क्या है पेसमेकर? पूर्ण जानकारी (Pacemaker in Hindi)

पेसमेकर (Pacemaker) हृदय रोगियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होता है, क्योंकि इसके माध्यम से उनके दिल की धड़कनों को नियमित किया जाता है।

आज के दौर में हृदय संबंधी बहुत सारी बीमारियां फैल रही हैं, उनमें दिल की धड़कनों का अनियमति रूप से चलना भी शामिल है। इसे मेडिकल भाषा में एरिथिमिया के नाम से जाना जाता है।

सर्कुलेशन जर्नल (Circulation Journal) की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 1000 लोगों पर 272 लोग एरिथीमिया से पीड़ित हैं और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इनमें से अधिकांश लोगों की मौत केवल इस वजह से हो जाती है क्योंकि इसके सटीक इलाज की जानकारी नहीं होती है।

यदि उन्हें पेसमेकर की जानकारी होती, तो शायद यह आकंड़े काफी कम होते। तो आइए, इस लेख के माध्यम से पेसमेकर से संबंधित आवश्यक जानकारी प्राप्त करने की कोशिश करते हैं, ताकि किसी और हृदय रोगी को अपनी जान से हाथ न धोना पड़े।

 

 

क्या है पेसमेकर? (Meaning of Pacemaker in Hindi)
 


पेसमेकर मुख्य रूप से एक मेडिकल उपकरण होता है, जिसका संचालन बैटरी के माध्यम से किया जाता है। इसे डॉक्टर दिल की धड़कनों को नियमति करने के लिए लगाते हैं।
 

इस उपकरण के दो भाग होते हैं। पहले भाग को पल्स जनरेटर कहा जाता है, जिसमें बैटरी और इलेक्ट्रॉनकि होता है, जो दिल की धड़कनों को नियंत्रित करता है।  

वहीं दूसरे भाग में तार होते हैं, जो दिल को इलेक्ट्रिकल सिंग्नल भेजता है।

पेसमेकर का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जाता है, जिनकी दिल की धड़कने या तो काफी धीमी चलता है अथवा काफी तेज़ चलती हैं।

 

 

पेसमेकर कितने प्रकार का होता है? (Pacemaker Types in Hindi)
 

 

पेसमेकर मुख्य रूप से 3 प्रकार के होते हैं, जो निम्नलिखित हैं-

 

 

  1. सिंगल पेसमेकर- यह इसका सामान्य प्रकार है, जिसमें दिल के एक चैंबर को प्लस जनरेटर से जोड़ा जाता है।

    सिंगल पेसमेकर का उपयोग अधिकांश लोगों पर किया जाता है।


     

  2. ड्यूल पेसमेकर- यह पेसमेकर का अन्य प्रकार है, जिसमें इलेक्ट्रिक उपकरण को दिल की दाईं ओर मौजूद दोनों चैंबरों, दाईं अलिंद (atrium) और दाईं वेंट्रिक्ल से जोड़ा जाता है।

    डॉक्टर दोनों चैंबरों के संकुचन की गति को रेगुलेट करने के लिए ड्यूल-चेंबर पेसमेकर का उपयोग करते हैं।


     

  3. बिवेन्ट्रिक्युलर पेसमेकर- इस पेसमेकर को कार्डिक र्सिंक्रोनिज़ेशन थेरेपी (सी.आर.टी) के नाम से भी जाना जाता है।

    इस उपकरण में तीन लीड होती हैं, जो दाईं एट्रिम और दोनों वेंट्रिक्लों से जुड़ी होती हैं।

    इस उपकरण का इस्तेमाल मुख्य रूप से उन लोगों का इलाज करने के लिए किया जाता है, जिनमें दिल के खराब होने की संभावना अधिक रहती है।

 

 

आप इस वीडियों को देखकर पेसमेकर के प्रकार (Pacemaker Video) के बारे में विस्तार से सकते हैं :

 

 

 

पेसमेकर क्यों लगाया जाता है? (Indications of Pacemaker in Hindi)

 

 

पेसमेकर लगाने की सलाह  डॉक्टर केवल उन्हीं लोगों को देते हैं, जो निम्नलिखित समस्याओं से पीड़ित होते हैं-

 

 

