अस्थमा क्या है , कैसे करें इलाज? (Asthma in Hindi)

21वीं सदी में, ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के कारण अस्थमा काफी तेज़ी से फैल रही है, जिसकी वजह से बहुत सारे लोगों को अपनी ज़िदगी से हाथ धोना पड़ता है।
हिंदुस्तान टाइम्स में पब्लिज़ड रिपोर्ट के अनुसार हर साल भारत में 20 मिलियन लोग अस्थमा से पीड़ित हो जाते हैं।
क्या आप यह जानते हैं? कि किसी भी अस्थमा के मरीज के लिए पालतू पशुओं के साथ खेलना, उसकी पीठ को सहलाना, उनकी गंध को सूंघना काफी मुश्किल होता है।
लेकिन, रोहन ने हंसते हुए कहा कि,“मेरे लिए यह सब करना मुश्किल नहीं है क्योंकि अब मैें अपने मनपसंद खेल को खेल सकता हूं”।
रोहन सच में काफी लक्की है क्योंकि वह खुशहाल ज़िदगी जी रहा है, लेकिन हर कोई रोहन जितना लक्की नहीं होता है क्योंकि उन्हें अस्थमा जानकारी नहीं होती है और इसी कारण कब उनकी यह  समस्या कब गंभीर रूप ले जाती है उन्हें पता ही नहीं चलता है।
अगर आप भी इस बीमारी के बारे में नहीं जानते हैं तो आपको इस लेख को जरूर  पढ़ना चाहिए क्योंकि इस लेख में हमने अस्थमा की पूरी जानकारी दी है।

क्या है अस्थमा? (What is Asthma in Hindi)

किसी व्यक्ति के Lung तक हवा तक न पहुंच पाने के कारण उसे सांस लेने में होने वाली तकलीफ को अस्थमा कहा जाता है।
अस्थमा की वजह से उसे कई समस्याएं जैसे सांस लेने, जोर-जोर से सांस लेना, खांसी होना, सांस का फूलना इत्यादि होती हैं।
अलग-अलग लोगों पर अस्थमा का असर अलग-अलग होता है, कुछ लोगों के लिए यह एक समस्या होती है,तो वहीं कुछ लोगों को इसकी वजह से काफी परेशानी झेलनी पड़ती हैं।

अस्थमा के लक्षण कौन-कौन से हैं? (Asthma Symptoms in Hindi)

आमतौर पर,अस्थमा के लक्षणों में सांस का फूलना, सीने में दर्द होना, खांसी होना इत्यादि शामिल हैं। इन सभी लक्षणों में उतार-चढ़ाव हो सकते हैं और कुछ मामलों में अस्थमा से पीड़ित लोगों को यह पता ही नहीं चलता है कि उन्हें अस्थमा की बीमारी है क्योंकि उनमें ये लक्षण नज़र नहीं आते हैं।
अस्थमा की कई सारी संभावनाएं होती हैं, लेकिन अस्थमा के असर को नॉर्मल समझा जा सकता है और इसके लिए इलाज के सामान्य तरीकों से जैसे दवाईयां लेने को अपनाया जा सकता है।
अस्थमा के कुछ मामलें ऐसे देखने को मिलते हैं,जिनमें लोगों को कई सारी परेशानाओं जैसे दिल की धड़कनों का तेज़ी से चलना,इनहेलर का बार-बार इस्तेमाल करना, सांस लेने की समस्या का बढ़ना इत्यादी का सामना करना पड़ता है।
अस्थमा के कुछ मरीजों के लिए स्थितियां नेचुरल या Man-Made Conditions पर निर्भर करती है।  किसी व्यक्ति को अस्थमा का अट्रेक होने को अस्थमा ट्रिगर कहा जाता है।
जब ये सभी Substances इकट्ठा हो जाता है,तो इससे लोगों की Air-passages प्रभावित हो जाती है और वह बलगम से भर जाती है।
जिन चीजों से अस्थमा का खतरा बढ़ सकता है, उनकी सूची नीचे दी गई है-

