पैनक्रिएटिक कैंसर क्या है? पूर्ण जानकारी (Pancreatic cancer in hindi)

पैनक्रिएटिक कैंसर दिन-प्रतिदिन गंभीर समस्या बनती जा रही है, जो अधिकांश लोगों में देखने को मिलती है।
लोगों में इस बीमारी की जानकारी न होने के कारण वे इसका इलाज नहीं करा पाते हैं, जिसकी वजह से उन्हें कई बार अपनी जान भी गवानी पड़ती है।
इकोनोमिक्स टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 1000 लोग पैनक्रिएटिक कैंसर से पीड़ित हैं।
ये आंकड़े वाकई चिंताजनक हैं, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है, लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि लोगों में अभी भी इस बीमारी को लेकर गंभीरता नहीं आई है।
खैर, हमारा मकसद लोगों को दोष नहीं है बल्कि उन्हें इस बीमारी की अधिक-से-अधिक जानकारी देने की जरूरत है ताकि उनमें जागरूकता बढ़े।
इस प्रकार, यदि आप भी पैनक्रिएटिक कैंसर की अधिक जानकारी नहीं है, तो आपको इस लेख को ज़रूर पढ़ना चाहिए क्योंकि इसमें इस कैंसर की जानकारी दी है।

पैनक्रिएटिक कैंसर क्या है? (what is Pancreatic cancer? in hindi)

पैनक्रिएटिक कैंसर से तात्पर्य ऐसे कैंसर से है, जो मुख्य रूप से पैंक्रियाज में होता है।
पैंक्रियाज मुख्य रूप से एंजाइमा (enzymes) को रिलीज करता है, जो पाचन को करने में सहायता करते हैं।
इसके अलावा यह ऐसे हार्मोन भी बनाते हैं, जो ब्लड शुगर को बनाने का काम करते हैं।

पैनक्रिएटिक कैंसर के लक्षण क्या हैं? (Pancreatic cancer symptoms in hindi)

यदि किसी व्यक्ति को अपने शरीर में ये 5 लक्षण नज़र आए तो उसे तुरंत अपनी जांच करानी चाहिए क्योंकि ये पैंक्रिएटिक कैंसर के संकेत हो सकते हैं-

  • पेट दर्द का पीठ तक पहुँचना- पैनक्रिएटिक कैंसर का प्रमुख लक्षण पेट दर्द का होना है।
    इस स्थिति में, सामान्य पेट दर्द की बजाय अलग तरीके का दर्द होता है, जो पीठ तक पहुँच जाता है।
  • भूख में कमी होना- पैनक्रिएटिक कैंसर का अन्य लक्षण भूख में कमी होना है।
    आमतौर पर, लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं, जिसकी वजह से वे यह समझ नहीं पाते हैं कि यह कैंसर का संकेत भी हो सकता है।
  • वजन का तेज़ी से कम होना- यदि किसी व्यक्ति का वजन काफी तेज़ी से कम होने लगता है, तो उसे इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि यह प्रैंकियाज कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।
  • त्वचा का पीला पड़ना- पैंनक्रिएटिक कैंसर होने की संभावना उस स्थिति में भी रहती है, जब किसी शख्स की त्वचा का रंग पीला पड़ जाता है।
    हालांकि, लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं, लेकिन उनका ऐसा रवैया उन्हें इस कैंसर का शिकार बना सकता है।
  • आँखों का सफेद होना- किसी भी शख्स को आँखों के रंग का सफेद होने को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि यह पैंनक्रिएटिक कैंसर का लक्षण हो सकता है।
    ऐसी स्थिति में उसे तुरंत अपनी सेहत की जांच करानी चाहिए ताकि इस कैंसर की पुष्टि हो सके।

पैनक्रिएटिक कैंसर के कारण क्या हैं? (causes of pancreatic cancer in hindi)

पैनक्रिएटिक कैंसर के किसी सटीक कारण का पता लगाना काफी मुश्किल होता है क्योंकि यह बीमारी काफी सारे कारणों से हो सकती है।
इसके बावजूद, पैनक्रिएटिक कैंसर पर किए गए अध्ययनों से स्पष्ट है कि प्रैंकियाज कैंसर निम्नलिखित कारणों से हो सकता है-

  • धूम्रपान करना- पैनक्रिएटिक कैंसर होने का प्रमुख कारण धूम्रपान करना है।
    ऐसे लोगों को तुरंत इसे छोड़ने की कोशिश करनी चाहिए ताकि उसे इस कैंसर की संभावना से छुटकारा मिल सके।
  • डायबिटीज से पीड़ित होना- पैनक्रिएटिक कैंसर के मामले मुख्य रूप से डायबिटीज से पीड़ित लोगों में अधिक देखने को मिलते हैं।
    ऐसे लोगों को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए और डायबिटीज का पूरी इलाज कराना चाहिए।
  • क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस का होना- प्रैंकियाज में सूजन होने को मेडिकल भाषा में क्रोनिक प्रैंक्रियाटाइटिस (chronic pancreatitis) कहा जाता है।
    इससे पीड़ित लोगों में पैनक्रिएटिक कैंसर होने की संभावना अधिक रहती है।
  • उम्रदराज़ होना- आमतौर पर, पैंक्रियाज कैंसर उम्रदराज़ लोगों (60 या उससे अधिक) में देखने को मिलता है।
    इस प्रकार, पैंक्रियाज कैंसर का अन्य कारण उम्रदराज़ होना भी है।
  • जेनेटिक कारण होना- कई बार, पैंक्रियाज कैंसर ऐसे शख्स को भी हो सकता है, जिसके परिवार में अन्य सदस्य इससे पीड़ित हो।
    ऐसे शख्स को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए और स्वास्थ संबंधी किसी भी समस्या की सूचना डॉक्टर को देनी चाहिए।

पैनक्रिएटिक कैंसर की पहचान कैसे करें? (Pancreatic cancer diagnosis in hindi)

ऐसा माना जाता है कि यदि किसी बीमारी की पहचान समय रहते कर ली जाए तो उसका इलाज आसान बन जाता है।
यह बात पैनक्रिएटिक कैंसर पर लागू होती है, जिससे इससे पीड़ित लोगों को इससे छुटकारा आसानी से मिल जाता है।
अत: पैनक्रिएटिक कैंसर की पहचान मुख्य रूप से इन 5 तरीके से की जा सकती है-

  • सी.टी.स्कैन कराना- पैनक्रिएटिक कैंसर की पहचान करने का प्रमुख तरीका सी.टी.स्कैन करना है।
    सी.टी.स्कैन में व्यक्ति के शरीर को अच्छी तरह से स्कैन किया जाता है, ताकि कैंसर की मौजूदगी की पुष्टि की जा सके।
  • अल्ट्रासाउंड कराना- सी.टी.स्कैन के अलावा पैनक्रिएटिक कैंसर की पहचान अल्ट्रासाउंड के द्वारा भी किया जा सकता है।
    इस टेस्ट शरीर की अंदरूनी हिस्से की तस्वीर ली जाती है ताकि शरीर के अंदरुनी स्थिति की जांच की जा सके।
  • ब्लड टेस्ट कराना- अक्सर, डॉक्टर प्रैंकियाज कैंसर की पहचान करने के लिए ब्लड टेस्ट का भी सहारा लेते हैं।
    ब्लड टेस्ट करके इस बात का पता लगाया जाता है कि किसी व्यक्ति के ब्लड में कैंसर कोशिकाएं कितनी मात्रा में मौजूद हैं।
  • एम.आर.आई कराना- कई बार, प्रैंकियाज कैंसर की पुष्टि करने के लिए एम.आर.आई भी किया जाता है।
  • बायोप्सी कराना- बायोप्सी भी इस कैंसर का पता लगाने में अहम भूमिका निभाता है।
    इस टेस्ट में किसी व्यक्ति के शरीर में बीमारी की संभावना का पता लगाया जाता है ताकि उसके अनुसार इलाज शुरू किया जा सके।

पैनक्रिएटिक कैंसर का इलाज कैसे किया जा सकता है? (Treatments of pancreatic cancer in hindi)

जैसा कि किसी व्यक्ति के इस कैंसर से पीड़ित होने की पुष्टि हो जाती है, वैसे ही उसका इलाज शुरू करना चाहिए ताकि वह जल्दी से ठीक हो सके।
अत: पैनक्रिएटिक कैंसर का इलाज निम्नलिखित तरीके से किया जा सकता है-