  1. दिल की धड़कनों का काफी कम चलना- पेसमेकर को लगाने की सलाह डॉक्टर उन लोगों को देते हैं, जिनके दिल की धड़कनें का काफी कम गति से चलती है।

    इस बीमारी को मेडिकल भाषा में ब्रेडीकार्डिया (bradycardia) के नाम से जाना जाता है।


     

  2. दिल की धड़कनों का काफी तेज़ चलना- जो लोग टेककार्डिया नामक बीमारी से पीड़ित होते हैं, उनका इलाज भी इस सर्जरी के माध्यम से किया जाता है।

     

  3. सांस लेने में तकलीफ का होना- कई बार पेसमेकर को उस स्थिति में भी लगाया जाता है, जब किसी व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है।

    इस स्थिति में इस कार्य को करना काफी उपयोगी साबित हो सकती है।


     

  4. दिल के खराब होने का इलाज करना- जब किसी व्यक्ति के दिल के खराब होने की संभावना बढ़ जाती है, तब पेसमेकर का उपयोग करना बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

     

  5. दिल का दौरा पड़ने के खतरे को कम करना- कई बार पेसमेकर को दिल के दौरे के खतरे को कम करने के लिए भी किया जाता है।

    इस उपकरण के द्वारा दिल को कुछ समय के लिए क्रियाशील रखा जाता है, जिससे कि दिल कुछ समय तक के लिए कार्य कर पाता है।

 


पेसमेकर सर्जरी को कैसे किया लगाया जाता है? (Pacemaker Surgery Procedure in Hindi)

 

 

पेसमेकर को लगाने में केवल 1 से 2 घंटों का समय लगता है। इस पूरी प्रक्रिया को एनेस्थीसिया के बिना किया जाता है, जिसका अर्थ है कि इस दौरान व्यक्ति सचेत अवस्था में रहता है और सभी तरह के हर एक स्टेप से अवगत रहता है।


वास्तव में इस प्रक्रिया को कुछ स्टेपों में पूरा किया जाता है, जो इस प्रकार हैं-


 

  • स्टेप 1: कंधे के पास कट को लगाना- इस सर्जरी की शुरूआत कंधे के पास कट को लगाने के साथ होती है।

    डॉक्टर इस कट को इसलिए बनाते हैं, ताकि वे इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से कर सकें।


     

  • स्टेप 2: कट में तार को डालना- कंधे के पास कट को बनाने के बाद डॉक्टर विशेष तारों को उसमें डालते हैं।

     

  • स्टेप 3: इलेक्ट्रोड को वेंट्रिक्ल में लगाना- इस तार के एक छोर को दिल की वेंट्रिक्ल तक लगाया जाता है।

     

  • स्टेप 4: तार के दूसरे छोर को प्लस जनरेटर से जोड़ना- तार के एक छोर को वेंट्रिक्ल तक लगाने के साथ-साथ इसके दूसरे छोर को प्लस जनरेटर से जोड़ा जाता है।

    यह जनरेटर दिल की धड़कनों को सामान्य रूप से चलने में सहायता करता है।


     

  • स्टेप 5: कट को बंद करना- दिल की वेंट्रिक्ल और प्लस जनरेटर को लगाने के बाद डॉक्टर कंधे के पास बनाए गए कट को बंद कर देते हैं।

    इस कट को बंद करने के लिए डॉक्टर मेडिकल उपकरणों का उपयोग करते हैं।


     

  • स्टेप 6: सुधार कक्ष में ले जाना- कंधे पर बनाए गए कट को बंद करने के साथ ही यह प्रक्रिया समाप्त हो जाती है।

    इसके साथ डॉक्टर उस व्यक्ति को सुधार कक्ष (Recovery Room) में ले जाते हैं। यहां पर व्यक्ति के दिल की धड़कनों को मॉनिटर किया जाता है और इस बात को सुनिश्चित किया जाता है कि वह इस प्रक्रिया के बाद स्वस्थ है।


     

  • स्टेप 7: व्यक्ति को डिस्चार्ज करना- जैसे ही इस बात की पुष्टि हो जाती है कि व्यक्ति अब पूरी तरह से सेहतमंद है, तो डॉक्टर उसे घर जाने की इजाज़त दे देते हैं।  

 

 

पेसमेकर सर्जरी की कीमत क्या है? (Pacemaker Surgery Cost in Hindi)

 

 

