हाइड्रोसील क्या है और कैसे करें उपचार? (Hydrocele in Hindi)

​​​हाइड्रोसील (Hydrocele) शब्द ज्यादातर लोगों के लिए बिल्कुल नया हो सकता है और ऐसा भी हो सकता है कि वे इसे गंभीरता से न लें।

लेकिन यह रवैया उनके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है क्योंकि एक अनुमान के अनुसार हाइड्रोसील की समस्या काफी तेज़ी से फैल रही है, यदि भारत की बात की जाए तो इससे लगभग 40 मिलियन लोग पीड़ित हैं।

 

ये आंकडें इस बात का संकेत देते हैं कि लोगों में हाइड्रोसील की जागरूकता नहीं है और इसी कारण वे इससे निजात भी नहीं पा पाते हैं।

यदि आप भी इसकी जानकारी से वंचित हैं, तो आपको इस लेख को ज़रूर पढ़ना चाहिए क्योंकि यह समस्या किसी भी पुरूष को हो सकती है।

 


हाइड्रोसील क्या है? (Meaning of Hydrocele in Hindi)

 

 

हाइड्रोसील से तात्पर्य उस स्थिति से है, जब किसी पुरूष के अंडकोष (Testicle) में पानी भर जाता है और उसका आकार काफी बढ़ जाता है।

आमतौर पर हाइड्रोसील नवजात शिशुओं में ही देखने को मिलती है, लेकिन आजकल यह समस्या हर उम्र के व्यक्तियों में देखना को मिल रही है।

उनमें यह समस्या मुख्य रूप से किसी चोट या संक्रमण के कारण हो सकती है।


 

हाइड्रोसील कितने प्रकार की होती हैं? (Types of Hydrocele in Hindi)

 

 

हाइड्रोसील मुख्य रूप से 2 प्रकार की होती हैं, जो निम्नलिखित हैं-

 

 

  1. कम्युनिकेटिंग हाइड्रोसील- जब अंडकोष की थैली पूरी तरह बंद नहीं होती है और इसके साथ में अंडकोष में सूजन भी हो जाती है, तो उस स्थिति को कम्युनिकेटिंग हाइड्रोसील (Communicating Hydrocele) कहा जाता है।

    यह समस्या मुख्य रूप से उस व्यक्ति को हो सकती है, जो हर्निया से पीड़ित होता है।


     

  2. नॉनकम्युनिकेटिंग हाइड्रोसील- यह हाइड्रोसील का अन्य प्रकार है, जो उस स्थिति में होती है, जब अंडकोष की थैली बंद होती है और शेष द्रव शरीर में जमा नहीं हो पाता है।

    नॉनकम्युनिकेटिंग हाइड्रोसी (Non Communicating Hydrocele) की समस्या मुख्य रूप से नवजात शिशुओं में देखने को मिलती है, जो एक साल के भीतर ही ठीक हो जाती है।

 

 

हाइड्रोसील के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Hydrocele in Hindi)

 

 

हाइड्रोसील के मुख्य रूप से कई सारे लक्षण होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

 

 

  • अंडकोष में दर्द होना- यह हाइड्रोसील का प्रमुख लक्षण है, जिसमें पुरूष के अंडकोष (Testicle) में अचानक से दर्द होता है।

    कई बार यह दर्द पानी पीने या अन्य उपाय को करने से कम हो जाता है, लेकिन कुछ समय बाद यह दर्द फिर से होने लगता है और उस स्थिति में पुरूष को दर्द-निवारक दवाई लेने की जरूरत होती है।


     

  • अंडकोष में सूजन होना- हाइड्रोसील का अन्य लक्षण अंडकोष में सूजन होना होता है। इस स्थिति में पुरूष के अंडकोष का आकार बढ़ जाता है।

     

  • चलने में तकलीफ होना- यदि किसी व्यक्ति को चलने फिरने में तकलीफ होती है, तो उसे तुंरत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि यह हाइड्रोसील के होने का संकेत हो सकता है।

     

  • बैठने में मुश्किल होना- जब हाइड्रोसील की समस्या काफी बढ़ जाती है, तो पुरूष को बैठने में भी तकलीफ होती है।

     

  • अंडकोष के आकार का बढ़ना- कई बार ऐसा देखा गया है कि हाइड्रोसील से पीड़ित पुरूष के अंडकोष का आकार बढ़ जाता है, ऐसा मुख्य रूप से अंडकोष में सूजन होने के कारण होता है।

 

 