  • रेडियो थेरेपी कराना- पैनक्रिएकिट कैंसर का इलाज करने का सबसे आसान तरीका रेडियो थेरेपी कराना है।
    इसे रेडिएशन थेरेपी भी कहा जाता है, जिसमें बिम का इस्तेमाल करके कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।
  • कीमोथेरेपी कराना- पैंक्रियाज कैंसर का इलाज कीमोथेरेपी के द्वारा भी संभव है।
    इसमें कैंसर से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में दवाई डाली जाती है ताकि इस कैंसर को शरीर के अन्य अंगों तक फैलने से रोका जा सके।
  • विप्पल प्रोसिजर- पैनक्रिएटिक कैंसर का इलाज विप्पल प्रोसिजर (Whipple procedure) से भी किया जा सकता है।
    इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से प्रैंकियाज के ऊपरी हिस्से को निकाला जाता है।
  • पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट सर्जरी- जब प्रैंकियाज कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को किसी भी तरीके से आराम नहीं मिलता है, तो डॉक्टर उसे पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट सर्जरी कराने की सलाह देते हैं।
    इस सर्जरी में खराब प्रैंकियाज को हटाकर उसकी जगह पर डोनर प्रैंकियाज को लगाया जाता है।

पैनक्रिएटिक कैंसर के जोखिम क्या हो सकते हैं? (pancreatic cancer complications in hindi)

हालांकि, इस कैंसर का इलाज संभव है, लेकिन कुछ लोग इसे समय रहते नहीं कराते हैं क्योंकि वे इसे लाइलाज बीमारी समझते हैं।
ऐसा मुख्य रूप से पैनक्रिएटिक कैंसर की जानकारी न होने के कारण होता है, जिसकी वजह से उन्हें इन 5 जोखिमों का सामना करना पड़ता है-

  • कमज़ोरी महसूस होना- पैनक्रिएटिक कैंसर का प्रमुख जोखिम कमज़ोरी महसूस होना है।
    जब यह कैंसर काफी ज्यादा बढ़ जाता है, तो इसका असर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता पर पड़ता है, जिसकी वजह से उसे काफी कमज़ोरी महसूस होती है।
  • रक्तस्राव होना- इस कैंसर का लंबे समय तक लाइलाज रहने पर व्यक्ति के पैंक्रियाज में ब्लीडिंग हो सकती है।
    इसमें लोगों को दर्द महसूस हो सकता है, जिसे दूर करने के लिए मेडिकल सहायता लेना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
  • खून की कमी होना- यदि पैंक्रियाज कैंसर का इलाज न किया जाए तो यह शरीर में खून की कमी का कारण बन सकता है, जिसे मेडिकल साइंस की भाषा में एनीमिया (anemia) कहा जाता है।
    हालांकि, इसका इलाज संभव है, लेकिन इसमें किसी तरह की लापरवाही करना खतरनाक साबित हो सकता है।
  • लीवर का खराब होना- अक्सर, पैनक्रिएटिक कैंसर से मरीज़ लीवर की समस्या की शिकायत करते हैं।
    इस समस्या आगे चलकर लीवर के खराब (liver failure) का कारण बन सकती है।
  • मौत होना- हर साल लाखों लोगों को पैनक्रिएटिक कैंसर की वजह से अपनी जान गवानी पड़ती है।
    इस प्रकार, इस कैंसर का एक जोखिम मौत होना भी है।

पैनक्रिएटिक कैंसर की रोकथाम कैसे करें? (how to prevent pancreatic cancer? in hindi)

हालांकि, पैनक्रिएटिक कैंसर की वजह से लोगों को काफी सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इसके बावजूद, राहत की बात यह है कि किसी भी अन्य बीमारी की तरह पैनक्रिएटिक कैंसर की भी रोकथाम संभव है।
अत: यदि कोई व्यक्ति निम्नलिखित बातों का पालन करे तो वह इस कैंसर की रोकथाम आसानी से कर सकता है-

  • धूम्रपान न करना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट है पैनक्रिएटिक कैंसर धूम्रपान करने से होता है।
    इस प्रकार, इसकी रोकथाम में धूम्रपान न करना सहायक साबित हो सकता है।
  • वजन को नियंत्रित रखना- चूंकि, प्रैंकियाज कैंसर होने की संभावना अधिक वजन वाले लोगों में अधिक रहती है।
    इसी कारण, ऐसे लोगों को अपने वजन को नियंत्रित करने की कोशिश करनी चाहिए ताकि उन्हें इस कैंसर समेत कोई गंभीर बीमारी न हो।
  • पौष्टिक भोजन करना- हमारे खान-पान का हमारी सेहत पर काफी असर पड़ता है।
    यह बात पैनक्रिएटिक कैंसर पर भी लागू होती है, इसलिए लोगों को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए और केवल पौष्टिक भोजन ही करना चाहिए ताकि उन्हें यह कैंसर न हो।
  • शराब का सेवन न करना- किसी भी व्यक्ति के लिए जितना नुकसानदायक धूम्रपान करना होता है उतना ही नुकसानदायक शराब का सेवन करना भी होता है।
    इसी कारण, किसी भी व्यक्ति को शराब का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करना उन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचा सकता है।
  • समय-समय पर हेल्थचेकअप कराना- सभी लोगों को जिस बात का पालन करना चाहिए वह है समय-समय पर हेल्थचेकअप कराना।
    ऐसा करने से उनके बीमार होने की शंका को दूर करने में सहायक साबित होता है।

