Squint Eye Surgery in Hindi (प्रक्रिया, खर्चा, कारण, इत्यादि)

नितिन का एक हंसता-खेलता परिवार है, जिसमें उसकी बीवी, एक बेटा और बेटी शामिल हैं। एक दिन वह अपने परिवार के साथ खेल रहा था, तो जब उसने एक गेंद को अपने बेटे की ओर फैंका तो उसका बेटा उस गेंद को पकड़ नहीं पाया, इसके बजाय वह उस गेंद को पकड़ने के लिए किसी ओर दिशा में देखने लगा।

चूंकि, ऐसा पहली बार हुआ था, तो नितिन ने इसे मजाक के रूप में लिया और इस बात को नजरअंदाज कर दिया। लेकिन, जब ऐसा बार-बार हुआ तो नितिन को चिंता होने लगी और उसने इस बारे में आंखों के चिकित्सक को बताया, तब उन्होंने उसे अपने बेटे को क्लीनिक में लाने को कहा। अगले दिन वह अपने बेटे को डॉक्टर के पास ले गया।

वहां पर डॉक्टर ने उसकी आँखों की अच्छे से जांच की, जिससे उन्हें उसकी आंखों में भेंगापन की समस्या का पता चला, तब उन्होंने नितिन को इसका अतिशीघ्र इलाज कराने की सलाह दी।

चूंकि, नितिन को भेंगेपन (Squint Eye in Hindi) के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी, तो पहले उसने इसके बारे में शोध करने का निर्णय किया। अगर आप भी भेंगेपन या तिरछापन  के बारे में नहीं जानते हैं, तो फिर आपको इस लेख को जरूर पढ़ना चाहिए-

 

Table of Contents

भेंगापन सर्जरी (Squint Eye Surgery in Hindi)

यह वह सर्जरी होती है, जिसे आंखों का भेंगापन, दृष्टि दोष , तिरछापन  इत्यादि आंखों की समस्याओं को ठीक करने के लिए किया जाता है।

सामान्य रूप से आंखों के आस-पास छह मांसपेशियां होती हैं, जिनकी सहायता से किसी वस्तु पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। लेकिन, भेंगेपन की स्थिति में आंखों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे आंखों को किसी एक वस्तु पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है।

ऐसी स्थिति में एक आंख तो उसे देखती है, लेकिन वहीं, दूसरी आंख किसी अन्य वस्तु पर ध्यान केंद्रित करती है। वे दोनों आंखें विभिन्न दिशाओं में देखती हैं, इसी को भेंगापन या तिरछापन की समस्या कहा जाता है।

जब कोई व्यक्ति भेंगेपन से जूझ रहा होता है, तब उसे डॉक्टर दवाईयां, चश्मा इत्यादि का उपयोग करने  की सलाह देते हैं, लोकिन जब उसे इन सभी उपायों से आराम नहीं पहुंचता है, तब उसके लिए भेंगापन सर्जरी  कराना ही विकल्प बचता है।

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भेंगापन सर्जरी कराने के कारण (Indications of Squint Eye Surgery in Hindi)

अगर कोई व्यक्ति निम्नलिखित स्थितियों से जूझ रहा है, तो डॉक्टर उसे भेंगापन सर्जरी कराने की सलाह दे सकते हैं-

  • भेंगापन या तिरछापन की बीमारी का होना- जैसा कि पहले बताया गया है कि यह सर्जरी कराने की सलाह मुख्य रूप से उस व्यक्ति को दी जाती है, जो भेंगापन से पीड़ित होता है।

  • आंखों पर चोट लगना-  जिस व्यक्ति को कभी आंखों पर चोट लगी हो, उन्हें आंखों की समस्या हो सकती है, ऐसी स्थिति में उन्हें भेंगापन सर्जरी नामक आंख की सर्जरी  कराने की सलाह दी जाती है।

  • अनुवांशिक इतिहास का होना- जब कोई मरीज आंखों की समस्या को लेकर आंखों के डॉक्टर के पास जाता है, तब डॉक्टर उसके अनुवांशिक इतिहास की जांच करता है, ताकि इस बात का पता चल सके कि उसके परिवार में किसी और व्यक्ति को तो आंखों से संबंधित कोई बीमारी जैसे आंखों का भेंगापन तो नहीं है।