  1. कैमिकल और फ्रेग्नेंस- अगर, कोई व्यक्ति Strong कैमिकल और फ्रेग्रेंस के contact में आता है, तो उसे अस्थमा होने की संभावना बढ़ सकती है।
  2. पराग (Pollen)- अक्सर, अस्थमा पराग (Pollen) के कारण भी हो सकता है। इसी कारण सभी लोगों को पराग से दूरी बनाए रखनी चाहिए ताकि उन्हें किसी तरह की बीमारी न हो।
  3. तंबाकू का सेवन करना- दमा की बीमारी उस शख्स को भी हो सकती है, जो तंबाकू का सेवन करता है।
  4. मौसम का बदलना, मुख्य रूप से सर्दी में (ठंडी हवा का चलना)- कई बार, मौसम के बदलने से भी अस्थमा के होने की समस्या बढ़ सकती है। यह समस्या सर्दी के मौसम में भी बढ़ सकती है, इसी कारण लोगों को सर्दी के मौसम में अपनी Health पर विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  5. पालतू पशुओं के बाल- अगर आपको पालतू पशुओं (Pets) के साथ खेलना पसंद है, तो आपको सावधान रहना चाहिए क्योंकि यह आपको दमा का शिकार बना सकता है।

अस्थमा के लक्षण रात में ज्यादा बिगड़ सकते हैं और ज्यादातर लोगों को रात में सांस लेने में परेशानी होती है।

अस्थमा के कारण कौन-कौन से हैं? (Asthma Causes in Hindi)

हालांकि,अभी तक लोगों को इसकी सही जानकारी नहीं है कि किस वजह से अस्थमा होता है, लेकिन फिर भी दुनियाभर के ज्यादातर Reseacher और डॉक्टर यह दावा किया है कि अस्थमा की बीमारी मुख्य रूप से Enivormental और Genetic की वजह से होती है।
इसके अलावा,अस्थमा की बीमारी इन 5 कारणों से होती है-

  1. Smoking करना- चूंकि, अस्थमा फेफड़े की बीमारी है, इसी कारण जिन लोगों को स्मोकिंग करने का शौक है, उन्हें दमा की बीमारी हो सकती है।
  2. मोटापा होना- ऐसा माना जाता है कि मोटापा कई सारी बीमारियों का कारण बन सकता है। यह बात अस्थमा पर भी लागू होता है क्योंकि ऐसे कई सारे मामले देखने को मिलते हैं, जिनमें दमा की बीमारी मोटापे की वजह से होती है।
  3. एलर्जी होना- अक्सर, अस्थमा की शुरूआत एलर्जी के साथ होती है। इसी कारण, एलर्जी से पीड़ित व्यक्ति को किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए ताकि उन्हें कोई गंभीर बीमारी न हो।
  4. स्ट्रेस लेना- आज के Stressful युग में कई सारी बीमारियां फैल रही हैं। इनमें अस्थमा भी शामिल है।
  5. प्रदूषण होना- दमा की बीमारी के होने की संभावना उस स्थिति में काफी बढ़ जाती है, जब Air Pollution काफी बढ़ जाती है।

लोगों को डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए? (Asthma Indications in Hindi)

अगर किसी व्यक्ति को डेली काम करते समय खांसी, सांस लेने में तकलीफ, इत्यादि परेशानी होती है तो उसे डॉक्टर से मिलना चाहिए।

सबसे खराब स्थिति में अगर कोई व्यक्ति काफी समय से सांस लेने की तकलीफ के कारण इनहेलर का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।

अत: ऐसी स्थिति में उसे तुरंत डॉक्टर मिलकर इसका इलाज शुरू कराना चाहिए।
LetsMD के सहयोगी अस्पताल लोगों को सबसे अच्छे इलाज के तरीके और सर्विस देते हैं।
आप 95558-12112 पर Call करके हमसे संपर्क कर सकते हैं और अस्थमा से होने वाले Side-Effects को कम कर सकते हैं।

अस्थमा के साइड इफेक्ट्स कौन-कौन से हैं? (Asthma Side-Effects in Hindi)

