रिएक्टिव गठिया: लक्षण, कारण, इलाज इत्यादि (Reactive arthritis in Hindi)

What is reactive arthritis?

रिएक्टिव गठिया के मरीजों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। ज्यादार लोग इसे जोड़ों के दर्द समझते हैं और इसी कारण यह बीमारी समय के साथ गंभीर रूप ले लेती है। ऐसा मुख्य रूप से रिएक्टिव गठिया की अधूरी जानकारी होने की वजह से होता है। अगर आप भी इस बीमारी की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आपको इस लेख को जरूर पढ़ना चाहिए।

क्या है रिएक्टिव गठिया? (what is reactive arthritis? in Hindi)

जब किसी व्यक्ति के जोड़ों में दर्द के साथ सूजन हो जाती है और यह शरीर के अन्य अंगों में फैल जाता है, तो उसे रिएक्टिव गठिया कहा जाता है।
रिएक्टिव गठिया मुख्य रूप से घुटनों, एडी और पैरों के जोड़ों पर होता है और इससे होने वाली सूजन आंखों, त्वचा एवं मूत्रमार्ग (urethra) इत्यादि पर पड़ सकता है।

रिएक्टिव गठिया के लक्षण क्या हैं? (Reactive arthritis symptoms in Hindi)

हर बीमारी के अपने कुछ लक्षण होते हैं, तो उसकी शुरूआत के संकेत देते हैं।
यदि रिएक्टिव गठिया की बात करें, तो इसके मुख्य रूप से ये 5 लक्षण हो सकते हैं, जिन्हें किसी भी व्यक्ति को नज़रअदाज़ नहीं करना चाहिए-

  1. दर्द या अकड़न का होना- यह रिएक्टिव गठिया का प्रमुख लक्षण है, जिसमें व्यक्ति को पैरों, घुटनों इत्यादि में दर्द होता है।
    इसके साथ में कुछ लोगों को पैरों में अकड़न भी हो जाती है, जिसकी वजह से लोगों को चलने में परेशानी आती है। 
  2. आंखों की सूजन- अक्सर, ऐसा भी होता है कि रिएक्टिव गठिया की वजह से लोगों की आंखों में सूजन हो जाती है।
    अत: यदि किसी व्यक्ति की आंखों में सूजन होती है, तो उसे इसे नज़रअदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि यह रिएक्टिव गठिया का लक्षण हो सकता है।
  3. कमर के निचले भाग में दर्द होना- कई बार, कमर के निचले भाग में दर्द होना भी रिएक्टिव गठिया का लक्षण हो सकता है।
  4. पेशाब संबंधी समस्याओं का होना- यदि किसी व्यक्ति को यूरिन इंफेक्शन जैसा इंफेक्शन है, तो उसमें रिएक्टिव गठिया होने की संभावना काफी अधिक रहती है।
    इसी कारण, ऐसे व्यक्ति को अपनी हेल्थ का विशेष ध्यान रखना चाहिए और हेल्थ संबंधी समस्या की सूचना अपने डॉक्टर को देनी चाहिए।
  5. कमजोरी महसूस होना- रिएक्टिव गठिया का अन्य कमजोरी महसूस होना भी है। 
    ऐसी कमजोरी शरीर के कुछ विशेष अंगों जैसे हाथ,पैरों, कलाई इत्यादि की हड्डियों में होती है, जिसकी वजह से लोगों को इनका इस्तेमाल करने में परेशानी होती है।

रिएक्टिव गठिया के कारण क्या हैं? (Causes of reactive arthritis in Hindi)

रिएक्टिव गठिया काफी सारे कारणों से होता है, जिनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

  • मूत्रमार्ग संक्रमण का साइड-इफेक्ट्स होना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि रिएक्टिव गठिया का लक्षण यूरिन इंफेक्शन का होना है।
    ऐसे में इस समस्या के बढ़ने से रिएक्टिव गठिया हो सकता है।
  • यौनिक गतिविधियों के इंफेक्शन का होना- ऐसी बहुत सारी बीमारी हैं, जो यौनिक गतिविधियों (सेक्स) के इंफेक्शन के कारण होती हैं, इनमें रिएक्टिव गठिया भी शामिल है।
    इसी कारण, सेक्स के दौरान इस बीमारी के होने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है।
  • कैल्शियम की कमी का होना- रिएक्टिव गठिया का सीधा संबंध मानवशरीर की हड्डियों से हैं।
    ऐसे में रिएक्टिव गठिया होने की संभावना उस व्यक्ति में अधिक रहती है, जिसकी शरीर की हड्डियां कमजोरी होती है या फिर कैल्शियम की कमी होती है। 
  • जेनेटिक प्रॉब्लम का होना- अक्सर, रिएक्टिव गठिया उन लोगों को भी हो सकती है, जिनमें रिएक्टिव गठिया जेनेटिक प्रॉब्लम हो।
    ऐसे लोगों को समय-समय पर हेल्थचेकअप कराना चाहिए ताकि इसकी संभावना का पता लग सके।  
  • पेट का खराब रहना- रिएक्टिव गठिया का अन्य कारण पेट का खराब होना भी है।

रिएक्टिव गठिया का इलाज कैसे किया जा सकता है? (Reactive arthritis treatments in Hindi)