हाइड्रोसील के कारण क्या हैं? (Causes of Hydrocele in Hindi)

 

 

हाइड्रोसील की समस्या कुछ विशेष स्थितियों में ही होती है, जो इस प्रकार हैं-

 

 

  1. गर्भावस्था के अंतिम पड़ाव में किसी समस्या का होना- कई बार हाइड्रोसील की समस्या जन्म से पहले ही हो जाती है।

    यह समस्या उस स्थिति में उत्पन्न होती है, जब किसी महिला को गर्भावस्था के अंतिम पड़ाव में किसी तरह की परेशानी हो जाती है।


     

  2. हर्निया का होना- हाइड्रोसील की समस्या उस पुरूष को हो सकती है, जो हर्निया से पीड़ित होता है।

    हर्निया पुरूषों को होने वाली अन्य बीमारी है, जिसमें उसके शरीर का कोई अंग उभर जाता है, तब उसे हाइड्रोसील की समस्या हो सकती है।


     

  3. आनुवंशिकी कारण का होना- यह समस्या कई बार आनुवंशिकी की वजह से भी हो सकती है।

    अन्य शब्दों में यदि किसी पुरूष के परिवार में अन्य व्यक्ति इस समस्या से पीड़ित है, तो यह समस्या उसे भी हो सकती है।


     

  4. अंडकोष में चोट का लगना- कई बार ऐसा देखा गया है कि यह समस्या उस स्थिति में भी हो सकती है, जब किसी व्यक्ति के अंडकोष में चोट लग जाए।

    अंडकोष में चोट लगने की वजह से वह कमज़ोर हो जाता है और उसकी कार्यक्षमता भी कम हो जाती है।


     

  5. प्रोस्टेट कैंसर का होना- यदि किसी पुरूष को प्रोस्टेट कैंसर की समस्या है, तो उसे हाइड्रोसील होने की अधिक संभावना रहती है।

    इसी कारण इस समस्या की जांच करते समय प्रोस्टेट कैंसर के होने का भी पता लगाया जाता है।

 

 

हाइड्रोसील का उपचार कैसे किया जा सकता है? (Hydrocelectomy Surgery in Hindi)

 

 

आमतौर पर, हाइड्रोसील को एक लाइलाज बीमारी समझा जाता है और इसी कारण इससे पीड़ित अधिकांश पुरूष इससे निजात नहीं पा पाते हैं, लेकिन यदि उन्हें यह पता हो कि वे हाइड्रोसीलोक्टोमी (Hydrocelectomy) नामक सर्जरी के माध्यम से हाइड्रोसील का उपचार करा सकते हैं, तो शायद वे भी बेहतर ज़िदगी जी पाएं।

कोई भी डॉक्टर इस सर्जरी को कराने की सलाह मुख्य रूप से उसी स्थिति में देते हैं, जब किसी व्यक्ति को किसी अन्य तरीकों जैसे हाइड्रोसील का होम्योपैथिक इलाज, हाइड्रोसील का घरेलू उपचार इत्यादि से आराम नहीं मिलता है।

 

 

हाइड्रोसीलोक्टोमी को कैसे किया जाता है? (Procedure of Hydrocelectomy in Hindi)

 

 

जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि हाइड्रोसील का उपचार हाइड्रोसीलोक्टोमी के द्वारा किया जाता है, इस सर्जरी में कुछ स्टेप शामिल होते हैं, जो इस प्रकार हैं-


 

  • स्टेप 1: एनेस्थीसिया देना- हाइड्रोसीलोक्टोमी सर्जरी की शुरूआत व्यक्ति को एनेस्थीसिया देने के साथ होती है।

    उसे एनेस्थीसिया इसलिए दिया जाता है, ताकि वह पूरी प्रक्रिया के दौरान बेहोश रहे और उसे इस दौरान किसी तरह का दर्द महसूस न हो।


     

  • स्टेप 2: मुंह में ट्यूब को डालना- व्यक्ति को एनेस्थीसिया देने के बाद सर्जन उसके मुंह में ट्यूब को डालते हैं।

    यह ट्यूब व्यक्ति को सांस लेने और इस सर्जरी को बेहतर तरीके से करने में सहायता करती है।


     

  • स्टेप 3: पेट पर कट लगाना- व्यक्ति के मुंह में ट्यूब को डालने के बाद सर्जन उसके पेट पर कट लगाते हैं।

    इस दौरान डॉक्टर काफी छोटे कट लगाते हैं, ताकि उस व्यक्ति में अधिक मात्रा में रक्तस्राव (Bleeding) होने का जोखिम न हो।