आमतौर पर,अस्थमा को गंभीरता से नहीं लिया जाता है और इसी कारण इससे पीड़ित लोग अपना इलाज सही तरीके से नहीं कराते हैं।
इसी लापरवाही की वजह से उन्हें कई सारी समस्याओं से गुजरना पड़ता है।
अत: दमा से पीड़ित व्यक्ति को किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए क्योंकि उन्हें दमा की वजह  से निम्नलिखित साइड इफेक्ट्स का सामना करना पड़ सकता है-

  • ओरल कैंडिडिआसिस का होना- अस्थमा की वजह से लोगों को ओरल कैंडिडिआसिस (Oral candidiasis) की समस्या भी हो सकती है। ओरल कैंडिडिआसिस मुख्य रूप से मुंह का इंफेक्शन होता है, जिसकी वजह से लोगों को खाने को निगलने में दिक्कत होती है।
  • डिटोनिया की बीमारी का होना- दमा का अन्य साइड-इफेक्ट्स डिटोनिया (Dystonia) भी है। डिटोनिया की बीमारी में शख्स का Body Structure बिगड़ जाता है।
  • मुंह या गले में खराश का होना- अगर,अस्थमा के कारण किसी व्यक्ति  के मुंह या गले में खराश हो जाती है, तो उसे इसका तुंरत इलाज कराना चाहिए।
  • युवाओं में हड्डियों का कमजोर का होना- अक्सर, दमा की वजह से कुछ लोगों  की हड्डियां कमजोर भी हो जाती है।
  • मोतियाबिंद की बीमारी का होना- कई बार,अस्थमा की वजह से लोगों को मोतियाबिंद की बीमारी भी हो सकती है।

दमा का इलाज कैसे करें? (Asthma Treatments in Hindi)

हालांकि, दमा या अस्थमा को पूरी तरह से ठीक करना मुमिकन नहीं है, लेकिन फिर भी ऐसे बहुत सारे तरीके हैं, जिनके द्वारा अस्थमा की बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है।
ब्रॉन्कल थर्मोप्लास्टी सर्जरी (Bronchial Thermoplasty) भी ऐसा ही तरीका है, जिसमें मानवशरीर की Airwall के दायरे को फैलाया जाता है और उसमें मौजूद muscles को मुलायम किया जाता है। इस सर्जरी को अस्थमा की खतरनाक स्थिति में किया जाता है।
इस तरह से, ब्रॉन्कल थर्मोप्लास्टी सर्जरी दमा की बीमारी को कंट्रोल करने का बेहतर तरीका है।
ब्रॉन्कल थर्मोप्लास्टी सर्जरी दमा का इलाज नहीं करती है बल्कि यह फेफड़ों की मांसपेशियों को सिकुड़ने की प्रक्रिया है, जिससे कि अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति के लिए सांस लेना आसान हो सके।

अस्थमा की रोकथाम कैसे करें? (Asthma Precautions in Hindi) 

अस्थमा को कंट्रोल करना काफी लंबी लड़ाई है, जिसे दमा के मरीज को लड़ना पड़ता है। लेकिन, डॉक्टर की मदद से इस काम को आसानी से किया जा सकता है।
अत:अस्थमा से होने वाले साइड इफेक्ट्स को कम करने के लिए इन 5 सावधानियों को बरता जा सकता है-

  1. अस्थमा प्लान को फॉलो करना- अस्थमा से पीड़ित सभी लोगों को अस्थमा प्लान को फॉलो करना चाहिए ताकि उन्हें किसी समस्या का सामना न करना पड़े।
  2. वैक्सिन करना- दमा के मरीज को हेल्थी रहने के लिए समय-समय पर वैक्सिन लेना चाहिए। 
  3. अस्थमा ट्रीगर को पहचानना- सभी लोगों के लिए अस्थमा से बचने के लिए अस्थमा ट्रीगर (Asthma Trigger) को पहचानना काफी जरूरी है।
  4. समय-समय पर दवाई लेना- अस्थमा से पीड़ित को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाईयों को सही समय पर खाना चाहिए।
  5. योगा करना- अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति के लिए योगा करना जैसे धनुरासन, उष्ट्रासन, शवासन इत्यादि लाभदायक होता है।

