
  • नाक की जांच करना- मेडिकल हिस्ट्री की जांच करने के अलावा फ्लू की पहचान नाक की जांच करके भी की जाती है।
    ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि किसी व्यक्ति को नाक संबंधी बीमारी तो नहीं।
  • आँखों की जांच करना- अक्सर, फ्लू की पहचान आँखों की जांच के द्वारा भी की जाती है।
    डॉक्टर ऐसा करके यह पता लगाते हैं कि फ्लू का आँखों पर कितना असर पड़ा है।
  • गले की जांच करना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि फ्लू का अन्य लक्षण गले में खराश होना है।
    इसी कारण, फ्लू की पहचान गले की जांच करके भी की जाती है।
  • ब्लड टेस्ट करना- अक्सर, फ्लू की पहचान ब्लड टेस्ट के द्वारा भी की जाती है।
    ब्लड टेस्ट में फ्लू की बढ़ोतरी खून में की जाती है।

फ्लू का इलाज कैसे किया जा सकता है? (Treatment of flu in Hindi)

जैसे ही किसी व्यक्ति के फ्लू से पीड़ित होने की पुष्टि होती है, वैसे ही उसे इसका इलाज शुरू कराना चाहिए।
अत: इस बीमारी से पीड़ित शख्स फ्लू निम्नलिखित तरीके से इससे निजात पा सकता है-

  • घरेलू नुस्खे अपनाना- फ्लू का इलाज करने का सबसे आसान तरीका घरेलू नुस्खे अपनाना है।
    इस स्थिति में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना या फिर सादा भोजन (किचड़ी या दलिया) करना उपयोगी साबित हो सकता है।
  • दवाई लेना- फ्लू का इलाज दवाई का सेवन करके भी किया जा सकता है। ये दवाई फ्लू के प्रभाव को शरीर से कम करने और इससे पीड़ित व्यक्ति को जल्द-से-जल्द ठीक होने में सहायता करती हैं।
  • नाक की दवाई का सेवन करना- अक्सर, फ्लू का कारण नाक संबंधी समस्याएँ भी होती हैं।
    इसी कारण, फ्लू का इलाज नाक की दवाई का सेवन करके भी किया जाता है।
  • आराम करना- अक्सर, डॉक्टर फ्लू से पीड़ित लोगों को आराम करने की सलाह देते हैं।
    आराम करने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है, जिससे फ्लू से पीड़ित लोगों की सेहत में सुधार होता है।
  • दर्द-निवारक दवाइयों का सेवन करना- चूंकि, फ्लू में पूरे शरीर में दर्द होता है, जिसकी वजह से इससे पीड़ित व्यक्ति को काफी तकलीफ़ महसूस होती है।
    डॉक्टर फ्लू से पीड़ित लोगों को दर्द-निवारक दवाई लेने की सलाह देते हैं ताकि इस दर्द को कम किया जा सके।

फ्लू के साइड-इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं? (Side-effects of flu in Hindi)

ऐसा माना जाता है कि यदि किसी बीमारी का इलाज सही समय पर न किया जाए तो वह कुछ समय के बाद गंभीर रूप ले सकती है।
यह बात फ्लू पर भी लागू होती है इसलिए इससे पीड़ित लोगों को किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए और अपना इलाज जल्द-से-जल्द शुरू कराना चाहिए।
इस कारण, यदि फ्लू काफी लंबे समय तक लाइलाज रहे तो इससे पीड़ित लोगों को इन 5 साइड-इफेक्ट्स का सामना करना पड़ सकता है-

  • साइनस होना- फ्लू का प्रमुख साइड-इफेक्ट्स साइनस की संभावना का बढ़ना है।
    ऐसी स्थिति में फ्लू से पीड़ित लोगों को मेडिकल सहायता की ज़रूरत पड़ सकती है।
  • कान में इंफेक्शन का होना- यदि फ्लू का इलाज समय रहते न किया जाए तो इसका असर शरीर के अन्य अंगों जैसे नाक, नाक इत्यादि पर भी पड़ सकती है।
    इसी कारण, फ्लू की वजह से कान में इंफेक्शन हो सकता है, जिसकी वजह से काफी गंभीर समस्याएँ भी हो सकती हैं।
  • दिल में सूजन होना- अक्सर, फ्लू का असर दिल पर भी पड़ सकता है।
    अत: यह दिल में सूजन की वजह भी बन सकती है, जो दिल की धड़कनों पर बुरा असर डाल सकता है।
  • अस्थमा का दौरा पड़ना- फ्लू का लंबे समय तक लाइलाज रहने पर अस्थमा का दौरा पड़ने की संभावना भी बढ़ सकती है।
    ऐसी स्थिति में मेडिकल सहायता लेना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
  • किडनी का खराब होना- फ्लू का गंभीर साइड-इफेक्ट्स किडनी का खराब होना है।
    हालांकि, किडनी के खराब होने का इलाज किडनी ट्रांसप्लांट के द्वारा संभव है, लेकिन फिर भी सभी लोगों को यह कोशिश करनी चाहिए कि उन्हें इस समस्या का सामना न करना पड़े।

