लेप्रोस्कोपिक सर्जरी क्या है? (Laparoscopic Surgery in Hindi)

​​लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (Laparoscopic Surgery) के द्वारा बहुत सारी महिलाओं को नई ज़िदगी मिली है। वे इसे एक बेहतर विकल्प के रूप में देखती हैं क्योंकि इस सर्जरी के दौरान उन्हें किसी भी तरह के दर्द का सामना नहीं करना पड़ता है।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का उपयोग मुख्य रूप से महिला के स्वास्थ संबंधी समस्याओं जैसे अल्सर, जख्म या घाव, रसौली इत्यादि का समाधान करने के लिए किया जाता है।

इसके बावजूद कुछ ऐसी महिलाएं भी हैं, जो इस सर्जरी का लाभ नहीं उठा पाती हैं क्योंकि उन्हें इसकी पूर्ण जानकारी नहीं होती है।

यदि उन्हें लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की संपूर्ण जानकारी होती है, तो शायद वे भी स्वास्थ संबंधी कई सारी समस्याओं से निजात पा सकती।

अगर आपको भी इस सर्जरी के बारे में अधिक जानकारी नहीं है तो इसके लिए आपको इस लेख को ज़रूर पढ़ना चाहिए।

Table of Contents

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी क्या है? (What is Laparoscopic Surgery in Hindi)

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से तात्पर्य ऐसी सर्जरी से है, जिसे मुख्य रूप से महिला बांझपन, रसौली, अल्सर इत्यादि का इलाज करने के लिए किया जाता है।

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि इस सर्जरी को मुख्य रूप से लेप्रोस्कोप या दूरबीन के द्वारा किया जाता है।

लेप्रोस्कोप वास्तव में एक पतली सी ट्यूब होता है, जिसमें एक प्रकाश स्रोत (Light Source) और कैमरा लगा होता है, यह पेट के भीतर की तस्वीर को दिखाता है।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के कौन-कौन से प्रकार हैं? (Types of Laparoscopic Surgery in Hindi)

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के मुख्य रूप से 4 प्रकार होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  1. टोटल लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी- यह लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का प्रमुख प्रकार है, जिसमें गर्भाशय और गर्भाशय ग्रीवा को हटाया जाता है।

    टोटल लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी (Total Laparoscopic Hysterctomy) को मुख्य रूप से उस स्थिति में किया जाता है, जब अन्य सभी सर्जियां लाभदायक साबित नहीं होती हैं।

  2. लेप्रोस्कोपिक मोमेक्टमी- मोमेक्टमी गर्भाशय रसौली को हटाने की एक शल्य प्रक्रिया है, जो गर्भाशय को होती है।

    रसौली मुख्य रूप से गर्भाशय के टिशू में पाए जाने वाले गैर-कैंसरयुक्त (Non-Cancer) गांठ हैं, जिसके कारण अधिक मात्रा में रक्तस्राव (Bleeding) होता है।

  3. लेप्रोस्कोपिक ओवेरियन कैस्टेक्टॉमी- यह लेप्रोस्कोपिक का एक अन्य प्रकार है, जिसे मुख्य रूप से गर्भाशय के अल्सर को ठीक करने के लिए किया जाता है।

    लेप्रोस्कोपिक ओवेरियन कैस्टेक्टॉमी (Laparoscopic ovarian cystectomy) को मुख्य रूप से लेप्रोस्कोप नामक उपकरण की सहायता से किया जाता है, जिसे पेट के भीतर डालकर उस अंग की आंतरिक तस्वीर को देखा जाता है।

  4. लेप्रोस्कोपिक अस्सिटेड वैजिनल हिस्टरेक्टमी- जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि लेप्रोस्कोपिक असिस्टेड वैजिनल हिस्टरेक्टमी (Laparoscopic Assisted Vaginal Hysterectomy) को यौनि में मौजूद समस्या को ठीक करने के लिए किया जाता है।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी को कब किया जाता है? (Laparoscopic Surgery Indications in Hindi)

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी को कुछ विशेष स्थिति में किया जाता है , जो इस प्रकार हैं-

