क्या आप गर्भवती हैं? प्रेग्नेंसी से जुड़ी आवश्यक जानकारी।

Overview of Pregnancy

ऐसा माना जाता है कि कोई भी महिला तभी पूर्ण होती है, जब वह मां बनती है। हर महिला का यही सपना होता है कि उसे मां बनने का सुख प्राप्त हो। लेकिन जब किसी महिला के जीवन में यह क्षण आता है, तब वह गर्भावस्था (Pregnancy) को लेकर काफी चिंतित रहने लगती है।

किसी महिला का प्रेग्नेंसी को लेकर चिंता करना स्वाभाविक है, लेकिन जब कुछ महिलाएं गर्भावस्था को लेकर कई सारे गलत धारणाएं पाल लेती हैं, तो यह उसके लिए घातक साबित होता है। यदि आप भी गर्भावस्था के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो  इस लेख को अवश्य पढ़ें।

गर्भवास्था क्या होती है? (What is Pregnancy?-Hindi)

गर्भावस्था से तात्पर्य उस अवस्था से है, जिसमें किसी महिला के शरीर में भ्रूण का विकास हो जाता है या फिर जब किसी महिला के मासिक धर्म आना बंद  हो जाते हैं तो उस स्थिति को गर्भावस्था या प्रेग्नेंसी कहा जाता है। अन्य शब्दों में जिस अवस्था में कोई महिला गर्भवती होती है, उसे गर्भावस्था कहा जाता है।

गर्भावस्था के लक्षण कौन-कौन से होते हैं? (Symptoms of Pregnancy-in Hindi)

गर्भावस्था के कई सारे लक्षण होते हैं, जिनमें से कुछ मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं-

  • मासिक धर्म (Periods) का न होना-  किसी महिला के मासिक धर्म का न होना  गर्भावस्था का सबसे पहला लक्षण होता है।

  • मूड स्विंग होना- जब कोई महिला गर्भवती होती है, तो उसे मूड स्विंग  की समस्या होती है।

  • जी मचलाना और उल्टी होना- यह गर्भावस्था  का सबसे आम लक्षण होता है, जिसमें किसी महिला का जी मचलाता है और इसके साथ में उसे उल्टी भी होती है।

  • गैस होना- कई महिलाओं में गर्भवती होने पर गैस की समस्या देखी जाती है। इसी प्रकार कुछ लोग इसे भी गर्भावस्था का लक्षण मानते हैं।

  • थकावट होना-  गर्भवती होने पर महिला को काफी थकावट रहती है।

  • कुछ खाने की इच्छा होना- जब कोई महिला गर्भवती होती है, तो उसे समय-समय पर कुछ खाने की इच्छा पनपती है।

  • पीठे के निचले हिस्से में दर्द होना- महिला की पीठ के निचले हिस्से पर दर्द होना भी गर्भावस्था का अन्य लक्षण होता है।

गर्भावस्था के दौरान कौन-कौन सी समस्याएं हो सकती हैं? (Problems during Pregnancy-in Hindi)

गर्भावस्था के दौरान कई सारी समस्याएं होती हैं, जिनके बारे में हर गर्भवती महिला को पता होना चाहिए।

आमतौर पर, गर्भावस्था में 7 प्रमुख समस्याएं होती हैं, जो इस प्रकार हैं-

  1. सिर दर्द होना- कुछ गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के पहले हफ्ते में  सिर दर्द की समस्या होती है।

  2. सूजन होना- गर्भावस्था के दूसरे हफ्ते में पेट के आस-पास के अंगों में सूजन हो सकती है।

  3. कब्ज होना- चूंकि, गर्वती महिला को बार-बार भोजन करने की इच्छा होती है, इसलिए उसे कई बार कब्ज की समस्या भी हो सकती है।

  4. ऐंठन होना- गर्भावस्था के कुछ हफ्तों में ऐंठन की समस्या भी हो सकती है।

  5. बेहोशी होना- चूंकि, गर्भावस्था के अंतिम हफ्तों में थकावट की समस्या होती है, इस कारण गर्भवती महिला को बेहोशी होनी की संभावना बढ़ सकती है।

