किडनी ट्रांसप्लांट कराने से पहले, जान लें इसकी पूर्ण जानकारी

जब लोग इस तरह की सर्जरी के बारे में सुनते हैं तो उनके मन में यह प्रश्न उठता है कि किडनी ट्रांसप्लांट क्या होती है? हमारा जन्म बीन के आकार के अंगों के साथ होता है, जिन्हें किडनी कहा जाता है, जो रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित होती हैं। ये उदर गुहा (एब्डॉमिनल कैविटी) की पिछली मांसपेशियों में एक-दूसरे के सामने स्थित होती हैं।

किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी (Kidney Transplant in Hindi) तब की जाती है, जब दोनों किडनी सामान्य रूप से काम करना बंद कर देती हैं और जब डायलिसिस से भी आराम नहीं होता है। इस स्थिति को एन्ड स्टेज रीनल डिजीज (ईएसआरडी) या किडनी का खराब होना कहते हैं।

किडनी ट्रांसप्लांट को किन कारणों से किया जाता है? (Indications of Kidney Transplant in Hindi)

आपके शरीर को सेहतमंद रहने के लिए ताज़े और साफ खून की आवश्यकता होती है, लेकिन किडनी के खराब होने  से शरीर में विषाक्त पदार्थ (टॉक्सिन्स) और द्रव्य पदार्थ (फ्लूइड) बन जाते  हैं, जिनसे कई समस्याएं जैसे शरीर के अन्य अंग भी खराब हो सकते हैं, मिर्गी या फिर कोमा की समस्या भी हो सकती है। किडनी प्रत्यारोपण कराने के कुछ लक्षण इस प्रकार हैं:

  • किडनी के खराब हो जाने  पर ज्यादा और लगातार समय तक कमजोरी महसूस होना क्योंकि इस स्थिति में शरीर में कम लाल रक्त कोशिकाएं बनती हैं।

  • तरल अवधोरण (फ्लूइड रिटेंशन) के कारण सांस लेने में तकलीफ होना।

  • ऑक्सीजन की कमी के कारण बेहोशी, चक्कर आना।

  • ऐड़ियों, चेहरे, आंखों के नीचे, पेट के ऊपर सूजन होना।

  • बदबूदार सांस, भूख न लगना और किसी भी खाने की चीज का स्वाद का पता न चलना।

  • पूरे शरीर में बहुत ज्यादा खुजली होना।

  • पेशाब करने में परेशानी होना या पेशाब न आना: किडनी के खराब हो जाने पर पेशाब नहीं आता है, पेशाब करने का पूरा तंत्र ही बदल जाता है और ऐसी स्थिति में कभी-कभी बहुत ज्यादा अनियंत्रण और बार-बार पेशाब आता है।

  • उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर)

  • मधुमेह (डायबिटीज)

  • स्तवकवृक्कशोथ (ग्लोरूलोनेफ्रीटिस)

  • ल्यूपस

  • पॉलीसिस्टिक किडनी

  • रीनल ट्यूमर

  • किडनी के खराब होने के अन्य कारण

किडनी ट्रांसप्लांट से पहले कौन-कौन से कार्य किए जाते हैं? (Pre-Procedure of Kidney Transplant in Hindi)

एक बार जब डॉक्टर और रोगी यह फैसला लेते हैं कि किडनी प्रत्यारोपण कराने की जरूरत है तो ऐसी बड़ी सर्जरी कराने के लिए अच्छी तरह से तैयारी करने की जरूरत होती है।

यह वह समय होता है, जब रोगी को किसी मृत दाता (डेड डोनर) या किसी जीवित दाता (लिविंग डोनर) जैसे दोस्त या परिवार के सदस्य की किडनी के मूल्याकंन का इंतजार करना पड़ता है।

रोगी को निम्नलिखित चिकित्सा परीक्षणों से गुजरना पड़ता है, जिनसे यह सुनिश्चित हो सके कि वह पूरी तरह से स्वस्थ है और सर्जरी कराने के बाद दवाईयों के प्रभाव को सहन करने में समर्थ है:

  • मानसिक स्वास्थ मूल्याकंन:

इस परीक्षण में डॉक्टर आपकी मनोवैज्ञानिक स्थिरता की जांच करते हैं क्योंकि कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक मुद्दे इस प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

इस मूल्याकंन को जीवित दाता (लिविंग डोनर) के लिए भी किया जाता है। इस प्रक्रिया से प्रत्यारोपण से संबंधित किसी भी प्रकार के मिथक दूर हो जाते हैं।

  • रक्त की जांच (ब्लड टेस्ट्स):

इसके साथ में रिनल प्रोफाइल भी की जाती है, जिसमें बीयूएन, क्रिएटिनिन और ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (जीएफआर) और मूत्र परीक्षण (यूरिन टेस्ट) शामिल होते हैं।

  • डायग्नोस्टिक परीक्षण (डायग्नोस्टिक टेस्ट):

इन परीक्षणों (टेस्ट) को पूरे स्वास्थ का आकलन करने के लिए किया जाता है। इन परीक्षणों में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, किडनी बायोप्सी इत्यादि के टेस्ट शामिल हो सकते हैं।

महिलाओं का मेमोग्राम, पैप टेस्ट और स्त्री रोग मूल्याकंन हो सकता है।

गुर्दें की प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) सर्जरी से पहले आपका डायलिसिस किया जा सकता है, अगर आपने पहले कभी डायलिसिस कराया है तो आपको एक फॉर्म दिया जाएगा, जिस पर आपको उस अस्पताल के हस्ताक्षर कराने होंगे।

उस फॉर्म को अच्छी तरह से पढ़ें और अगर आपको उसमें कुछ समझ में नहीं आता है तो उसके बारे में पूछें।

किडनी प्रत्यारोपण को कैसे किया जाता है? (Procedure of Kidney Transplant in Hindi)

किडनी प्रत्यारोपण (किडनी ट्रांसप्लांट) प्रक्रिया इस तरह से की जाती है:

 

  • शरीर के जिस अंग में सर्जरी की जाती है उसे एंटीसेप्टिक सॉल्यूशन से साफ किया जाता है। इससे पहले इस अंग के बालों को शेव किया जाता है।

  • पेट के जिस निचले हिस्से पर प्रत्यारोपण करने की आवश्यकता है, वहां पर लंबा कट बनाया जाता है। इसे फिर से लगाने से पहले डोनर की किडनी की जांच की जाती है।

  • इस प्रत्यारोपण में, मरीज को एनेस्थीसिया दिया जाता है ताकि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उसे किसी तरह का दर्द और बेहोशी न हो। आमतौर पर यह प्रक्रिया 2 से 4 घंटे तक चलती है।

    इस प्रक्रिया में नए गुर्दे (किडनी) को उस जगह में नहीं लगाया जाता है, जहां पर पहले गुर्दा (किडनी) मौजूद था। इसे श्रोणि (पेलविस) में पेट के निचले भाग में लगाया जाता है।

  • बांए तरफ के गुर्दे को दांए ओर लगाया जाता है और डोनर की दांए ओर की किडनी को बांए ओर लगाया जाता है। यह मूत्राशय से मूत्र-मार्ग के संबंध को आसान करेगा।

  • बाहरी इलियाक आर्टरी और वेन को डोनर किडनी के रिनल आर्टरी और वेन से जोड़ा जाता है।

  • इसके बाद, रक्त प्रवाह की जांच की जाएगी ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि कहीं सूचर लाइन में रक्तस्राव तो नहीं हो रहा है।

  • डोनर किडनी से मूत्रनली को रोगी के अपने मूत्राशय से जोड़ा जाता है।

  • उस चीरे को टांको या सर्जिकल स्टेपल से बंद कर दिया जाएगा।

  • उस जगह पर नली को लगाया जा सकता है, जहां पर कांटे को गंदे खून को निकालने और सूजन को कम करने के लिए बनाया जाता है।

  • अंत में, किसी भी प्रकार के घाव से बचने के लिए पट्टी या ड्रेसिंग की जाएगी।

दिल्ली- NCR में किडनी ट्रांसप्लांट का कितना खर्चा आता है? (Kidney Transplant Cost in Hindi)

किडनी ट्रांसप्लांट का खर्चा विभिन्न तरह के तत्वों पर निर्भर करती है, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

  • मरीज के स्वास्थ की स्थिति

  • अस्पताल

  • इलाज करने का तरीका

  • किडनी ट्रांसप्लांट के सत्र

ऊपर दिए तत्वों के अलावा किडनी ट्रासंप्लांट का खर्चा इस बात पर भी निर्भर करती है कि दिल्ली में आप इसे किस जगह पर करा रहे हैं।

औसतन रूप से किडनी ट्रांसप्लांट का खर्चा 2-3 लाख रूपये होता है, जिसमें 20,000 रूपये का खर्च प्रति माह होता है।

किडनी ट्रांसप्लांट के फायदे कौन-कौन से होते हैं? (Benefits of Kidney Transplant in Hindi)

