फेफड़ों के कैंसर की संपूर्ण जानकारी (Lung Cancer in Hindi)

फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) एक सामान्य समस्या बन गया है, जिससे लगभग 70,726 लोग पीड़ित हैं, जिन्हें इससे निजात पाने के लिए कैंसर सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है। यह आंकडे ही इसे एक महत्वपूर्ण विषय बनाते हैं, जिसके बारे में आवश्यक जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।

हालांकि, लोगों के मन में लंग कैंसर को लेकर बहुत सारी शंकाएं हैं, जो बिल्कुल गलत है क्योंकि यह शंकाएं लोगों को केवल भ्रमित करने का काम करती हैं।

तो आइए, इस लेख के माध्यम से फेफड़ों के कैंसर की आवश्यक जानकारी प्राप्त करते हैं।

क्या है फेफड़ों का कैंसर? (Lung Cancer-in Hindi)

फेफड़ों के कैंसर से तात्पर्य कैंसर के ऐसे प्रकार से है, जिसकी शुरूआत फैफड़ों में होता है। फेफड़े (Lung) मानव शरीर की छाती में दो स्पंजी अंग होते हैं, जो व्यक्ति की सांस लेने पर ऑक्सीजन को शरीर में पहुंचाते हैं और वहीं उसकी सांस छोड़ने पर कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर छोड़ते हैं।

आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति ध्रूमपान करते हैं, उन्हें फेफड़ों के कैंसर की संभावना रहती है, लेकिन यह कैंसर अन्य नशीले पदार्थों जैसे गुटखा, तंबाकू इत्यादि का सेवन करने से भी हो सकता है और इसके साथ में यदि कोई व्यक्ति ध्रूमपान करना छोड़ भी देते हैं, फिर भी इसकी संभावना बरकार रहती है।

फेफड़ों के कैंसर के लक्षण (Lung Cancer Symptoms-in Hindi)

ऐसा माना जाता है कि हर बीमारी के कोई-न-कोई लक्षण होते हैं, जो उसके होने का संकेत देते हैं। यह बात फेफड़ों के कैंसर के संदर्भ में भी सही साबित होती है। इसलिए इन लक्षणों को नज़रअदाज़ नहीं करना चाहिए अपितु उनके पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और सही समय पर इसका इलाज शुरू कराना चाहिए।

फेफड़ों के कैंसर के मुख्य रूप से कुछ लक्षण होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  1. लंबे समय तक खांसी का रहना- यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक खांसी है, तो उसे इस चीज को गंभीरता से लेना चाहिए और तुंरत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि फेफड़ों के कैंसर का संकेत हो सकता है।

  2. खांसी में खून आना- अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक खांसी रहती है और इसके साथ में खांसी में खून भी होता है, तो यह फैफड़ों के कैंसर का लक्षण हो सकता है।

  3. छाती में दर्द होना- खांसी के कारण छाती में दर्द होना भी फेफड़ों के कैंसर का लक्षण होता है।

  4. सांस लेने में तकलीफ होना- इस कैंसर का अन्य संकेत सांस लेने में तकलीफ होना हो सकता है।

  5. गले का बैठना- यदि किसी व्यक्ति को बोलने में तकलीफ होने लगती है और इसकी वजह से उसका गला बैठ जाता है तो यह फेफड़ों के कैंसर के होने का संकेत हो सकता है।

  6. वजन का कम होना- जब किसी व्यक्ति का वजन अचानक से कम हो जाता है, तो यह इस कैंसर के होने का लक्षण हो सकता है।

  7. थकावट या कमजोरी महसूस होना- अत्याधिक थकावट या कमजोरी का होना भी इस कैंसर का संकेत हो सकता है।

फेफड़ों का कैंसर कितने प्रकार का होता है? (Types of Lung Cancer-in Hindi)