     

  • स्टेप 4: सक्शन मशीन का उपयोग करना- पेट पर कट को लगाने के बाद सक्शन मशीन का उपयोग किया जाता है।

    सक्शन मशीन के माध्यम से हाइड्रोसील को पेट से बाहर निकाला जाता है।


     

  • स्टेप 5: कट को टांकों से बंद करना- पेट से हाइड्रोसील को निकालने के बाद सर्जन व्यक्ति के पेट पर लगाए गए कट को टांकों से बंद कर देते हैं।

    टांके लगाने के साथ ही यह प्रक्रिया समाप्त हो जाती है और व्यक्ति सुधार कक्ष (Recovery Room) में ले जाया जाता है।


 

दिल्ली-NCR में हाइड्रोसील के इलाज का खर्च क्या है? (Cost Of Hydrocele in Hindi)

 

 

जब बात हाइड्रोसील का इलाज कराने की आती है, तो इसके लिए दिल्ली-NCR सबसे बेहतर जगह है।

भारत की राजधानी होने के कारण यहां पर हाइड्रोसील का इलाज कराने के सर्वोत्तम अस्पताल/क्लीनिक मौजूद हैं।


चूंकि, ज्यादातर लोग हाइड्रोसील के इलाज को एक महंगी प्रक्रिया समझते हैं, इसी कारण वे इसका बेहतर इलाज नहीं करा पाते हैं, लेकिन यदि उन्हें यह पता होता कि यह एक किफायती प्रक्रिया है, जिसका खर्च मात्र 80,000 से 90,000 रूपये ही होता है, तो उन्हें भी इस समस्या से निजात मिल जाती।


 

हाइड्रोसील के उपचार का खर्चा मुख्य रूप से कई सारे तत्वों पर निर्भर करता है, जो इस प्रकार हैं-


 

  • हाइड्रोसील के प्रकार- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि हाइड्रोसील 2 प्रकार ( अर्थात् कम्युनिकेटिंग हाइड्रोसील और नॉनकम्युनिकेटिंग हाइड्रोसील) के होते हैं, तो इन दोनों हाइड्रोसील का खर्च अलग-अलग होता है।

    इसी कारण डॉक्टर हाइड्रोसील का उपचार करने से पहले इस बात का पता लगाते हैं कि कोई व्यक्ति किस तरह के हाइड्रोसील से पीड़ित है।


     

  • व्यक्ति के स्वास्थ की स्थिति- हाइड्रोसील के उपचार का खर्च व्यक्ति के स्वास्थ की स्थिति पर भी काफी हद तक निर्भर करता है।

     

  • अस्पताल- इस समस्या का खर्च इस बात पर भी काफी हद तक निर्भर करता है, कि इसे किस अस्पताल में किया जाना है।

    इसी कारण किसी भी पुरूष को इसे कराने से पहले अस्पताल का चयन काफी सोच-समझकर करना चाहिए।


     

  • इलाज का तरीका- हाइड्रोसील का खर्च इसे करने के तरीके पर भी काफी हद तक निर्भर करता है।

    इसी कारण व्यक्ति को इस बात का पता लगाना चाहिए कि उसका इलाज किस तरीके से किया जाना है।

 

 

हाइड्रोसील के जोखिम क्या होते हैं? (Side-Effects of Hydrocele in Hindi)

 

 

हाइड्रोसील का इलाज यदि समय रहते न किया जाए तो यह घातक रूप ले सकती है और इसके कुछ जोखिम भी हो सकते हैं।
 


हाइड्रोसील के मुख्य रूप से 5 जोखिम होते हैं, जो इस प्रकार हैं-


 

  1. लाल निशान का पड़ना- हाइड्रोसील के लंबे समय तक लाइलाज रहने पर व्यक्ति के शरीर में लाल निशान पड़ सकते हैं।

    ये निशान उसे असहज महसूस करा सकते हैं, जिसकी वजह से उसे मेडिकल सहायता लेनी पड़ सकती है।


     

  2. अंडकोष के दर्द में इज़ाफा होना- कई बार ऐसा भी देखा गया है कि हाइड्रोसील का इलाज न होने पर अंडकोष का दर्द बढ़ सकता है।

    इस स्थिति में दर्द इतना असहनीय हो सकता है कि उस पुरूष को दर्द निवारक दवाईयां लेने की जरूरत पड़ सकती है।


     

  3. अंडकोष में सूजन होना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि हाइड्रोसील का एक लक्षण अंडकोष में सूजन भी होता है।