यदि कोई व्यक्ति पेसमेकर सर्जरी को कराने की योजना बना रहा है, तो उसे इसे कराने से पहले इसकी कीमत की जानकारी आवश्यक प्राप्त कर लेनी चाहिए क्योंकि इसका सीधा असर उसकी आर्थिक स्थिरता पर पड़ता है।

संभवत: एक नज़र में यह एक महंगी प्रतीत हो, लेकिन यह एक किफायदी प्रक्रिया है, जिसे केवल मात्र 2.75 से 3 लाख के खर्च पर कराया जा सकता है।

यह भी देखें- पेसमेकर सर्जरी के सर्वोत्तम अस्पताल/क्लीनिक

 


पेसमेकर सर्जरी के लाभ क्या हैं? (Pacemaker Surgery Benefits in Hindi)

 

 

पेसमेकर सर्जरी एक लाभदायक प्रक्रिया है,जिसमें कई सारे लाभ होते हैं, उनमें से प्रमुख 5 लाभ निम्नलिखित हैं-

 

 

  1. दिल की धड़कनों को सामान्य करना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि पेसमेकर सर्जरी को मुख्य रूप से दिल की धड़कनों को सामान्य करने के लिए किया जाता है।

    इस प्रकार यह धड़कनों को सामान्य करने का सर्वोत्तम तरीका है।


     

  2. अन्य ह्रदय रोगों की संभावना को कम करना- इस सर्जरी को कराने के बाद अन्य ह्रदय रोगों की संभावना भी कम हो जाती है।

     

  3. ज़िदगी को सुधारना- पेसमेकर सर्जरी को कराने के बाद व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है और वह ज़िदगी को बेहतर तरीके से जी सकता है।

    पेसमेकर सर्जरी लोगों को इस तरह से नई ज़िदगी प्रदान करती है।


     

  4. दिल को स्वस्थ रखना- पेसमेकर सर्जरी के द्वारा दिल काफी दुरूस्त हो जाता है और वह पहले से काफी अच्छी तरह से काम करने लगता है।

    यह सर्जरी को दिल की कार्यक्षमता को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


     

  5. रक्तचाप को निंयत्रण में रखना- यह जगजाहिर बात है कि दिल की बीमारी उच्च रक्तचाप के कारण होती है।

    पेसमेकर सर्जरी रक्तचाप को नियंत्रण में रखती है और इसके साथ में दिल की बीमारी को होने की संभावना को भी कम करती है।

 

 

पेसमेकर सर्जरी के जोखिम क्या हो सकते हैं? (Pacemaker Surgery Complications in Hindi)

 

 

हालांकि, यह प्रक्रिया दिल के रोगियों के लिए लाभदायक साबित होती है और इसके साथ में यह उन्हें नया जीवन भी प्रदान करती है।

इसके बावजूद किसी भी अन्य सर्जरी की तरह पेसमेकर सर्जरी के भी कुछ जोखिम होते हैं, जिनके बारे में पता होना चाहिए।


यदि किसी व्यक्ति ने हाल ही में इस सर्जरी को कराया है, तो इसे कुछ जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है, जो इस प्रकार हैं-


 

  • रक्तस्राव का होना- किसी भी सर्जरी की तरह पेसमेकर सर्जरी के बाद भी कम मात्रा में रक्तस्राव होना सामान्य चीज होती है, लेकिन कई बार यह अधिक मात्रा में हो सकती है।

    इस स्थिति में डॉक्टर उसे रोकने की कोशिश करते हैं, ताकि व्यक्ति के शरीर में खून की कमी न हो।


     

  • रक्त वाहिकाओं का नष्ट होना- कई बार इस सर्जरी के बाद दिल के आस-पास की रक्तवाहिकाएं (Blood Vessel) पर बुरा असर पड़ता है।

    अत: इस स्थिति में व्यक्ति को मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ती है।


     

  • सर्जरी वाली जगह पर संक्रमण का होना- कई बार ऐसा देखा गया है कि इस सर्जरी को कराने के बाद व्यक्ति को संक्रमण हो जाता है।

    हालांकि, इस समस्या को कुछ दवाईयों या फिर इंजेक्शन के द्वारा ठीक किया जा सकता है।


     

  • ब्लड क्लोट्स का होना- कुछ लोगों को पेसमेकर सर्जरी के बाद दिल में ब्लड क्लोट्स या ब्लॉकेज हो जाता है।

    इस समस्या का समाधाना कोरोनरी एंजियोग्राफी के द्वारा किया जा सकता है।


     

  • फेफड़ों का खराब होना- पेसमेकर के बाद फेफड़ों का खराब होना भी अन्य जोखिम है।

    ऐसी स्थिति में डॉक्टर कुछ तरीकों जैसे दवाई या ऑपरेशन का सहारा लेते हैं और इनके माध्यम से इस समस्या का समाधान करने की कोशिश करते हैं।

 

 

पेसमेकर सर्जरी के बाद कौन-सी एहतियात बरतें? (Precautions After Pacemaker Surgery in Hindi)

 

 

इस सर्जरी के बाद का समय काफी संवेदनशील होता है, जिसमें कई तरह के जोखिम होने की संभावना भी रहती है।


इसी कारण व्यक्ति को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए और इन 5 सावधानियों को बरतना चाहिए-


 

  1. भारी व्यायाम न करना- यदि किसी व्यक्ति ने हाल ही पेसमेकर सर्जरी को कराया है, तो उसे अपने शरीर का विशेष करना चाहिए और ऐसे भी तरह के व्यायाम नहीं करने चाहिए, जिसमें उसे अधिक ताकत का ज़ोर लगाना पड़े।

     

  2. अधिक वजन वाली चीजों को न उठाना- इस सर्जरी के बाद व्यक्ति अधिक वजनदार चीजों को नहीं उठाना चाहिए क्योंकि इसका बुरा असर उसकी सेहत पर पड़ सकता है और इसके साथ में यह इस सर्जरी के असफल होने का कारण भी बन सकता है।

     

  3. दवाइयों को समय-समय पर लेना- जब व्यक्ति पेसमेकर सर्जरी को कराने के बाद घर जाता है, तो डॉक्टर उसे कुछ दवाईयां देते हैं, जो उसे स्वस्थ रहने में सहायता करती हैं।

    इसी कारण व्यक्ति को इन दवाईयों को सही समय पर लेना चाहिए।


     

  4. नियमित रूप से चेकअप कराना- यदि किसी व्यक्ति ने हाल ही में पेसमेकर सर्जरी को कराया है, तो उसे अपनी सेहत का नियमित रूप से चेकअप कराना चाहिए।

    इस चेकअप में डॉक्टर इस बात का पता लगाते हैं कि पेसमेकर उपकरण सही तरीके से कार्य कर रहा है या नहीं।


     

  5. पेसमेकर वाली जगह पर सेलफोन को न रखना- इस बात का ख्याल व्यक्ति को विशेष रूप से रखना चाहिए कि वह सेलफोन को उस जगह पर न रखें, जहां पर पेसमेकर को लगाया गया।

    उसके लिए ऐसा करना नुकसादायक साबित हो सकता है और इसकी वजह से ऐसी गंभीर स्थिति में पहुंच सकता है, जिसका समाधान  सर्जरी या ऑपरेशन के द्वारा संभव होता है।

 

 


जैसा कि हम सभी यह जानते हैं कि आज के तनावपूर्ण दौर में दिल से जुड़ी बहुत सारी बीमारियां फैल रही हैं।

ये बीमारियां मुख्य रूप से तंबाकू का सेवन करने, अनहेल्थी डाइट को अपनाने, शारीरिक गतिविधियां न करने इत्यादि कारों से होती हैं।

चूंकि, लोगों को दिल से संबंधित बीमारियों की पूर्ण जानकारी नहीं होती है, इसी कारण वे समय रहते इससे निजात नहीं पा पाते हैं।

यदि उन्हें पेसमेकर सर्जरी (Pacemaker Surgery) जैसे उपचार के तरीकों की जानकारी होती, तो शायद वे भी बेहतर एवं खुशहाल ज़िदगी जी पातें।

इस प्रकार हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित हुआ होगा क्योंकि हमने इसमें पेसमेकर की संपूर्ण जानकारी देने की कोशिश की है।

यदि आप या आपकी जान-पहचान में कोई व्यक्ति दिल संबंधी किसी बीमारी और उनके उपचार से संभावित तरीकों की अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहता है तो वह इसके लिए 95558-12112 पर Call करके उसकी मुफ्त सलाह प्राप्त कर सकता है।