    अगर इससे किसी तरह के भेंगापन के अनुवांशिक इतिहास का पता चलता है, तब डॉक्टर उसे भेंगापन सर्जरी  कराने की सलाह देते हैं।

  • अन्य किसी आंखों की बीमारी या अन्य बीमारी का होना- जब कोई व्यक्ति आंखों की समस्या के लिए डॉक्टर के पास जाता है, तो डॉक्टर उसकी इस बात का पता लगाते हैं कि कहीं उसे कोई बीमारी जैसे मधुमेह, ब्रेन ड्यूमर इत्यादि तो नहीं हैं, क्योंकि इनके कारण भेंगापन हो सकता है।

  • इलाज के अन्य उपायों का कारगर साबित न होना- किसी व्यक्ति को आंखों की समस्या होने पर डॉक्टर उसे विभिन्न उपायों जैसे चश्मा, दवाई, आंखों के व्यायाम  इत्यादि अपनाने की सलाह देते हैं क्योंकि किसी भी बीमारी के लिए सर्जरी कराना अंतिम उपाय होता है, लेकिन जब उसके लिए आंखों के इलाज  के अन्य उपाय कारगर साबित नहीं होते हैं, तभी डॉक्टर उसे भेंगापन सर्जरी कराने की सलाह दे सकते हैं।

भेंगापन सर्जरी प्रक्रिया (Squint Eye Surgery Procedure in Hindi)

जैसा कि पहले ही यह बात स्पष्ट है कि भेंगापन सर्जरी  को मुख्य रूप से भेंगापन की समस्या को ठीक करने के लिए किया जाता है।

इस सर्जरी को मुख्य रूप से उस स्थिति में किया जाता है, जब भंगापन की समस्या के इलाज में कोई अन्य उपाय जैसे चश्मा,दवाई, आंखों के व्यायाम इत्यादि सफल नहीं होते हैं

भेंगापन सर्जरी प्रक्रिया में निम्नलिखित बिंदू शामिल होते हैं-

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  • स्टेप 2- निर्णय लेना- जब किसी मरीज को डॉक्टर सर्जरी कराने की सलाह देते हैं, तब उसे यह निर्णय लेना होता है कि उसे यह सर्जरी करानी है या नहीं। इसके लिए वह सर्जरी से जुड़ी सभी तरह की आवश्यक जानकारी को जुटाता है।

  • स्टेप 3- अस्पताल में भर्ती होना- जब वह मरीज यह निर्णय ले लेता है, तब उसे अस्पताल में भर्ती किया जाता है और इस सर्जरी को शुरू करने से पहले उसके स्वास्थ्य की फिर से जांच की जाती है ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि उसे अन्य कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या तो नहीं है, क्योंकि वह भेंगापन सर्जरी की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

  • स्टेप 4- एनेस्थीसिया देना-  भेेंगेपन की प्रक्रिया का सबसे पहला बिंदू होता है, जिसमें मरीज को एनेस्थीसिया दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में एक घंटे से कम का समय लगता है।

  • स्टेप 5- पलकों को स्पिल स्पेकल्म से खोलना- मरीज को एनेस्थीसिया देने के बाद डॉक्टर पलकों को स्पिल स्पेकुलम की सहायता से खोलते हैं। उसके बाद आंखों की ऊपरी सतह (कंजंक्टिवा) के माध्यम से अंदरूनी मांसपेशियों तक पहुंचा जाता है।

  • स्टेप 6- आंखों की मांसपेशियों को बदलना- इसके बाद डॉक्टर मरीज की आंखों की मांसपेशियों के कुछ हिस्से को हटा देते हैं और उन्हें नई जगह पर लगा देते हैं, ताकि दोनों आंखों की दिशाएं एक समान हो सके।

  • स्टेप 7- आंखों की मांसपेशियों को सही जगह पर लगाना- मरीज की आंखों की मांसपेशियों को बदलने के बाद उन्हें गलने योग्य टांके लगाकर सही जगह पर लगाया जाता है। ये टांके आंखों में अपने आप घुल जाते हैं, अत: आप उन्हें देख नहीं पाते हैं।