    यह समस्या हाइड्रोसील का उपचार न होने की स्थिति में भी बनी रह सकती है।


     

  4. बुखार होना - यदि किसी व्यक्ति ने हाल ही में हाइड्रोसीलोक्टोमी सर्जरी कराई है, तो उसे इस सर्जरी के बाद बुखार हो सकता है।

    हालांकि, कुछ समय के बाद बुखार ठीक हो जाता है, लेकिन यदि लंबे समय तक रहता है, तो तुंरत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।


     

  5. अत्याधिक रक्तस्राव होना- हाइड्रोसीलोक्टोमी के बाद कुछ लोगों को अधिक मात्रा में रक्तस्राव हो जाता है।

    ऐसी स्थिति में डॉक्टर इसे रोकने की कोशिश करते हैं, क्योंकि रक्तस्राव होने पर व्यक्ति के शरीर में खून की कमी हो सकती है।

 

 

हाइड्रोसील की रोकथाम कैसे की जा सकती है? (Preventions of Hydrocele in Hindi)

 

 

हालांकि, हाइड्रोसील की समस्या जन्म से पहले ही हो जाती है, इसी कारण ज्यादातर लोग ऐसा सोचते हैं कि वे इससे बच नहीं सकते हैं।

लेकिन उनका ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है क्योंकि किसी भी अन्य समस्या की तरह हाइड्रोसील की भी रोकथाम की जा सकती है।


यदि कोई पुरूष हाइड्रोसील से पीड़ित है तो वे निम्नलिखित सावधानियों को बरतकर हाइड्रोसील को बढ़ने से रोक सकता है-


 

  • भारी चीजों को न उठाना- हाइड्रोसील से पीड़ित पुरूष को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए और उसे भारी चीजों को नहीं उठाना चाहिए क्योंकि इसका बुरा असर उसके अंडकोष पर पड़ सकता है।

     

  • वजनदार व्यायाम न करना- इस समस्या से पीड़ित पुरूष को हल्के-फुल्के व्यायाम ही करने चाहिए क्योंकि ये ही उसकी सेहत के लिए सही होते हैं।

     

  • सर्जरी के 6 महीनों तक यौनिक गतिविधियां न करना- यदि किसी पुरूष ने हाल ही में हाइड्रोसीलोक्टोमी कराई है, तो उसे लगभग 6 महीनों तक यौनिक गतिविधियां नहीं करनी चाहिए क्योंकि इसका बुरा असर उसके गुप्त अंग पर पड़ सकता है।

     

  • ड्राइव न करना- हाइड्रोसील का उपचार कराने के बाद पुरूष को सामान्य गतिवधियां (ड्राइव करना) नहीं करनी चाहिए।

    ऐसा करना उसकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।


     

  • दवाई लेना- हाइड्रोसील की रोकथाम करने के लिए व्यक्ति को समय-समय पर दवाई लेनी चाहिए।

    ये दवाईयां उसके शरीर में हाइड्रोसील को रोकने में सहायक साबित होती हैं।


     

  • डॉक्टर के संपर्क में रहना- इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टर के संपर्क में तब तक रहना चाहिए, जब तक वे उसे पूरी तरह से सेहतमंद घोषित न कर दें।



 

जैसा कि हम सभी यह जानते हैं कि आज के दौर में बहुत सारी समस्याएं फैल रही हैं। उनमें हाइड्रोसील (Hydrocele) भी शामिल हैं, जो अधिकांश पुरूषों में देखने को मिलती हैं।
 

चूंकि, हाइड्रोसील की शुरूआत में इसके लक्षणों का पता नहीं चलता है, इसी कारण वे इस ओर ध्यान नहीं दे पाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद जब यह बढ़ जाती है, तब उन्हें इसकी परेशानियों का पता चलता है।

इस स्थिति में उनके लिए सर्जरी कराना ही एकमात्र विकल्प बचता है।

चूंकि, उन्हें इस सर्जरी की अधिक जानकारी नहीं होती है, इसी कारण उन्हें इस समस्या से निजात नहीं मिल पाता है।

 

इस प्रकार हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित हुआ होगा क्योंकि हमने इस लेख में हाइड्रोसील की पूर्ण जानकारी देने की कोशिश की है।

यदि आप या आपकी जान-पहचान में कोई पुरूष स्वास्थ संबधी किसी भी समस्या और उसके उपचार के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहता है तो वह इसके लिए 95558-12112 पर Call करके इसकी मुफ्त सलाह प्राप्त कर सकता है।