  6. खुजली होना- गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं को खुजली की समस्या रहती है।

  7. उच्च रक्तचाप होना- गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप की समस्या भी हो सकती है।

गर्भावस्था में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? (Points to remember during Pregnancy-in Hindi)

हालांकि, गर्भावस्था में कुछ जोखिम हो सकते हैं, लेकिन यदि इन 9 महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखा जाए, तो इन जोखिमों से बचा जा सकता है-

  1. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना- गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए ताकि उसके शरीर में पानी की कमी न हो।

  2. नशीले पदार्थों जैसे धूम्रपान और शराब का सेवन न करना- गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह के नशीले पदार्थों जैसै धूम्रापन और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह उसके और उसके होने वाले शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

  3. कम कैफीन वाले पेय पदार्थ का सेवन करना- किसी भी गर्भवती महिला के लिए अधिक मात्रा में कैफीन ग्रहण करना नुकसानदायक साबित हो सकता है, इसलिए उसे कम कैफीन वाले पेय पदार्थ का ही सेवन करना चाहिए।

  4. व्यायाम करना- गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करना गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे के लिए लाभदायक हो सकता है।

  5. संतुलित आहार करना- चूंकि, गर्भावस्था के दौरान महिला को पोषण की आवश्यकता होती है, इसलिए उसे संतुलित आहार करना चाहिए।

  6. भरपूर नींद लेना- गर्भवती महिला के लिए भरपूर नींद लेना लाभदायक होता है।

  7. तेज़ गंध वाले सैंट से दूर रहना- डॉक्टर गर्भवती महिला को तेज़ गंध वाले सैंट से दूर रहने की सलाह देते हैं, क्योंकि यह उसके और उसके होने वाले शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

  8. फल और सब्जियोें का सेवन करना- गर्भवती महिला के लिए फल और सब्जियों का सेवन करना काफी फायदामंद होता है।

  9. योगा करना- गर्भावस्था के दौरान योगा करना गर्भवती महिला के लिए फायदामेंद होता है और इससे सेहतमंद बच्चे के होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

गर्भावस्था में किस तरह का भोजन करना चाहिए? (Diet in Pregnancy-in Hindi)

 गर्भावस्था में डाइट पूरी तरह से संतुलित होनी चाहिए, जिसमें अधिक मात्रा में प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट होने चाहिए:

  1. गर्भवती महिला के लिए सेहतमंद खाना पोषण से भरपूर होना चाहिए, जिसमें अधिक कैलोरी, आयरन, कैल्शियम और पत्ते हो। लेकिन, यदि गर्भावस्था के शुरूआती दौर में आपका वजन सही है, तो आपको अतिरिक्त कैलोरी की आवश्यकता नहीं है। पहले तिमाही के बाद, दूसरे तिमाही में 340 अतिरिक्त कैलोरी प्रति दिन और 450 अतिरिक्त कैलोरी प्रति दिन की आवश्यकता होती है

  2. अपने वजन बढ़ने की दर को बनाए रखें, जो पहले तिमाही में 1 से 2 किलोग्राम, दूसरे तिमाही और तीसरे तिमाही के दौरान 2 किलोग्राम प्रति माह होनी चाहिए। औसतन, सेहतमंद महिला के लिए लगभग 10 से 13 किलोग्राम के वजन की बढ़ोतरी को सामान्य माना जाता है। गर्भावस्था के दौरान वजन का बढ़ना आपके गर्भवती होने के बाद से आपके बीएमआई पर निर्भर करता है।

  3. गर्भावस्था के दौरान होने वाली कब्ज की समस्या से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पीना सामान्य सुझाव होता है। खट्टे फल शरीर को जलयुक्त (हाइड्रेटेड) रखते हैं और उसमें रक्त की मात्रा को बढ़ाने में भी सहायता करते हैं, जो गर्भावस्था के दौरान केवल 50 प्रतिशत ही विकसित होती है।

  4. गर्भावस्था के दौरान मूत्र संक्रमण (यूरिन इन्फेक्शन) / जलन और निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) से बचने के लिए पोषणायुक्त तल पदार्थ, इसमें दिन में आठ से दस गिलास पानी पीना भी शामिल है। गर्भावस्था के दौरान कई पोषणायुक्त तल पदार्थ जैसे नींबू पानी, छाछ और नारियल पानी को भी काफी फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इनमे कम कैलोरी होती है।

  5. अपने आसान प्रसव और प्रसूति के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें। वह महिला जो गर्भावस्था के दौरान क्रियाशील रहती है और नियमित रूप से व्यायाम करती है, उनमें आसान प्रसव और शिशु को सामान्य रूप से जन्म देने की अधिक संभावना होती है।

  6. गर्भावस्था, पेट अम्ल (स्टमक एसिड) के कार्य करने के तरीके को बदल देती है। अपच (सीने की जलन) से बचने के लिए दिन में 2 से 3 बार भारी खाना खाने के बजाय 5 से 6 बार हल्का खाना खाएं। खाने को थोड़ी-थोड़ी देर में खाने से आप तरोताज़ा महसूस करती हैं। असहज महसूस होने की स्थिति में आपके लिए अम्लतत्वनाशक (एंटासिड) सहायक हो सकते हैं, लेकिन सही सुझाव के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

  7. आयरन हीमोग्लोबिन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण तत्व है, जो गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ्य रहने के लिए आवश्यक होते हैं। इस दौरान खट्टे फलों और जूस के सेवन को बढ़ाना चाहिए क्योंकि इनमें विटामिन सी होता है, जो आयरन के अवशोषण में सहायता करते हैं। खट्टे फल बच्चों को सुबह होने वाली कमजोरी को दूर करने में सहायक हो सकते हैं।

  8. यदि आप पहले से ही अपनी आहार योजना बना लेती हैं, तो आपके लिए गर्भावस्था के दौरान काम करना आसान हो सकता है। जितना हो सके उतना घर का खाना ही खाएं और हमेशा अपने साथ घर के स्नैकों को रखें। खूब पानी पीएं और दिन में कुछ समय पैदल चलने की भी कोशिश करें।

जैसा कि हम सभी यह जानते हैं कि किसी भी महिला के लिए सबसे सुखद पल हो होता है, जब वह गर्भवती (Pregnancy) होती है। लेकिन दुर्भाग्यवश, कुछ महिलाए शादी के बाद सेक्स करने के बाद भी गर्भधारण नहीं कर पाती हैं।

ऐसी महिलाओं के लिए मेडिकल साइंस वरदान साबित होती है, जिसमें आईवीएफ प्रेग्रनेंसी का सहारा लेकर उन्हें संतान सुख दिया जाता है।

आईवीएफ प्रक्रिया की सफलता प्रेग्नेंसी टेस्ट पर निर्भर करती है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि महिला के मासिक धर्म रूक गए हैं और उसके शरीर में गर्भ ठहरने लगा है।

यदि आप या आपकी जान-पहचान में कोई महिला प्रेग्नेंसी के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहती है तो वह 08448398633 पर Call करके इसकी मुफ्त सलाह ले सकती है।

Comments
  • गर्भावस्था से जुडी इतनी सारी जानकारी देने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया। इस ब्लॉग के जरिये मैने कुछ ऐसी चीज़ें भी जानी जो पहले मुझे पता नहीं थी। कृपया करके ऐसी ही और जानकारी सबसे साथ शेयर करते रहिये।

    • आपके कंमेंट के लिए धन्यवाद। मुझे खुशी है कि आपको यह ब्लॉग उपयोगी लगा। मैं भविष्य में भी आपको ऐसी जानकारी देने की कोशिश करूंगा।

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