हालांकि, रिएक्टिव गठिया की वजह से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन, इसके बावजूद राहत की बात यह है कि किसी भी अन्य बीमारी की तरह रिएक्टिव गठिया का भी इलाज संभव है, जिसे इन 5 तरीकों से किया जा सकता है-

  1. ब्लड टेस्ट कराना- रिएक्टिव गठिया का इलाज कराने का सबसे आसान तरीका ब्लड टेस्ट करना है।
    इस टेस्ट से इस बात का पता लगाया जाता है कि किसी व्यक्ति के शरीर में रिएक्टिव गठिया किस हद तक फैल चुका है।
  2. एंटीबायोटिक दवाईयां खाना- रिएक्टिव गठिया कई सारे इंफेक्शनों से भी होता है।
    इसी कारण, डॉक्टर अक्सर एंटीबायोटिक दवाईयां भी देते हैं ताकि रिएक्टिव गठिया को अन्य इंफेक्शनों से बचाया जा सकता है।
  3. आई ड्रॉप का इस्तेमाल करना- रिएक्टिव गठिया का असर व्यक्ति की आंखों पर भी पड़ता है और इसकी वजह से वे सूज जाती हैं।
    अत: रिएक्टिव गठिया का इलाज आई ड्रॉप का इस्तेमाल करके भी संभव है। 
  4. थेरेपी लेना- रिएक्टिव गठिया के इलाज में फिजियोथेरेपी लेना बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
    यह थेरेपी शरीर की मांसपेशियों एवं हड्डियों को मजबूत करने में सहायक होती है।
  5. टोटल ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी- जब रिएक्टिव गठिया से पीड़ित व्यक्ति को किसी भी तरीके से आराम नहीं मिलता है, तो उसके लिए टोटल ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी ही एकमात्र विकल्प बचता है।
    इस सर्जरी में शरीर के खराब जोड़ को बदलकर उसकी जगह पर मेटल का जोड़ लगया जाता है।
Reactive arthritis in hindi
How to prevent reactive arthritis -in hindi

रिएक्टिव गठिया की सर्जरी के बाद किन बातों का ध्यान रखें? (Precautions of reactive arthritis in Hindi)

रिएक्टिव गठिया की सर्जरी के बाद समय काफी संवेदनशील होता है, जिसमें किसी भी तरह की लापरवाही बरतना इसे कराने वाले व्यक्ति के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
अत: यदि किसी व्यक्ति ने हाल ही में रिएक्टिव गठिया की सर्जरी या टोटल ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि वह जल्दी से ठीक हो सके-

  • वॉकर का इस्तेमाल करना- रिएक्टिव गठिया की सर्जरी कराने के बाद व्यक्ति को चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है।
    इस परेशानी को दूर करने के लिए उसे वॉकर का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि उसे चलने में तकलीफ न हो।
  • दर्द-निवारक दवाईयां खाना- किसी भी अन्य सर्जरी की तरह टोटल ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद भी सर्जरी की गई जगह पर दर्द होना स्वाभाविक चीज़ है।
    इस दर्द को कम करने के लिए रिएक्टिव गठिया की सर्जरी करा चुके व्यक्ति को दर्द-निवारक दवाईयों का सेवन करना चाहिए।
  • एक्सराइज़ करना- ऐसा माना जाता है कि एक्सराइज़ करना सभी लोगों के लिए फायदेमंद होता है।
    यह बात रिएक्टिव गठिया की सर्जरी करा चुके लोगों पर भी लागू होती है क्योंकि यह उसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को सुधारने में सहायक होती है।
  • पौष्टिक भोजन करना- टोटल ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी को करा चुके लोगों को अपने भोजन पर विशेष ध्यान रखना चाहिए।
    ऐसे लोगों बिना डॉक्टर की सलाह के कुछ भी नहीं खाना चाहिए क्योंकि यह उनकी सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
  • डॉक्टर के संपर्क में रहना- यह सबसे महत्व चीज़ है, जिसका पालन रिएक्टिव गठिया की सर्जरी की करा चुके लोगों को करनी चाहिए।
    इन्हें तब तक डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए जब तक वे उसे पूरी तरह से सेहतमंद घोषित न कर दें और इसके साथ में उन्हें समय-समय पर अपना हेल्थचेकअप कराना चाहिए ताकि व्यक्ति के स्वास्थ में होने वाले सुधार का पता लग सके।

आमतौर पर, ऐसा माना जाता है कि जोड़ों-दर्द से संबंधित उम्रदराज़ लोगों को ही होती है, लेकिन रिएक्टिव गठिया (reactive arthritis) से संबंध में यह बात सही साबित नहीं होती है।
ऐसे बहुत सारे मामले देखने को मिलते हैं, जिनमें यह बीमारी 40 या उससे अधिक लोगों में देखने को मिलती है।
ऐसे में यह समझना आसान है कि रिएक्टिव गठिया कितनी गंभीर समस्या है लेकिन फिर भी यह काफी दुर्भाग्य की बात है कि बहुत सारे लोग इसका शिकार बन जाते हैं।
इस प्रकार हमें उम्मीद है कि उन लोगों के लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित हुआ होगा जो रिएक्टिव गठिया से पीड़ित हैं।

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