गुर्दे की प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) सर्जरी के कई सारे फायदे होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

 

  1. बॉड़ी मैटाबॉलिज़म को रिस्टोर करना

  2. रक्त के प्रवाह को सुधारना

  3. किडनी डायलिसिस की आवश्यकता न पड़ना

  4. नयी ज़िदगी देना

किडनी ट्रांसप्लांट के जोखिम कौन-कौन से होते हैं? (Side-Effects of Kidney Transplant in Hindi):

किडनी ट्रांसप्लांट के निम्नलिखित जोखिम हो सकते हैं-

 

  • रक्तस्राव (ब्लीडिंग)

  • खून का जमना

  • संक्रमण

  • दान की गई किडनी का खराब होना

  • मूत्रनली से रसाव या ब्लॉकेज होना, जो किडनी को मूत्राशय से जोड़ती है

  • संक्रमण या कैंसर,जो दान की गई किडनी से हो सकता है

  • इससे रोगी को दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ सकता है या उसकी मृत्यु भी हो सकती है।

  • अगर आपको बुखार, दर्द, खुजली, जी मचलाना, उल्टी और पेशाब में अचानक कमी आना इत्यादि लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

किडनी ट्रांसप्लांट का डाइट चार्ट कैसा होना चाहिए? (Diet- Chart After Kidney Transplant in Hindi)

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद शुरूआती 2 से 3 महीनों के लिए व्यक्ति को डॉक्टर के पास नियमित रूप से जाना चाहिए ताकि उसके विभिन्न रक्त पैमानों को मॉनिटर किया जा सके।

जब तक किडनी अच्छी तरह से काम करना शुरू नहीं करती और रक्त इलेक्ट्रॉलाइटिस स्तर सामान्य नहीं होता, तब तक उसके खान-पान पर कई प्रतिबंध लगाए जाते हैं।

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद के डाइट चार्ट में निम्नलिखित बिंदू शामिल होने चाहिए-

  • आमतौर पर, कि़डनी ट्रांसप्लांट के बाद व्यक्ति को हल्का, नरम और कम नमक वाला खाना खाने की सलाह दी जाती है।

    इस दौरान  उसे कम पोटेशियम वाला खाना खाना चाहिए।

  • किडनी ट्रांसप्लांट के बाद सेब और अनार जैसे फलों को खाने की सलाह दी जाती है, जो किडनी के लिए अच्छे होते हैं।

  • बाहर के खाने जैसे फास्ट फूड, ऑयल स्नैक्स, होटल के खाने से बचना चाहिए।

  • एक बार जब आपके डॉक्टर आपके रक्त के सामान्य पैमाने की पुष्टि कर देते हैं, तो उसके बाद व्यक्ति सामान्य डाइट का सेवन कर सकता है।

  • किडनी ट्रांसप्लांट कराने के बाद व्यक्ति ऐसे भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए; जिसे आमतौर पर अस्वास्थ्यकर (तला हुआ, बहुत मसालेदार, नमकीन आदि) समझा जाता है।

जैसा कि आप यह जानते हैं कि इन दिनों बहुत सारे लोग किडनी के खराब होने की समस्या से पीड़ित है, जिसका मुख्य कारण अधिक मात्रा में अनहेल्दी खान-पान होता है।

हालांकि, वे इसके लिए बहुत सारे तरीकों जैसा दवाई लेना, व्यायाम करना इत्यादि को अपनाते हैं, लेकिन जब ये सभी तरीकों से उन्हें लाभ नहीं पहुंचता है तब उनके लिए एकमात्र विकल्प किडनी ट्रांसप्लांट (Kidney Transplant in Hindi) ही बचता है।

जो लोग किडनी ट्रांसप्लांट कराते हैं, उनके मन में यह प्रश्न आता है कि उन्हें इसके बाद किस तरह का खान-पान करना चाहिए, इसी प्रश्न का उत्तर हमने इस लेख में देने की कोशिश की है, अत: हमें उम्मीद है कि इस लेख को पढ़ना आपके लिए उपयोगी साबित हुआ होगा।

अगर आप या आपकी जान-पहचान में कोई व्यक्ति किडनी की समस्या से पीड़ित है और इसके लिए किडनी ट्रांसप्लाट कराना चाहते हैं।

अगर आपको किडनी ट्रांसप्लांट के लिए फाइनेंस की जरूरत है सहायता करना चाहते हैं तो  91-95558-12112 पर कॉल करके मुफ्त परामर्श ले सकते हैं।

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