क्या है साइनस, कैसे करें इलाज? (Sinus in Hindi)

साइनस (Sinus) को ज्यादातर लोग एलर्जी के रूप में देखते हैं क्योंकि इसकी वजह से उन्हें धूल, मिट्ठी, धुंआ इत्यादि की वजह से सांस लेने में परेशानी होती है।

लेकिन, यह मात्र एलर्जी नहीं है बल्कि नाक की मुख्य बीमारी है, जो मुख्य रूप से नाक की हड्डी के बढ़ने या तिरछी होने की वजह से होती है।

 

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार भारत में नाक की यह समस्या काफी तेज़ी से फैल रही है और यह समस्या 8 में से 1 व्यक्ति में देखने को मिल रही है।

ये आंकडे साइनस की स्थिति को बयां करने के लिए काफी हैं, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश लोग इसके लक्षणों की पहचान नहीं कर पाते हैं और इसी कारण वे इससे परेशान रहते हैं।

 

क्या आप साइनस की पूर्ण जानकारी जानते हैं? नहीं, तो परेशान न हो क्योंकि आप इस लेख के माध्यम से यह जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

 

 

क्या है साइनस? (Sinus Meaning in Hindi)

 

 

साइनस नाक की समस्या है, जिसे साइनोसाइटिस (Sinusitis) या साइनस की समस्या के नामों से भी जाना जाता है।

यह बीमारी उस स्थिति में होती है, जब किसी व्यक्ति की नाक की हड्डी बढ़ जाती है और जिसकी वजह से उसे जुखाम रहता है।

 

कई बार यह बीमारी समय के साथ ठीक हो जाती है, लेकिन यदि काफी लंबे समय तक रह जाए तो उसके लिए नाक की सर्जरी ही एकमात्र विकल्प बचता है।

 

 

साइनस कितने कितने प्रकार का होता है? (Sinus Types in Hindi)

 

 

साइनस मुख्य रूप से 4 प्रकार होता है, जो निम्नलिखित है:
 

 

  1. एक्यूट साइनस- यह सामान्य साइनस है, जिसे इंफेक्शन साइनस के नाम से भी जाना जाता है।

    एक्यूट साइनस (Acute sinus) मुख्य रूप से उस स्थिति में होता है, जो कोई व्यक्ति किसी तरह के वायरस या बैक्टीरिया के संपर्क में आ जाता है।


     

  2. क्रोनिक साइनस- इस तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जिसमें नाक के छेद्रों के आस-पास की कोशिकाएं सूज जाती हैं।

    क्रोनिक साइनस (Chronic sinus) होने पर नाक सूज जाता है और इसके साथ में व्यक्ति को दर्द भी होता है।


     

  3. डेविएटेड साइनस- जब साइनस नाक के एक हिस्से पर होता है, तो उसे डेविएटेड साइनस (Deviated sinus) के नाम से जाना जाता है।

    इसके होने पर नाक बंद हो जाता है और व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है।


     

  4. हे साइनस- हे साइनस (Hay sinus) को एलर्जी साइनस भी कहा जा सकता है।

    यह साइनस मुख्य रूप से उस व्यक्ति को होता है, जिसे धूल के कणों, पालतू जानवरों इत्यादि से एलर्जी होती है।

 

 

साइनस के लक्षण क्या हैं? (Sinus Symptoms in Hindi)

 

 

हालांकि, ज्यादातर लोग यह कहते हैं कि उन्हें इस बात का पता ही नहीं चला कि उन्हें साइनस कब हो गया।

लेकिन, ऐसा कहना सही नहीं है क्योंकि किसी भी अन्य समस्या की भांति इस नाक की बीमारी के भी कुछ लक्षण होते हैं, जो इसके होने का संकेत देते हैं।


 

अत: यदि किसी व्यक्ति को ये 5 लक्षण नज़र आएं, तो उसे इसकी सूचना डॉक्टर को तुंरत देनी चाहिए-


 

  1. सिरदर्द होना- यह साइनस का प्रमुख लक्षण है, जिसमें शख्स को सिरदर्द होता है और इसके लिए उसे सिरदर्द की दवाई लेनी पड़ती है।

     

  2. नाक में भारीपन महसूस होना- साइनस का अन्य लक्षण यह है कि इस स्थिति में नाक में भारीपन महसूस होता है।