  • आस्‍थानिक गर्भावस्‍था या श्रोणि सूजन की बीमारी का पता लगाना- लेप्रोस्कोपिक सर्जरी को मुख्य रूप से आस्थानिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy) या श्रोणि सूजन की बीमारी (pelvic inflammatory disease) का पता लगाने के लिए किया जाता है।

  • रसौली या अल्सर का पता लगाना- कई बार डॉक्टर रसौली या अल्सर (adhesions) का पता लगाने के लिए इस सर्जरी को करते हैं।

  • पेट में कैंसर का पता लगाना- कई बार इस सर्जरी को उस स्थिति में भी किया जाता है, जब किसी व्यक्ति को पेट में कैंसर के होने की संभावना होती है।

  • पैल्विक दर्द के कारण का पता लगाना- यदि किसी महिला को पैल्विक दर्द की शिकायत रहती है तो इसका समाधान करने के लिए इस सर्जरी को किया जाता है।

  • महिला बांझपन का इलाज करना- हालांकि, महिला बांझपन के लिए आईवीएफ (IVF) के बेहतर विकल्प है, लेकिन जब किसी महिला को इससे आराम नहीं मिलता है, तो उस स्थिति में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी को किया जा सकता है।

  • हर्निया का इलाज करना- यदि कोई व्यक्ति हर्निया से पीड़ित होता है, तो उस व्यक्ति को डॉक्टर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी को कराने की सलाह देते हैं।

    इस प्रकार यह सर्जरी हर्निया के इलाज में भी उपयोगी साबित होती है।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की प्रक्रिया क्या है? (Procedure of Laparoscopic Surgery in Hindi)

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें कुछ स्टेप शामिल होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  • स्टेप 1: व्यक्ति को एनेस्थीसिया देना- इस सर्जरी की शुरूआत व्यक्ति को एनेस्थीसिया देने के साथ होती है।

    किसी भी व्यक्ति को एनेस्थीसिया इसलिए दिया जाता है, ताकि उसे इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी तरह का दर्द महसूस न हो।

  • स्टेप 2: दवाई देना- व्यक्ति को एनेस्थीसिया को देने के बाद उसे दवाई दी जाती है, जो उसके शरीर को इस सर्जरी के अनुकूल बनाती हैं।

    ये दवाईयां मुख्य रूप से किसी भी तरह के जोखिमों की संभावना को कम करने का कार्य करती हैं।

  • स्टेप 3: पेट पर कट लगाना- व्यक्ति को दवाई देने के बाद डॉक्टर उसके पेट में छोटा सा कट लगाते हैं।

    पेट को कट लगाने के साथ ही इस सर्जरी की मुख्य प्रक्रिया की शुरूआत होती है।

  • स्टेप 4: कट में ट्यूब को डालना- डॉक्टर द्वारा व्यक्ति के पेट पर लगाए गए कट को बनाने के बाद वे उस कट में पतली सी ट्यूब को डालते हैं।

  • स्टेप 5: लिप्रोस्कोप को डालना- पेट पर बने छोटे- से कट में ट्यूब को बनाने के बाद उस ट्यूब में लिप्रोस्कोप नामक उपकरण को डाला जाता है।

    लिप्रोस्कोप उपकरण मुख्य रूप से एक दूरबीन की तरह होता है, जिस पर एक कैमर लगा होता है, यह कैमरा पेट के आंतरिक अंग की तस्वीर को कंप्यूटर पर दिखाता है।

  • स्टेप 6: बीमारी का इलाज करना-  लिप्रोस्कोप के माध्यम से इस पूरी प्रक्रिया को किया जाता है।

    डॉक्टर इस उपकरण के द्वारा कंप्यूटर पर दिखाई जाने वाली तस्वीर को देख कर बीमारी का इलाज करते हैं।

    इसके साथ ही यह सर्जरी समाप्त हो जाती है।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की लागत क्या है? (Cost of Laparoscopic Surgery in Hindi)

जब कोई डॉक्टर किसी व्यक्ति को लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कराने की सलाह देते हैं, तो उस समय में उसके मन में सबसे पहला प्रश्न यही आता है कि लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की लागत क्या है।