  • स्टेप 8- आंखों पर पैड लगाना-  जब आंखों की मांसपेशियों को बदलकर उन्हें सही जगह पर लगाया जाता है, तो उसके बाद आंखों पर पैड लगा दिया जाता है ताकि मरीज को किसी प्रकार का दर्द महसूस न हो।

    आमतौर पर, इस पैड को सर्जरी के अगले दिन निकाल दिया जाता है, लेकिन कभी-कभी इस   पैड को मरीज के वापस घर जाने से पहले निकाला जाता है।

  • स्टेप 9- दर्द निवारक या आई ड्रॉप देना- भेंगापन सर्जरी  प्रक्रिया पूरी होने के बाद मरीज की आंखों में कई तरह की समस्याएं जैसे दर्द, जलन, आंखों का लाल होना इत्यादि हो सकती हैं, उन्हें कम करने के लिए उसे दर्द निवारक दवाई या आई ड्रॉप दी जाती हैं।

भेंगापन सर्जरी का खर्चा (Cost of Squint Eye Surgery in Hindi)

जब भी कोई भी मरीज अपनी आंखों की समस्या (मुख्य रूप से भेंगापन) के लिए सर्जरी कराने का निर्णय लेता है, तब उसके लिए भेंगापन सर्जरी के खर्चे का पता लगाना आवश्यक होता है।

भेंगापन सर्जरी का खर्चा मुख्य रूप से अस्पताल या क्लीनिक पर निर्भर करता है। अत: अगर आप भी इस सर्जरी को कराने की सोच रहे हैं तो आपको भी इसकी लागत की पूरी जानकारी ले लेनी चाहिए, क्योंकि यह आपकी आर्थिक स्थितियों पर प्रभाव डाल सकती है।

आमतौर पर, भेंगापन सर्जरी कराने में औसतन 20,000- 30,000 रूपये का खर्चा आता है। अगर आप भी इस सर्जरी को करवाना चाहते हैं, तो इंटरनेट पर दिल्ली- NCR के बेहतरीन अस्पतालों या क्लीनिकों का पता लगा सकते हैं।

भेंगापन सर्जरी के साइड इफेक्ट्स/जोखिम (Side-Effects of Squient Eye Surgery in Hindi)

 

हालांकि, भेंगापन सर्जरी  उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो काफी समय से भंगेपन की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद भेंगापन/ तिरछापन सर्जरी  के कुछ साइड इफेक्ट्स भी होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  • आंखों में दर्द होना-  भेंगापन/ तिरछापन सर्जरी  के बाद कुछ मरीजों को आंखों में दर्द होता है, इसके लिए डॉक्टर उन्हें दर्द निवारक दवाईयां जैसे पेरासिटामोल देते हैं, हालांकि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को एस्प्रिन नामक गोली दी जाती हैं।

  • आंखों का लाल होना- भेंगापन/तिरछापन सर्जरी  के कुछ महीनों तक आंखें लाल रह सकती हैं।

  • आंखों में खुजली होना-  सर्जरी के दौरान आंखों में लगाए गए टांकों के कारण आंखों में खुजली हो सकती है और यह तब तक हो रह सकती  है, जब तक वे टांके घुल नहीं जाते हैं।
    अत: ऐसी स्थिति में अपनी आंखों को न रगड़े।

  • दोहरी दृष्टि (डबल विजन)- भेंगापन सर्जरी का साइड इफेक्ट्स दोहरी दृष्टि या डबल विजन हो सकता है।

    दोहरी दृष्टि उस स्थिति को कहा जाता है, जब आपकी आंखें किसी एक वस्तु को अनेक रूप में देखती हैं। अन्य शब्दों में जब आप किसी वस्तु को देखते हैं, तो आपको वह वस्तु हिलती हुई नजर आती है, ऐसा दोहरी दृष्टि  के कारण होता है।

    आमतौर पर यह समस्या समय के साथ सही हो जाती है, लेकिन अगर यह काफी लंबे समय तक रहती है, तो इसे नज़रादाज नहीं करना चाहिए और इसके बारे में अतिशीघ्र अपने डॉक्टर को सूचित करना चाहिए।