    इस स्थिति में किसी के भी अपना काम करना मुश्किल हो जाता है।


     

  3. बुखार होना- अक्सर ऐसा भी देखा गया है कि साइनस होने पर कुछ लोगों को बुखार हो जाता है।

    हालांकि, इसका इलाज सामान्य दवाई के द्वारा संभव है फिर भी इसका डॉक्टर की सलाह सही कदम होता है।


     

  4. खांसी होना- साइनस होने पर कुछ लोगों को खांसी भी हो सकती है।

    यदि किसी व्यक्ति को यह होता है, तो उसे इसकी सूचना अपने डॉक्टर को देनी चाहिए।


     

  5. चेहरे पर सूजन का होना- यदि किसी व्यक्ति के चेहरे पर नाक के आस-पास के हिस्से पर सजून आ जाती है तो उसे इसकी जांच करानी चाहिए।

 


साइनस किन कारणों से होता है? (Sinus Causes in Hindi)

 

 

यह सवाल हर उस शख्स के लिए मायने रखता है, जो इस नाक की बीमारी से पीड़ित होता है।

वह हमेशा इस बात को जानने को उत्सुक रहता है कि आखिरकार उसे यह बीमारी किस वजह से हुई, ताकि वह इसका सही इलाज करा सके।

 

 

साइनस मुख्य रूप से निम्नलिखित कारणों से हो सकता है:

 

 

  • एलर्जी का होना- यह नाक की बीमारी मुख्य रूप से उस व्यक्ति को हो सकती है, जिसे किसी तरह की एलर्जी होती है।

    इसी कारण व्यक्ति को अपनी एलर्जी की जांच समय-समय पर कराती रहनी चाहिए।


     

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना- यदि किसी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) है, तो उसे साइनस की समस्या हो सकती है।

     

  • नाक की असामान्य संरचना का होना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि नाक की यह समस्या उस स्थिति में हो सकती है, जब किसी व्यक्ति की नाक की संरचना असामान्य होती है।

    अत: जब कोई व्यक्ति इस समस्या को लेकर किसी डॉक्टर के पास जाता है, तो उस स्थिति में डॉक्टर उसके नाक का एक्स-रे करते हैं ताकि उसकी नाक की संरचना का पता लगाया जा सके।


     

  • फैमली हिस्ट्री का होना- किसी भी अन्य समस्या की तरह साइनस भी फैमली हिस्ट्री की वजह से हो सकती है।

    अन्य शब्दों में, यदि किसी शख्स के परिवार में किसी अन्य व्यक्ति साइनस है, तो उसे यह नाक की बीमारी होने की संभावना अधिक रहती है।


     

  • माइग्रेन से पीड़ित होना- साइनस उस शख्स को भी हो सकती है, जो माइग्रेन (Migraine) से पीड़ित है।

    अत: माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति को इसका इलाज सही से कराना चाहिए।

 

 

साइनस का इलाज कैसे किया जा सकता है? (Sinus Treatments in Hindi)

 

 

संभवत: ज्यादातर लोग ऐसा सोचते हो कि यदि एक बार उन्हें यह नाक की बीमारी हो जाए तो फिर वे इससे निजात पा सकते हैं।

लेकिन उनका ऐसा सोचना पूरी तरह से गलत है क्योंकि किसी भी अन्य बीमारी की तरह साइनस का भी इलाज संभव है।


यदि कोई व्यक्ति इस नाक की बीमारी से पीड़ित है तो वह इन 5 तरीकों से इससे निजात पा सकता है-


 

  1. आयुर्वेदिक इलाज कराना- वर्तमान समय में किसी भी बीमारी के इलाज के लिए आयुर्वेदिक को बेहतर विकल्प माना जाता है क्योंकि इसकी सफलता दर काफी अधिक होती है।

    यह बात साइनस के इलाज में भी सही प्रतीत होती है क्योंकि इसका इस्तेमाल कई सारे लोगों द्वारा किया जा रहा है और इसके माध्यम से वे ठीक भी हो रहे हैं।


     

  2. एंटीबायोटिक दवाईयों का सेवन करना- इस नाक की बीमारी का इलाज एंटीबायोटिक दवाई के माध्यम से भी संभव है।

    ये दवाईयां शरीर में साइनस को बढ़ने से रोकती हैं और व्यक्ति को कुछ समय की राहत भी देती हैं।


     

  3. नेज़ल स्प्रे का इस्तेमाल करना- यदि साइनस से पीड़ित व्यक्ति नेज़ल स्प्रे का इस्तेमाल करता है तो इससे उसे थोड़ी राहत मिल सकती हैं।

    इस प्रकार नेज़ल स्प्रे नाक की बीमारी को ठीक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


     

  4. योगा करना- वर्तमान समय में योगा को किसी भी बीमारी के इलाज के सर्वोत्तम तरीके के रूप में देखा जाता है।

    इसी प्रकार साइनस का इलाज योगा के द्वारा संभव है इसके लिए कुछ योगासान जैसे कपालभाती, अनुलोम-विलोम, प्राणायाम इत्यादि को किया जा सकता है।


     

  5. सर्जरी कराना- जब साइनस का इलाज किसी अन्य तरीकों से संभव नहीं हो पाता है तो फिर डॉक्टर सर्जरी का सहारा लेते हैं।

    इस स्थिति में नाक की सर्जरी या साइनस सर्जरी को कराना लाभदायक साबित हो सकता है।

 

 

साइनस सर्जरी के बारे में जानने के लिए नीचे दी गई साइनस सर्जरी की वीडियो (Sinus Surgery Video) को देखें :

 

 

 

 

साइनस के इलाज का खर्चा कितना है? (Sinus Treatment Cost in Hindi)

 

 

जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि जब साइनस के इलाज के लिए सर्वोत्तम तरीका नाक की सर्जरी या साइनस सर्जरी है।

जब कोई डॉक्टर किसी व्यक्ति को सर्जरी कराने की सलाह देते हैं, तो उस स्थिति में उसके मन में सबसे पहला सवाल यह आता है कि साइनस सर्जरी की कीमत क्या है।

उसके लिए यह सवाल इसलिए मायने रखता है क्योंकि इसका असर उसकी आर्थिक स्थिरत पर पड़ता है।

 

हो सकता है कि साइनस से पीड़ित अधिकांश लोगों को साइनस सर्जरी महंगी प्रक्रिया लगे और इसी कारण वे इसका लाभ न उठा पाएं।

लेकिन, यदि उन्हें यह पता हो कि वे इसे मात्र 3 लाख से 7 लाख होती है तो शायद वे बेहतर ज़िदगी जी पातें।

 

यह भी देखें: नाक सर्जरी के सर्वेत्तम अस्पताल/क्लीनिक
 

 

साइनस के जोखिम क्या हो सकते हैं? (Sinus Complications in Hindi)

 

 

ऐसा माना जाता है कि किसी भी बीमारी को नज़रअदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करना किसी भी व्यक्ति के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

यह बात साइनस के संदर्भ में भी सटीक प्रतीत होती है, क्योेंकि यदि साइनस संक्रमण का इलाज सही समय पर न किया जाए, तो यह कई सारे जोखिमों का कारण बन सकता है।

 

 

साइनस के लाइलाज रहने पर निम्नलिखित जोखिम हो सकते हैं:

 

 

  • साइनस का मस्तिष्क में फैलना- इस नाक की बीमारी के लाइलाज रहने पर यह शरीर के अन्य अंग (विशेषकर मस्तिष्क) में फैल सकता है।

    हालांकि, ऐसी स्थिति में ब्रेन सर्जरी को कराना ही एकमात्र विकल्प बचता है।


     

  • आंखों में संक्रमण का होना- साइनस का इलाज समय पर न होने के कारण आंख में संक्रमण हो सकता है।

    ऐसी स्थिति में आंख के डॉक्टर की आवश्यकता पड़ती है।


     

  • मस्तिष्क का खराब होना- यदि इस नाक की समस्या से पीड़ित व्यक्ति इसका इलाज समय रहते नहीं कराता है, तो यह मस्तिष्क के खराब या ब्रेन फेलियर का कारण बन सकता है।

    अत: किसी भी व्यक्ति को इसे नज़रअदाज़ नहीं करना चाहिए और इसका इलाज सही समय पर कराना चाहिए।


     

  • अस्थमा की बीमारी का होना- कई बार ऐसा भी देखा गया है कि यदि साइनस लंबे समय तक लाइलाज रह जाता है तो वह यह अस्थमा होने का कारण बन सकता है।