फेफड़ों का कैंसर मुख्य रूप से 2 प्रकार के होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  1. स्मॉल सेल लंग कैंसर- ऐसा कैंसर जो अत्याधिक ध्रूमपान करने वाले लोगों में पाया जाता है और जो शरीर के अन्य हिस्से भी फैल सकता है, उसे स्मॉल सेल लंग कैंसर (Small Cell Lung Cancer) कहा जाता है।

  2. नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर- नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर, कैंसर का सामान्य रूप होता है, जो लगभग 85% लोगों में पाया जाता है।

फेफड़ों का कैंसर किन कारणों से होता है? (Causes of Lung Cancer-in Hindi)

फेफड़ों का कैंसर मुख्य रूप से निम्नलिखित कारणों से होता है, जो इस प्रकार हैं-

  • ध्रूमपान करना- जो व्यक्ति ध्रूमपान करते हैं, उनमें फेफड़ों के कैंसर के होने की संभावना अधिक रहती है।

  • तंबाकू खाना- यदि आप तंबाकू का सेवन करते हैं, तो आपको फेफड़ों का कैंसर हो सकता है।

  • एस्बेस्टस फाइबर (Asbestos Fibre) के संपर्क में आना- यदि कोई व्यक्ति एस्बेस्टस फाइबर के संपर्क में आ जाता है, तो उसे फेफड़ों का कैंसर हो सकता है क्योंकि इसमें इस कैंसर को उत्पन्न करने के टिशू होते हैं।

  • फेफड़े की बीमारी का होना- यदि आपको फेफड़ों संबंधी कोई बीमारी जैसे अस्थमा है, तो आपको फैंफड़े का कैंसर हो सकता है।

  • वायु प्रदूषण का होना- वायु प्रदूषण इस कैंसर का प्रमुख कारण है क्योंकि यह शरीर में प्रदूषित हवा को भेजता है, जो फेफड़ों का खराब करती है।

  • रेडॉन के संपर्क में आना-  रेडॉन एक स्वाभाविक रूप से होने वाली रेडियोधर्मी गैस (Radioactive Gas) है जो सभी चट्टानों और मिट्टी में मौजूद यूरेनियम की छोटी मात्रा से आती है। यह कभी-कभी इमारतों में भी पाया जा सकता है।

फेफड़ों के कैंसर का इलाज कैसे किया जा सकता है? (Treatment of Lung Cancer-in Hindi)

ज्यादातर लोग फेफड़ों के कैंसर को एक लाइलाज बीमारी समझते हैं लेकिन सत्य है कि किसी भी अन्य बीमारी की तरह इस कैंसर का भी इलाज संभव है, जिसे निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकता है-

  1. होम्योपैथिक इलाज कराना- इस कैंसर का इलाज होम्योपैथिक तरीके से भी किया जा सकता है क्योंकि होम्योपैथिक शरीर से कैंसर के टिशू को समाप्त कर देता है।

  2. रेडियोथैरेपी कराना- इसके कैंसर में रेडियोथैरेपी भी कारगर साबित हो सकती है। जिसे रेडियोऐशन भी कहा जाता है।

    इसमें उच्च स्तरीय रेडिएशन का उपयोग कैंसर के टिशू को समाप्त करने के लिए जाता है।

  3. कीमोथैरेपी कराना- कैंसर सर्जरी से बचने के लिए डॉक्टर कीमोथैरेपी को करते हैं, जिससे इस बात का पता लगाया जाता है कि शरीर में कैंसर किस हद तक फैल गया है।

  4. टार्गेटेड थैरेपी कराना- इस कैंसर को समाप्त में यह थैरेपी भी कारगार उपाय साबित हो सकती है। इसमें कैंसर को समाप्त करने के लिए दवाईयों को दिया जाता है।

  5. सर्जरी कराना- जब कैंसर को समाप्त करने के अन्य तरीके लाभदायक साबित नहीं होते हैं तो डॉक्टर कैंसर सर्जरी कराने की सलाह देते हैं जिसमेें कैंसर टिशू को काट दिया जाता है ताकि वह शरीर के अन्य अंगों में न फैले।

फेफड़ों के कैंसर का इलाज कराने के जोखिम (Side-Effects of Lung Cancer-Hindi)

जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि फेफड़ों के कैंसर का इलाज कई सारे तरीकों के द्वारा किया जा सकता है। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण होता है कि क्या इसका इलाज कराने के कोई जोखिम होते हैं या नहीं।

किसी भी अन्य सर्जरी की भांति कैंसर सर्जरी के भी अपने कुछ जोखिम होते हैं,जो इस प्रकार हैं-

  • बालों का गिरना- यह इसके इलाज के प्रमुख जोखिम है, जिसके लिए हेयर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ती है।

  • मुँह के छालों का होना- इस इलाज के बाद कुछ लोगों के मुंह में छाले हो जाते हैं।

  • डायरिया या कब्ज का होना- अक्सर ऐसा देखा गया है कि इस कैंसर का इलाज कराने के बाद कुछ लोगों को डायरिया या कब्ज की समस्या हो जाती है।

  • संक्रमण होने की संभावना का बढ़ना- कई बार इसके इलाज के बाद संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है।

  • रक्तस्राव का होना- आमतौर पर कैंसर के इलाज के दौरान रक्तस्राव होता है, लेकिन कुछ लोगों में इसकी मात्रा अधिक हो सकती है।

  • कैंसर का शरीर के अन्य हिस्से में फैलना- अक्सर यह भी देखा गया है कि कैंसर का इलाज कराने के बावजूद यह शरीर के अन्य हिस्से में फैल जाता है। ऐसी स्थिति में इसका फिर से इलाज कराने की जरूरत पढ़ सकती है।

फेफड़ों के कैंसर में कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए? (Precautions of Lung Cancer-in Hindi)

हालांकि, फेफड़ों के कैंसर का इलाज कराने के कुछ जोखिम होते हैं, लेकिन इन जोखिमों को निम्नलिखित सावधानियों को बरतकर कम किया जा सकता है-

  1. ध्रूमपान की आदत न डालना- यदि किसी व्यक्ति ने हाल ही में फेफड़ों के कैंसर का इलाज कराया है तो उसे ध्रूमपान नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे स्थिति और भी खराब हो सकती है।
  2. ध्रूमपान करने को बंद करना- इस कैंसर से पीड़ित व्यक्ति यदि ध्रूमपान करता है तो उसे ऐसा करना तुंरत बंद कर देना चाहिए ताकि यह कैंसर उसके शरीर में न फैले।

  3. ध्रूमपान करने वाले लोगों से दूर रहना- यदि आपकी जान-पहचान में कोई व्यक्ति ध्रूमपान करता है तो आपको उससे दूर रहना चाहिए क्योंकि उसकी वजह से यह समस्या को भी हो सकती है।

  4. हेल्थी डाइट का सेवन करना- भोजन का शरीर पर अधिक प्रभाव पड़ता है, ऐसे में व्यक्ति को अपने भोजन पर पूरा ध्यान देना चाहिए और हेल्थी डाइट का सेवन करना चाहिए।

    यह उसको जल्दी से ठीक होने में सहायता करेगा।

  5. व्यायाम करना- व्यायाम करना किसी भी बीमारी से ठीक होने में सहायता करता है, यह बात फेफड़ों के कैंसर पर भी लागू होता है। इसलिए इस कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को व्यायाम करना चाहिए यह उसके शरीर में रोग -प्रतिरोधक क्षमता (Immunity Power) को मजबूत करता है।

  6. डॉक्टर के संपर्क में रहना- यदि किसी व्यक्ति का फैंफड़े के कैंसर का इलाज चल रहा है तो उसे तब तक डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए जब तक डॉक्टर उसे सेहतमंद घोषित न कर दें।

फेफड़ों के कैंसर को कम करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा सकते हैं? (Social Responsibilities to Prevent Lung Cancer in Hindi)

भारत देश एक परिवार की तरह है, जहां पर सभी लोग बड़े ही प्यार से रहते हैं। किसी भी तरह की परेशानी होने पर यहां पर सभी लोग आगे आते हैं और उस समस्या को समाप्त करते हैं।