  • आंखों में संक्रमण या रक्तस्राव होना- भेंगापन सर्जरी के बाद मरीज की आंखों में संक्रमण हो सकता है। इसके अलावा मरीज के आंखों से रक्तस्राव (खून निकलना) भी हो सकता है।

  • आंखों की मांसपेशियों का अपनी जगह से हट जाना- कभी-कभी इस सर्जरी के बाद आंखों की मांसपेशियां अपनी जगह से हट जाती हैं, ऐसी स्थिति में इस समस्या को ठीक करने के लिए मरीज को अन्य सर्जरी कराने की आवश्यकता पड़ सकती है।

  • भेंगेपन का फिर से होना- कभी-कभी भेंगापन/तिरछापन सर्जरी  के समाप्त होने के बाद भी मरीज को भेंगेपन की समस्या फिर से उत्पन्न हो जाती है।हालांकि, ऐसा काफी कम मामलों में होता है, लेकिन यदि ऐसा होता है, तब इसे ठीक करने के लिए इसे फिर से करानी की आवश्यकता पड़ सकता है।

भेंगापन सर्जरी के बाद की सावधानियां (Precautions of Squint Eye Surgery)

भेंगापन/तिरछापन सर्जरी के बाद मरीज को पूरी तरह से ठीक होने में थोड़ा समय लग सकता है, यह मरीज के लिए काफी संवेदनशील दौर होता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही करना नुकसानदायक हो सकता है।

अत: किसी भी तरह की समस्या से बचने के लिए मरीज को निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए-

  • शैंपों या साबुन का उपयोग न करना- भेंगापन सर्जरी  के बाद आंखों को किसी भी तरह की तकलीफ से बचाने के लिए  मरीज को डॉक्टर एक से दो सप्ताह तक किसी भी तरह के शैंपों या साबुन का उपयोग न करने की सलाह देते हैं।

  • कोई भी खेल न खेलना-  चूंकि, भेंगापन ऑपरेशन  के बाद आपकी आंखों की स्थिति काफी संवेदनशील होती है, ऐसे में मरीज को कुछ समय के लिए किसी भी खेल को नहीं खेलना चाहिए क्योंकि वह उसकी आंखों के लिए खतरनाक हो सकता है।

  • मेकअप न करना- अगर इस सर्जरी कोई महिला कराती है, तो डॉक्टर उसे कुछ समय (कम-से-कम एक महीने) तक किसी भी तरह का मेकअप न करने की सलाह देते हैं।

  • ड्राइविंग न करना- अगर किसी मरीज ने भेंगापन सर्जरी कराई है और उसे दोहरी दृष्टि की परेशानी है, तो उसे बिना डॉक्टर की सलाह के ड्राइविंग नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करना जानलेवा हो सकता है।

  • डॉक्टर से समय-समय पर मिलना-  भेंगापन सर्जरी  कराने के बाद भी मरीज को समय-समय पर डॉक्टर से मिलना चाहिए और अपनी आंखों की जांच करानी चाहिए। उसे डॉक्टर के द्वारा दिए गए सभी सुझावों और सलाहों का पालन करना चाहिए।

इन दिनों आंखों की कई बिमारियां जैसे कमजोर नजर, भेंगापन , दोहरी दृष्टि  इत्यादि बढ़ रहे हैं, जो मुख्य रूप से प्रदूषण, अंसुलित आहार, देर तक टी.वी या कंप्यूटर इत्यादि पर काम करने के कारण होती हैं।

हालांकि, इन्हें चश्मा, दवाईयों या फिर आंखों से संबंधित व्यायाम इत्यादि अन्य तरीकों से ठीक किया जा सकता है, लेकिन जब इनका इलाज समय रहते न किया जाए, तो स्थिति बद-से-बदतर हो सकती है और ऐसी परिस्थिति में इन सभी बीमारियों के लिए भेंगापन सर्जरी (Squint Eye in Hindi) ही एकमात्र विकल्प बचता है।

अगर आप भी आंखों की किसी बीमारी से पीड़ित हैं और इसका इलाज कराना चाहते हैं, परंतु किसी कारण से आर्थिक रूप से असमर्थ हैं, तो इसे कराने के लिए https://www.letsmd.com/ से 0% प्रतिशत की ब्याज दर पर मेडिकल लोन ले सकते हैं।

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