    इस स्थिति में व्यक्ति को अतिरिक्त इलाज की जरूरत पड़ सकती है।


     

  • मौत होना- कुछ लोगों की इस नाक की बीमारी की वजह से मौत हो जाती है।

    लेकिन यह राहत की बात है कि ऐसे लोगों की संख्या काफी कम है, फिर भी व्यक्ति को इस दौरान किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

 

 

साइनस की रोकथाम कैसे करें? (Sinus Precautions in Hindi)

 

 

इस नाक की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति यह जानना चाहता है कि वह किस तरह से साइनस संक्रमण की रोकथाम कर सकता है।

यदि उसे यह जानकारी मिल जाए तो वह इसके कई सारे जोखिमों को कम कर सकता है और इसके साथ में वह इसकी सहायता से जल्दी ठीक हो सकता है।


 

खैर, साइनस से पीड़ित व्यक्ति के लिए इन 5 सावधानियों को बरतना लाभदायक साबित हो सकता है-


 

  1. ध्रूमपान न करना- आप यह जानते होंगे कि ध्रूमपान के सेवन को सही नहीं माना जाता है क्योंकि इससे कई सारी बीमारियां हो सकती हैं।

    अत: किसी भी व्यक्ति को ध्रूमपान नहीं करना चाहिए ताकि वह सेहतमंद ज़िदगी बीता सके।


     

  2. छींकते या खांसते समय टिशू पेपर या रूमाल का उपयोग करना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि साइनस की समस्या वाइरस या बैक्टीरियां के कारण भी होती है।

    इसी कारण सभी लोगों को इस बात का ख्याल रखना चाहिए वे छींकते या खांसते समय किसी टिशू पेपर या रूमाल का इस्तेमाल करें ताकि किसी दूसरे व्यक्ति को किसी तरह के वायरस या बैक्टीरिया न फैलें।


     

  3. नाक को साफ रखना- चूंकि, साइनस नाक की बीमारी है, इसी कारण सभी लोगों को अपने नाक का विशेष ध्यान रखना चाहिए और उसे नाक को साफ रखना चाहिए।

     

  4. स्ट्रॉ का इस्तेमाल न करना- यदि कोई व्यक्ति कॉल ड्रींग या जूस पिता है, तो उसे स्ट्रॉ का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि उसका असर उसके नाक या मस्तिष्क पर न पड़े।

    यह कार्य साइनस की संभावना को काफी कम कर सकता है।


     

  5. डॉक्टर के संपर्क में रहना- अंत में जिस बात का सभी लोगों को ध्यान रखना चाहिए वह यह है कि यदि उसे नाक संबंधी किसी तरह की परेशानी हो तो वह तुंरत डॉक्टर से मिले और उसका इलाज कराए।

    इसके साथ में यदि कोई व्यक्ति साइनस का इलाज करा रहा है तो उसे तब तक डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए जब तक वह उसे पूरी तरह से स्वस्थ घोषित न कर दे।

 

 


जैसा कि हम सभी यह जानते हैं कि आज कल बहुत सारी समस्याएं फैल रही हैं। जिसे लेकर ज्यादा गंभीर नहीं होते हैं।

यदि साइनस (sinus) की बात की जाए तो अलग-अलग लोग इसे अलग-अलग रूप में देखते हैं। उदाहरण के लिए कुछ लोग इसे सिरदर्द समझ लेते हैं तो वहीं कुछ लोग इसे गले में इंफेक्शन मानते हैं।

उनके इसी दृष्टिकोण के कारणवश वे इसका सही इलाज नहीं करा पाते हैं।

अत: समझदारी यही है कि लोगों को साइनस की सही जानकारी दी जाए, ताकि वे इससे निजात पा सकें।

 

इस प्रकार हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित हुआ होगा क्योंकि हमने इसमें साइनस की समस्या (sinus Problem) की पूर्ण जानकारी देने की कोशिश की है।

 

यदि  आप या आपकी जान-पहचान में कोई व्यक्ति नाक संबंधी किसी समस्या और उसके उपचार के संभावित तरीकों की अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहता है तो वह इसके लिए 95558-12112 पर Call करके उसकी मुफ्त सलाह प्राप्त कर सकता है।