फ्लू से बचाव कैसे किया जा सकता है?(How to prevent flu? in Hindi)

हालांकि, फ्लू के काफी सारी साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं, जिनकी वजह से लोगों को काफी सारी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है।
इसके बावजूद, राहत की बात यह है कि यदि कुछ बातों का पालन किया जाए तो फ्लू से बचाव किया जा सकता है।
इस प्रकार, फ्लू से बचाव में कुछ बातें कारगर साबित हो सकती हैं, जो निम्नलिखित हैं-

  • हाथों को नियमित रूप से धोना- फ्लू की बीमारी मुख्य रूप से संक्रमण या वायरस के संपर्क में आने से होती है।
    इसी कारण, इसके बचाव का उपयोगी उपाय साफ-सफाई रखना है।
    इस स्थिति में हाथों को नियमित रूप से धोना काफी सहायक तरीका साबित हो सकता है।
  • भीड़-भाड़ वाले इलाके में न जाना- चूंकि, फ्लू की बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है।
    इसी कारण, हम सभी लोगों को भीड़-भाड़ वाले इलाके में जाने से बचना चाहिए ताकि हमारे फ्लू से संक्रमित होने की संभावना कम रहे।
  • छिंकते या खांसते समय रूमाल या टिशू पेपर का इस्तेमाल करना- यदि कोई व्यक्ति छिंकते या खांसते समय मुंह पर रूमाल या टिशू पेपर रखता है, तो काफी सारे लोगों को फ्लू से संक्रमित होने से बचा सकता है।
  • पौष्टिक भोजन करना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि फ्लू कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता के होने से भी हो सकता है।
    इसी कारण, हम सभी लोगों को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए और पौष्टिक भोजन ही करना चाहिए।
  • धूम्रपान का सेवन न करना- किसी भी व्यक्ति की सेहत पर धूम्रपान का बुरा असर पड़ता है।
    इससे उसके बीमारी होने की संभावना काफी ज़्यादा बढ़ सकती है इसलिए उन्हें धूम्रपान का सेवन नहीं करना चाहिए ताकि वे फ्लू जैसी बीमारी के शिकार न बने।

हालांकि, फ्लू की समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर बनती जा रही है क्योंकि इसका असर काफी सारे लोगों की ज़िदगियों पर पड़ता है।
इसके बावजूद यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोगों में फ्लू को लेकर जागरूकता की काफी कमी है, जिसके कारण वे इसके आसानी से शिकार बन जाते हैं।

हमें इस स्थिति को बदलने के लिए अपने-अपने स्तर पर कोशिश करनी चाहिए ताकि भविष्य में यह किसी अन्य व्यक्ति की ज़िदगी को बर्बाद न करे।
इस प्रकार, हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित हुआ होगा क्योंकि इसमें हमने फ्लू संबंधी आवश्यक जानकारी दी है।

सबसे अधिक पूछे जाने वाले सवाल (FAQ’S)

Q1. फ्लू कितने समय तक रह सकता है?
Ans- आमतौर पर, फ्लू के लक्षण 1-4 दिनों में दिखने लग जाते हैं और यह बीमारी मुख्य रूप से 7-10 दिनों तक रह सकती है।

Q2. फ्लू के शुरूआती लक्षण क्या हैं?

Ans- फ्लू के शुरूआती लक्षणों में चक्कर आना, सर्दी लगना, खांसी होना, बुखार होना इत्यादि शामिल हैं।

Q3. फ्लू में क्या खाना चाहिए?
Ans- फ्लू से पीड़ित लोगों को अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
इस स्थिति में दलिया, खिचड़ी, दही, हरी सब्ज़ियाँ, फल इत्यादि का सेवन करना उपयोगी साबित हो सकता है।

Q4. फ्लू के चरण कितने होते हैं?
Ans- फ्लू के मुख्य रूप से 3 चरण हैं-
1. फ्लू के लक्षणों का नज़र आना
2. बुखार या मांसपेशियों की अकड़न का कम होना
3. लक्षणों का कम होना और सेहत में सुधार होना

Q5. क्या फ्लू होने पर सोना सही है?
Ans- जी हां, फ्लू होने पर जितना हो सके सोना चाहिए।
इससे शरीर में आवश्यक ऊर्जा आती है, जिससे इससे पीड़ित व्यक्ति की सेहत में सुधार होता है।

Q6. फ्लू होने पर काम करना चाहिए या नहीं?
Ans- चूंकि,फ्लू में शख्स को काफी कमज़ोरी महसूस होती है इसलिए उसके लिए काम करना काफी मुश्किल हो सकता है।
डॉक्टर फ्लू से पीड़ित लोगों को बुखार के ठीक होने के 24 घंटे तक घर पर आराम करने की ही सलाह देते हैं ताकि उनका शरीर किसी भी काम करने के अनुकूल बन सके।

Q7. क्या फ्लू में संतरे का रस पीना सही है?
Ans- जी हां, फ्लू में संतरे का रस पीना सही है क्योंकि इसमें विटामिन सी होता है, जो शरीर को ऊर्जा देने का काम करता है।

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