उसके लिए इस प्रश्न का उत्तर पाना काफी महत्वपू्र्ण होता है क्योंकि यह उसकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है।

चूंकि, ज्यादातर लोग इस सर्जरी को एक महंगी प्रक्रिया समझते हैं इसलिए वे कराने से हिचकते हैं लेकिन यदि उन्हें यह पता हो कि यह एक किफायदी प्रक्रिया है जिसकी औसतन लागत 40 हजार से 1.5 लाख होती है।

 

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की यह लागत कई सारे तत्वों पर निर्भर करती है, जो इस प्रकार हैं-

  • बीमारी- इस सर्जरी की लागत मुख्य रूप से व्यक्ति की बीमारी पर निर्भर करती है क्योंकि इसे कई सारी बीमारियों का इलाज करने के लिए किया जाता है।

  • लेप्रोस्कोपिक का प्रकार- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि लेप्रोस्कोपिक कई प्रकार के होते हैं ऐसे में इसकी लागत इसके प्रकार पर भी निर्भर करती है।

  • व्यक्ति के स्वास्थ की स्थिति- इस सर्जरी की लागत व्यक्ति के स्वास्थ की स्थिति पर काफी हद तक निर्भर करती है।

  • अस्पताल- लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की लागत इस बात पर काफी हद तक निर्भर करती है कि इसे किस अस्पताल में कराया जा रहा है।

       यह भी देखें: लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के सर्वोत्तम अस्पताल।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के कौन-कौन से लाभ होते हैं? (Benefits of Laparoscopic Surgery in Hindi)

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी एक लाभदायक प्रक्रिया है, जिसके मुख्य रूप से 5 लाभ होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  1. कम दर्द होना- लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का प्रमुख लाभ यह होता है, कि इस प्रक्रिया में कम दर्द होता है क्योंकि इसे दूरबीन के माध्यम से किया जाता है।

  2. कम निशान पड़ना- चूंकि, इस सर्जरी के दौरान कम कट लगाए जाते हैं, इसी कारण व्यक्ति के शरीर पर कम निशान पड़ते हैं।

  3. स्वास्थ संबंधी समस्याओं का इलाज करना- लेप्रोस्कोपिक सर्जरी को कई सारी बीमारियों जैसे हर्निया, रसौली, अल्सर इत्यादि का इलाज करने के लिए किया जाता है।

  4. कम रक्तस्राव होना- इस सर्जरी के दौरान व्यक्ति को कम रक्तस्राव होता है इसी कारण उसके शरीर से खून की कमी नहीं होती है।

  5. जल्दी ठीक होना- चूंकि, इस सर्जरी के दौरान किसी प्रकार का दर्द, निशान, रक्तस्राव इत्यादि नहीं होता है इसी कारण व्यक्ति को किसी तरह की कमजोरी महसूस नहीं होती है और वह इस सर्जरी के बाद जल्दी से ठीक हो जाता है।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के कौन-कौन से जोखिम होते हैं? (Complications of Laparoscopic Surfery in Hindi)

निश्चित रूप से लेप्रोस्कोपिक एक लाभकारी सर्जरी है, जो कई सारी बीमारियों का इलाज करती है, लेकिन इसके बावजूद इसके भी कुछ जोखिम होते हैं, जिनके बारे में जानना महत्वपूर्ण होता है।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के मुख्य रूप से 6 जोखिम होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  1. संक्रमण होना- कई बार ऐसा देखा गया है कि लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद कुछ लोगों को संक्रमण हो जाता है, इसी स्थिति में दवाईयों का उपयोग किया जाता है।

  2. कमजोरी या उल्टी जैसा महसूस होना- लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद कुछ लोगों को कमजोरी या उल्टी होने की भी शिकायत रहती है।

  3. अंग का खराब होना- कई बार ऐसा भी देखा गया है कि इस सर्जरी के बाद कुछ लोगों का अंग खराब हो जाता है।

    ऐसी स्थिति में इलाज के अन्य तरीकों का उपयोग किया जाता है।

  4. नस में ब्लड क्लोट्स होना- इस सर्जरी के बाद कुछ लोगों की नस में ब्लड क्लोट्स हो जाता है।