यह बात फेफड़ों के कैंसर जैसी भयावह बीमारी पर भी लागू होती है, जिसे कम करने के लिए हम निम्नलिखित कार्यों को कर सकते हैं-

  • ध्रूमपान न करना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि फेफड़ों का कैंसर मुख्य रूप से ध्रूमपान करने से होता है क्योंकि ध्रूमपान करने से व्यक्ति के फैंफड़े खराब हो जाते हैं और उसके शरीर में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है।

    इसलिए इस कैंसर को कम करने के लिए ध्रूमपान नहीं करना चाहिए।

  • फेफड़ों के कैंसर की संपूर्ण जानकारी देना- चूंकि, लोग आज भी फेफड़ों के कैंसर की जानकारी से वंचित हैं इसलिए जितना हो सके हमें लोगों को इस कैंसर की जानकारी देनी चाहिए ताकि लोगों में इस कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़े और यह कम हो सके।

  • इस समस्या पर सरकारी योजना का पालन करना- हालांकि, भारत सरकार ने इस कैंसर को कम करने के लिए बहुत सारी योजनाओं को चलाया है, लेकिन इसके बावजूद लोग इन योजनाओं का पालन नहीं करते हैं।

    ऐसे करना काफी निराशाजनक, इसलिए हम सभी को इन योजनाओं का पालन करना चाहिए ताकि फेफड़ों के कैंसर को कम किया जा सके।

  • कार्यस्थल पर कार्सिनोजन का इस्तेमाल न करना- हम में से किसी को भी अपने कार्यस्थल पर ऐसे पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए, जिसमें कार्सिनोजन हो क्योंकि ऐसे पदार्थों को हवा को प्रदूषित करते हैं और जो फेफड़ों के कैंसर का कारण बनती है।

  • दूसरे लोगों को ध्रूमपान या तंबाकू का सेवन करने से रोकना- इस कैंसर को रोकने के लिए जितना नशीले पदार्थों जैसे ध्रूमपान या तंबाकू के सेवन से दूर रहना है उतना ही जरूरी दूसरे लोगों को भी इनका सेवन करने से रोकना भी है क्योंकि यह कैंसर नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले लोगों के साथ-साथ ऐसे लोगों के आस-पास लोगों में भी हो सकता है।

  • पेड़ों को लगाना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि फेफड़ों का कैंसर वायु प्रदूषण से भी होता है इसलिए उसे साफ करने के लिए हम सभी को सहयोग करना चाहिए और पेड़ों को लगाकर वातावरण को साफ करना चाहिए।

  • घर से जाने पर मॉस्क का उपयोग करना- यदि आपको किसी काम के लिए घर से बाहर जाना हो तो कृपया मॉस्क पहनकर जाएं ताकि आपके शरीर में विषैल पदार्थ न घुस सकें।

जैसा कि हम सभी यह जानते हैं कि फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) काफी तेज़ी से फैल रही है। यह समस्या लगभग हर वर्ग से व्यक्ति में देखने को मिल रही है।

इसी कारण हर साल 1 अगस्त को विश्व लंग कैंसर डे (World Lung Cancer Day) के रूप में मनाया जाता है, ताकि लोग इसके बारे में अधिक-से-अधिक जानकारी प्राप्त कर सकें और इस समस्या से स्वयं की रक्षा कर सकें।

इस प्रकार हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित हुआ होगा क्योंकि हमने इस लेख में फेफड़ों के कैंसर से संबंधित आवश्यक जानकारी देने की कोशिश की है।

यदि आप या आपकी जान-पहचान में कोई व्यक्ति किसी भी तरह के कैंसर से पीड़ित है तो किसी भी कदम को उठाने से पहले डॉक्टर से मिले और उसका सही इलाज कराएं।

इसके साथ में यदि उसे किसी भी तरह की बीमारी के संबंध में मुफ्त सलाह की आवश्यकता है तो वह बेझिझक +91-8448398633 पर Call कर सकता है।

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