निश्चित रूप से, इन दिनों कैंसर के मरीज़ों की संख्या काफी अधिक बढ़ती जा रही है।
इनमें पैनक्रिएटिक कैंसर भी शामिल है, जिसको लेकर लोगों में जानकारी की कमी देखने को मिलती है।
इसी कारण, इससे पीड़ित लोग खुलकर इस पर बात नहीं कर पाते हैं, जिसकी वजह से उनकी ज़िदगी खतरे पर पड़ जाती है।
हम सभी लोगों को इस रवैया को बदलना चाहिए और जितना हो सके लोगों को पैनक्रिएटिक कैंसर की जानकारी देनी चाहिए ताकि वे इसका इलाज सही तरीके से करा सकें।
इस प्रकार हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित हुआ होगा और इस लेख में दी गई जानकारी पैनक्रिएटिक कैंसर से पीड़ित लोगों को इससे छुटकारा दिलाने में  प्रोत्साहित करेगी।

सबसे अधिक पूछे जाने वाले सवाल (FAQ’S)

Q1. पैनक्रिएटिक कैंसर के शुरूआती संकेत क्या हैं?
Ans- पैनक्रिएटिक कैंसर के शुरूआती संकेतों में पेट या पीट दर्द होना, जी मचलाना या उल्टी होना, ब्लड क्लोट्स होना इत्यादि शामिल हैं।

Q2. पैनक्रिएटिक कैंसर से पीड़ित व्यक्ति कितने समय तक जीवित रह सकता है?
Ans- पैनक्रिएटिक कैंसर से पीड़ित व्यक्ति केवल 3.5 साल तक ही जीवित रह सकता है।
ऐसा मुख्य रूप से तब होता है, जब इस कैंसर का इलाज लंबे समय तक न हो।

Q3. पैनक्रिएटिक कैंसर का प्रमुख कारण क्या है?
Ans- हालांकि, पैनक्रिएटिक कैंसर काफी कारणों से हो सकता है।
लेकिन, इनमें सबसे प्रमुख पैंक्रियाज में कोशिकाओं का असामान्य तरीके से विकास होना है।

Q4. क्या कोई व्यक्ति बिना प्रैंकियाज के जीवित रह सकता है?
Ans- कोई भी व्यक्ति पैंक्रियाज के बिना जीवित रह सकता है, जब उसका पूरा पैंक्रियाज निकाल दिया जाता है, तो उसके शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है।

Q5. क्या पैनक्रिएटिक कैंसर के लिए कैमीथेरेपी कराना काफी है?
Ans- हालांकि, डॉक्टर पैनक्रिएटिक कैंसर के लिए कैमीथेरेपी करते हैं।
कीमोथेरेपी की सहायता से कैंसर को फैलने से रोकने में सहायता मिलती है, जिससे व्यक्ति का इलाज आसान बन जाता है।

Q6. क्या पैनक्रिएटिक कैंसर के पहले चरण का इलाज संभव है?
Ans- पैनक्रिएटिक कैंसर के पहले चरण का इलाज संभव है।
इस स्थिति में सर्जरी करना सहायक साबित होता है, जिससे इससे पीड़ित लोगों को आराम मिल जाता है।

Q7. पैनक्रिएटिक कैंसर से पीड़ित लोगों को किस तरह का भोजन नहीं करना चाहिए?
Ans- पैनक्रिएटिक कैंसर से पीड़ित लोगों को अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
उन्हें दूध, दही जैसे अधिक फैट वाले भोजन, फास्ट फूड, कच्चा माँस इत्यादि का भोजन नहीं करना चाहिए क्योंकि इस तरह का भोजन उनकी सेहत को अधिक खराब कर सकता है। 

 

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