यकनीन रूप से अस्थमा (Asthma) के मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन काफी तेज़ी से फैल रही है, जिसकी वजह से उन्हें काफी सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ऐसा मुख्य रूप से लोगों में दमा की जानकारी न होने के कारण होता है।
हालांकि, विश्व स्वास्थ संगठन (World Health Organisation) ने दमा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए काफी प्रयास किए हैं, इसी कारण हर साल 5 मई को विश्व दमा दिवस (World Asthma Day) के रूप में मनाया जाता है।

लेकिन, Unfortunetly ज्यादातर लोगों को अस्थमा की सही जानकारी नहीं है और इसी कारण वे इसका सही इलाज नहीं करा पाते हैं।
इस प्रकार हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना  उपयोगी साबित हुआ होगा क्योंकि इसमें हमने दमा या अस्थमा की पूरी जानकारी दी है।
अगर आप या आपकी जान-पहचान में कोई व्यक्ति किसी Health Problem और उसके Solution के बारे में जानना चाहता है कि वह इसके लिए हमारे टॉलफ्री नंबर 95558-12112 पर Call कर सकता है।

सबसे अधिक पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

  1. अस्थमा में क्या खाना नहीं चाहिए?
    अगर किसी व्यक्ति को अस्थमा है, तो उसे दूध,अंडा, बादाम, मछ्ली इत्यादि  को नहीं खाना चाहिए क्योंकि ये दमा की समस्या को बढ़ा सकते हैं।

  2. क्या अस्थमा से किसी की जान जा सकती है?
    अस्थमा गंभीर बीमारी और अगर इसका इलाज सही समय पर न किया जाए तो इसकी वजह से व्यक्ति की जान भी जा सकती है।
    हाल में की गई एक Study में यह पता चला है कि जिन बच्चों की मौत अस्थमा के कारण हुई उनमें से एक तिहाई (one third) को हल्की बीमारी थी।
    दमा के सही तरीके से इलाज होने पर अस्थमा से पीड़ित लोग बेहतर और सामान्य ज़िदगी जी सकते हैं।

  3. क्या अस्थमा का इलाज करने के लिए वॉकिंग करना सही है?
    एक्सराइज़ के दौरान कंट्रोल, सही तरीके से सांस लेना व्यक्ति के फेफड़ों की Capacity को बढाता है और इसके साथ में इससे muscles भी मजबूत होती हैं।
    इसके अलावा, योग करने से लोगों का स्ट्रेस लेवल भी कम होता है क्योंकि अस्थमा से पीड़ित कई सारे लोगों के लिए स्ट्रेस खतरनाक साबित हो सकता है।

  4. क्या अस्थमा उम्र बढ़ने के साथ-साथ खतरनाक हो सकता है?
    अस्थमा ऐसी बीमारी है, जिसका असर सभी लोगों पर अलग-अलग होता है।
    जहां एक ओर, कुछ बच्चों को उम्र बढ़ने के साथ-साथ दमा की बीमारी से छुटकारा मिल जाता है, तो वहीं दूसरी ओर, कुछ लोगों को उम्र बढ़ने के साथ-साथ काफी सारे परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
    लेकिन, डॉक्टर के द्वारा दी गई दवाईयों के समय पर खाने से अस्थमा को बढ़ने से रोक सकता है और इसके साथ में फेफड़े के काम करने की क्षमता को भी सुधार सकता है।

  5. क्या अस्थमा इनहेलरों से फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) हो सकता है?
    दमा या अस्थमा के लंबे समय तक रहने पर कई सारे कैंसरों के होने का खतरा बढ़ सकता है।
    कुछ Studies से पता चला है कि अस्थमा के कारण फेफड़ों में होने वाली सूजन के कारण Lung  Cancer के होने का एक कारण हो सकता है- इसका मतलब है कि अस्थमा के साथ-साथ कई सारे तत्वों के मिलकर Lung Cancer होता है।
    इसी कारण फेफड़ों का कैंसर, अस्थमा इनहेलरों की वजह से नहीं होता है।