  5. बुखार होना- लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद कुछ लोगों को बुखार भी हो जाता है।

    हालांकि, यह कुछ समय के बाद आराम हो जाता है, लेकिन जब किसी व्यक्ति को लंबे समय तक इससे आराम नहीं मिलता है तो यह स्थिति घातक रूप ले सकती है।

  6. सांस लेने में तकलीफ होना- कुछ लोगों में ऐसा भी देखा गया है कि उन्हें इस सर्जरी के बाद सांस लेने में तकलीफ होती है।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए? (Precautions After Laparoscopic Surgery in Hindi)

किसी भी अन्य सर्जरी की तरह लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के भी अपने कुछ जोखिम होते हैं, लेकिन कुछ सावधानियों को बरतकर कम किया जा सकता है, जो इस प्रकार हैं-

 

  1. ढीले-ढाले कपड़े पहनना- यदि किसी महिला की हाल ही में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी हुई है तो उसे कुछ समय के लिए ढीले-ढाले कपड़ों को पहनना चाहिए, ताकि उन्हें किसी तरह की असुविधा महसूस न हो।

  2. भरपूर नींद लेना- विशेषज्ञ द्वारा भरपूर नींद को अच्छी सेहत का राज़ मानते हैं क्योंकि भरपूर नींद शरीर में ऊर्जा भरती है और इससे व्यक्ति तरोताज़ा महसूस करता है।

    यह बात लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कराने वाले व्यक्ति पर भी लागू होती है इसलिए उसे भी इस सर्जरी के बाद भरपूर नींद लेनी चाहिए।

  3. हल्की गतिविधियों को करना- इस सर्जरी के बाद हल्की गतिविधि करनी चाहिए, क्योंकि यह शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाती हैं, जो व्यक्ति को जल्दी से ठीक होने में सहायता करती हैं।

  4. पौष्टिक भोजन करना- इस सर्जरी को कराने के बाद व्यक्ति को अपने भोजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए और उसे केवल पौष्टिक भोजन ही करना चाहिए।

    उसे बाहर के खाने, तले हुए खाने इत्यादि भोजन को खाने से बचना चाहिए, इस तरह का खाना उसकी सेहत पर बुरा असर डाल सकता है।

  5. स्वास्थ की नियमित रूप से जांच कराना- लेप्रोस्कोपिक सर्जरी को कराने वाले व्यक्ति को अपने स्वास्थ की नियमित रूप से जांच करानी चाहिए ताकि इस सर्जरी के बाद किसी भी तरह होने वाले जोखिम का पता लगाया जा सके और उसे समय रहते ठीक भी किया जा सके।

  6. डॉक्टर के संपर्क में रहना- यदि किसी व्यक्ति की हाल ही में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी हुई है तो उसे तब तक डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए, जब तक डॉक्टर उसे पूरी तरह से सेहतमंद घोषित न कर दें

 

पहले के ज़माने में सर्जरी कराना काफी मुश्किल भरा काम होता है, जिसमें बहुत सारी परेशानियां जैसे चीर फाड़ करना, अधिक खर्चा होना इत्यादि होती थी, इसी कारण लोग किसी भी सर्जरी को कराने से बचते थे।

लेकिन समय के साथ मेडिकल सांइस में काफी विकास हो गया है और अब सर्जरी कराना भी काफी लाभदायक हो गया है।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (Laparoscopic Surgery) भी ऐसी ही सर्जरी का एक उदाहरण है, जिसे दूरबीन की सहायता से किया जाता है, इस पूरी प्रक्रिया में व्यक्ति को किसी तरह का दर्द महसूस नहीं होता है।

हालांकि, कुछ लोगों के लिए इसकी लागत महंगी साबित हो सकती है, लेकिन ऐसे लोगों के लिए मेडिकल लोन की सुविधा भी मौजूद है, जिसके कारण लोग इस सर्जरी को आराम से कराते हैं।

इस प्रकार हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित हुआ होगा क्योंकि हमने इस लेख में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की संपूर्ण जानकारी देने की कोशिश की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *