गर्भपात (Miscarriage in Hindi) से बचने के लिए इस लेख को अवश्य पढ़ें

आज कल गर्भपात एक आम समस्या बन गई है। एक अध्ययन के अनुसार लगभग 20 गर्भावस्था (पांच में से एक) का अंत गर्भपात के साथ होता है।

गर्भपात (Miscarriage in Hindi) का सबसे आम कारण भ्रूण का सामान्य रूप से विकसित न होना होता है।

अधिकांश महिलाओं को इस बात का पता नहीं होता है, उन्हें गर्भपात की समस्या हो सकती है और इसी कारण वे समय रहते इसका इलाज नहीं कराती हैं।

यदि गर्भवती महिला को मिसकैरेज की संपूर्ण जानकारी हो तो शायद वे भी प्रेग्नेंसी का आनंद ले सकें।

तो आइए इस लेख के माध्यम से मिसकैरेज की पूर्ण जानकारी प्राप्त करते हैं, ताकि अब किसी और महिला को इसका सामना न करना पड़े।

गर्भपात क्या होता है? (Miscarriage Meaning in Hindi)

गर्भपात से तात्पर्य गर्भावस्था के 20वें हफ्ते से पहले भ्रूण का नष्ट हो जाने से है।

अधिकांश गर्भपात गर्भावस्था के पहले 14 हफ्ते के दौरान ही हो जाते हैं।

मिसकैरेज को मेडिकल भाषा में त्वरित गर्भपात (spontaneous abortion) कहा जाता है।

गर्भपात के कौन-कौन से  कारण होते हैं? (Reasons /Causes of Miscarriage in Hindi)

हालांकि, गर्भपात होने के कई कारण हो सकते हैं, उनमें से अधिकांश कारणों का पता लगाना काफी मुश्किल भी होता है।

लेकिन यदि गर्भपात होने के प्रमुख कारणों की जानकारी हो तो इस समस्या से बचा जा सकता है।

 

गर्भपात के मुख्य रूप से 6 कारण होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  1. क्रोमोसाम का होना

  2. दवाईयों का सेवन करना

  3. शराब पीना

  4. बीमारी का होना

  5. संक्रमण का होना

  6. कैफीन का अधिक मात्रा में सेवन करना

गर्भपात के कौन-कौन से लक्षण होते हैं? (Symptoms of Miscarriage in Hindi)

गर्भपात के मुख्य रूप से 6 लक्षण होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  1. वर्जिनल रक्तस्राव होना

  2. पेट के निचले हिस्से में दर्द होना

  3. योनि से तरल पदार्थ का निकलना

  4. गर्भावस्था के लक्षण का समाप्त हो जाना

  5. डायरिया और उल्टी होना

  6. पेट के एक हिस्से में दर्द होना

गर्भपात के कौन-कौन से प्रकार होते हैं? (Types of Miscarriage in Hindi)

  1. थ्रीटेनेड मिसकैरेज- थ्रीटेनेड मिसकैरेज से तात्पर्य उस स्थिति से है, जिसमें योनि से रक्तस्राव होता है।

    यह समस्या मुख्य रूप से गर्भावस्था के पहले तिमाही के दौरान होती है और इसमें गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) बंद हो जाती है।

  2. इनएविटेबल मिसकैरेज- प्रारंभिक गर्भावस्था के दौरान, यदि योनि से भारी मात्रा में रक्तस्राव और पेट में तेज़ ऐंठन होती है, तो उसे इनएविटेल मिसकैरेज कहा जाता है।

  3. कम्पलीट मिसकैरेज- कम्पलीट मिसकैरेज से तात्पर्य ऐसे गर्भपात से है, जिसमें गर्भाशय से सभी टिशू बाहर निकल जाते हैं।

    कम्पलीट मिसकैरेज की स्थिति में पेट में अधिक दर्द, भारी योनि से रक्तस्राव, और गर्भावस्था के ऊतकों के पूरी तरह से बाहर निकालने इत्यादि समस्याएं होती हैं।

  4. इनकम्पलीट मिसकैरेज- कम्पलीट मिसकैरेज की तरह इनकम्पलीट मिसकैरेज के दौरान भी अधिक मात्रा में रक्तस्राव और दर्द होता है।

  5. मिस्ड मिसकैरेज- जब गर्भावस्था के दौरान भ्रूण नष्ट हो जाता है, लेकिन इसके बावजूद ऊतक मां के गर्भ में मौजूद रहते हैं, तो इस स्थिति को मिस्ड मिसकैरेज के नाम से जाना जाता है।

  6. रिकरंट मिसकैरेज- जब किसी गर्भवती महिला में तीन या उससे अधिक गर्भपात की घटना होती है, उसे रिकरंट मिसकैरेज कहा जाता है।

    सौभाग्यवश रिकरंट मिसकैरेज की समस्या बहुत कम महिलाओं में (रिपोर्ट 1-2% का आकंडा है।) देखने को मिलती है।

  7. फ़र्स्ट-ट्राइमेस्टर मेंस्ट्रुएशन- जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि जब गर्भावस्था के पहले तिमाही के दौरान ही गर्भपात हो जाता है, तो उसे फ़र्स्ट-ट्राइमेस्टर मेंस्ट्रुएशन कहा जाता है।

    अध्ययनों से पता चला है कि लगभग 80 प्रतिशत गर्भपात पहली तिमाही के आस-पास ही होते हैं।

    इस समस्या के कई लक्षण जैसे योनि से रक्तस्राव, पीठ के निचले हिस्से में ऐंठन इत्यादि होते हैं।

गर्भपात का इलाज किन तरीकों से किया जा सकता है? (Treatment of Miscarriage in Hindi)

गर्भपात की समस्या का इलाज मुख्य रूप से इन 5 तरीकों से किया जा सकता है, जो इस प्रकार हैं-

 

  1. दवाई लेना- डॉक्टर गर्भपात से पीड़ित महिला को कुछ दवाई देते हैं। ये गर्भपात की ऐसी दवाईयां (Miscarriage Tablets in Hindi) होती हैं, जो आपकी गर्भाशय को खोलने में सहायक होती है, जिससे गर्भपात की समस्या के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है।

  2. सेहतमंद भोजन करना- किसी भी अन्य समस्या की भांति गर्भपात की समस्या में भी सेहतमंद भोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अत: गर्भपात की समस्या में सेहतमंद भोजन करना चाहिए।

  3. घरेलू नुस्खे अपनाना– कई बार गर्भपात की समस्या घरेलू नुस्खों के माध्यम से भी ठीक हो जाती है।

  4. व्यायाम करना- गर्भपात की समस्य को दूर करने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करने की सलाह दी जाती है।

  5. सर्जरी कराना- जब गर्भपात के लिए कोई दूसरा तरीका करागर साबित नहीं होते हैं, तब डॉक्टर उन्हें डी &सी सर्जरी कराने की सलाह देते हैं।

    डी&सी सर्जरी में गर्भाशय की सफाई की जाती है, ताकि वहां पर मौजूद खतरनाक टिशू को बाहर निकाला जा सके।

    इस प्रकार गर्भपात की समस्या के लिए डी&सी सर्जरी को सबसे कारगर उपाय होता है।

 

आज कल के दौर में महिला के स्वास्थ संबंधी बहुत सारे समस्याएं फैल रही हैं। उनमें से मिसकैरेज भी एक आम समस्या है, जो मुख्य रूप से आनुवांशिक या स्वास्थ संबंधी समस्या के कारण हो सकती है।

चूंकि, अधिकांश महिलाएं गर्भपात को लाइलाज समस्या समझती है और इसी कारण वे इसका समय रहते इलाज नहीं कराती हैं।

लेकिन यदि उन्हें यह पता हो कि गर्भपात की समस्या का समाधान संभव है तो शायद उन्हें भी मां बनने का सुख प्राप्त हो सके।

इस प्रकार हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना आवश्यक साबित हुआ होगा क्योंकि हमने इस लेख में गर्भपात से संबंधित आवश्यक जानकारी दी है।

यदि आप या आपकी जान-पहचान कोई महिला गर्भपात की समस्या से पीड़ित है तो किसी भी कदम को उठाने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलें और उनके निर्देश अनुसार ही गर्भपात का इलाज कराएं।

यदि आप या आपकी जान-पहचान में किसी महिला को गर्भावस्था से संबंधित किसी समस्या के बारे में जानकारी चाहिए तो वह 95558-12112 पर Call करके इसका मुफ्त परामर्श प्राप्त कर सकती है और इसके साथ में यदि आप किसी प्रकार के इलाज को कराने में आर्थिक रूप से असमर्थ हैं तो इसके लिए Letsmd से 0% की ब्याज दर पर मेडिकल लोन ले सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *