एचआईवी एड्स: लक्षण,कारण, उपचार इत्यादि (HIV AIDS in Hindi)

एचआईवी एड्स (HIV AIDS) को काफी हेय की दृष्टि से देखा जाता है और इसी कारण कोई भी  व्यक्ति इसके बारे में खुलकर बात करने से बचता है। इसी वजह से इसके मरीजों की तादात काफी तेज़ी से बढ़ रही है। द वर्ल्ड बैंक की वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 2.40 मिलियन लोगों को एचआईवी एड्स है। ये आंकडे एड्स की भयावह स्थिति को बयां करने के लिए काफी हैं,लेकिन फिर भी यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण चीज है कि लोगों इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं। लोगों के मन में इस बीमारी को लेकर काफी सारी गलतफहमियां होती हैं और वे इसे एक लाइलाज बीमारी समझते हैं। इसी कारण वे आसानी से इसका शिकार बन जाते हैं।

अत: यह जरूरी है कि लोगों में इसके प्रति जागरूकता को बढ़ाया जाए ताकि वे इसे लेकर सतर्क रहें और यदि उन्हें कभी यह बीमारी हो जाए तो वे इसका इलाज सही तरीके से करा सकें। यदि आप भी एचआईवी एड्स की पूर्ण जानकारी से वंचित हैं तो आपको इस लेख को अंत तक पढ़ना चाहिए क्योंकि इसमें हमने इसके बारे में आवश्यक जानकारी देने की कोशिश की है।

क्या है एचआईवी एड्स? (What is HIV AIDS in Hindi)

एचआईवी एड्स से तात्पर्य ऐसी बीमारी से है, जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के कारण होती है। इसके अलावा यह बीमारी ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) की वजह से भी होती है, जिसका असर व्यक्ति की रोग-प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है।

हालांकि, अब तक एचआईवी एड्स के इलाज का कोई सर्वोत्तम तरीके का पता नहीं चला है लेकिन, इसके बावजूद यह राहत की बात है कि ऐसी बहुत सारी दवाईयां, जिनकी सहायता से एचआईवी एड्स के प्रभाव  को कम किया जा सकता है।

एचआईवी एड्स के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of HIV AIDS in Hindi)

किसी भी अन्य बीमारी की तरह एचआईवी एड्स के भी कुछ लक्षण होते हैं, जो उसकी शुरूआत के संकेत देते हैं।​​​​​​​ अत:यदि किसी व्यक्ति को ये 5 लक्षण नज़र आते हैं, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और अपने स्वास्थ की अच्छी तरह से जांच करानी चाहिए-

  1. बुखार होना- यह एचआईवी एड्स का प्रमुख लक्षण है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार बुखार होता है।

    आमतौर पर, बुखार को सामान्य समस्या समझकर उसे नज़रअदाज़ कर दिया जाता है, लेकिन, कई बार बुखार का लंबे समय तक रहना किसी गंभीर बीमारी का लक्षण हो सकता है।

  2. सिरदर्द होना- एचआईवी एड्स का अन्य लक्षण सिरदर्द होना भी है। कई बार इसे तनाव या थकान के परिणाम के रूप में देखा जाता है और इसके लिए सिरदर्द की गोली या फिर आराम करने जैसे उपायोंं को अपनाया जाता है।

    लेकिन, जब सिरदर्द में आराम किसी भी तरीके से नहीं मिलता है तो व्यक्ति को डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि यह माइग्रेन या एचआईवी एड्स जैसी गंभीर समस्या का लक्षण हो सकता है।

  3. त्वचा पर चकत्ते का होना- एचआईवी एड्स का असर त्वचा पर भी पड़ता है और इसकी वजह से त्वचा के रंग में बदलाव होने के साथ-साथ उस पर दब्बे या चकत्ते इत्यादि समस्याएं भी होती हैं।

    यदि कोई व्यक्ति ऐसी किसी समस्या से पीड़ित है, तो उसकी तुरंत उसकी जांच करानी चाहिए ताकि इसे समय तक काबू में किया जा सके और इसके साथ में एचआईवी एड्स की संभावना को भी किया जा सके।

  4. गले में खराश होना- अक्सर, ऐसा देखा गया है कि एचआईवी एड्स से पीड़ित लोगों को इसकी शरूआत में गले की खराश की शिकायत रहती है।

    अत: यदि किसी शख्स के गले में अचानक से खराश होने लगी है और उसमें किसी उपाय से  आराम नहीं मिल रहा है तो उसे इसकी जांच अच्छी तरह से करानी चाहिए।

  5. पेट में दर्द होना– एचआईवी एड्स का अन्य लक्षण पेट में दर्द होना भी है। हो सकता है कि अधिकांश लोगों को इस पर विश्वास न हो।

    लेकिन, एचआईवी एड्स के ऐसे बहुत सारे मामले देखने को मिले हैं, जिसकी शुरूआत पेट के  दर्द से हुई थी।

एचआईवी एड्स क्यों होता है? (Causes of HIV AIDS in Hindi)

आमतौर पर, ऐसा माना जाता है कि एचआईवी एड्स की बीमारी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने की वजह से होती है, लेकिन इसके कई अन्य कारण भी होते हैं, जिनकी जानकारी सभी लोगों को होनी चाहिए ताकि वे अपनी एवं अपने परिजनों की  रक्षा कर सकें।

किसी भी व्यक्ति को एचआईवी एड्स की बीमारी निम्नलिखित कारणोें से हो सकती है-

  • असुरक्षित तरीके से यौनिक गतिविधि करना- एचआईवी एड्स का प्रमुख कारण असुरक्षित तरीके से यौनिक गतिविधि करना है।

    ऐसा मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के शरीर में मौजूद बैक्टीरिया का किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश के कारण होता है।

  • खून को चढ़ाना- एचआईवी एड्स उस स्थिति में हो सकता है, जब किसी शख्स के शरीर में ऐसे खून को चढ़ा दिया जाता है, जिसमें किसी तरह के वायरस या बैक्टीरिया मौजूद होते हैं।

  • सामान्य सुईयों का इस्तेमाल एक से अधिक लोगों पर करना- अक्सर, डॉक्टर किसी व्यक्ति के बीमार होने पर उसे इंजेक्शन लगाने की सलाह देते हैं।

    ऐसी स्थिति में यदि किसी व्यक्ति को उसी सुई का इस्तेमाल किया जाता है, जिसका पहले किसी दूसरे शख्स पर भी किया जा चुका है तो ऐसा करना एचआईवी एड्स के होने का कारण बन सकता है।

  • गर्भवती होना- एचआईवी एड्स किसी भी शख्स (पुरूष और महिला दोनों) को हो सकता है।

    यदि महिला की बात की जाए तो उन्हें इस बीमारी के होने की संभावना तब अधिक रहती है, जब वे गर्भवती होती हैं।

  • स्तनपान कराना- महिला के अलावा एचआईवी एड्स की बीमारी उसके बच्चे को डिलीवरी या फिर स्तनपान के दौरान भी हो सकती है।

    इसी कारण, यदि हाल ही किसी महिला में किसी बच्चे को जन्म दिया है, तो उसे अपना एवं अपने बच्चे के स्वास्थ का विशेष ध्यान रखना चाहिए और उसका समय-समय पर टीकाकरण कराना चाहिए।

एचआईवी एड्स का इलाज कैसे करें? (Treatments of HIV AIDS in Hindi)

ऐसी आम धारणा है कि किसी व्यक्ति के एक बार एचआईवी एड्स का मरीज होने पर उसका ठीक  होना नामुमकिन है, लेकिन यदि लोगों को एचआईवी एड्स की पूर्ण जानकारी हो, तो वे इसका इलाज करा सकते हैं।

यदि किसी शख्स को एचआईवीएड्स की बीमारी है तो वह उपचार के इन 5 तरीकों से इससे निजात पा सकता है-

  1. ब्लड टेस्ट कराना- यह एचआईवी एड्स का इलाज करने का सबसे आसान तरीका है।

    ब्लड टेस्ट को करने का उद्देश्य मानवशरीर के खून में एचआईवी एड्स के विकास का पता लगाना है ताकि व्यक्ति का इलाज संभव हो सके।

  2. सलाइवा (लार) की जांच कराना- कई बार, एचआईवी एड्स का इलाज सलाइवा की जांच के द्वारा भी किया जाता है।

    सलाइवा की जांच को मुख्य रूप से मानव-शरीर में हार्मोन संतुलन का पता लगाने के लिए किया जाता है।

  3. एंटीबायोटिक दवाई लेना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है एचआईवी एड्स की बीमारी वायरस के कारण भी होती है।

    इसी कारण इसका इलाज एंटीबायोटिक दवाई के सेवन के द्वारा भी किया जाता है।

  4. फाइन नीडल एस्पिरेशन कराना- कई बार,एचआईवी एड्स का इलाज फाइन नीडल एस्पिरेशन के द्वारा भी किया जाता है।

    इस तकनीक के द्वारा मानव-शरीर में गांठ का पता लगाने के लिए किया जाता है।

  5. वायरल लोड कराना- जब एचआईवी एड्स से पीड़ित व्यक्ति को उपचार के किसी भी तरीके से आराम नहीं  मिलता है, तब डॉक्टर उसे वायरल लोड कराने की सलाह देते हैं।

    इस टेस्ट के द्वारा मानवशरीर में वायरस की गुणवता का पता लगाकर व्यक्ति का इलाज किया जाता है।

एचआईवी एड्स के जोखिम क्या हो सकते हैं? (Side-effects of HIV AIDS in Hindi)

चूंकि, भारतीय समाज में एचआईवी एड्स को कंलक की तरह माना जाता है और इससे पीड़ित लोगों के साथ शोचनीय बर्ताव किया जाता है। इसी कारण किसी व्यक्ति को एचआईवी एड्स के बारे में पता लगने पर वह इसकी सूचना डॉक्टर को नहीं देता है। हमारे समाज  एवं उस व्यक्ति का ऐसा रवैया एचआईवी एड्स को बढ़ने में सहायता करता है और  इसके कारण उसे निम्नलिखित जोखिमों का सामना करना पड़ता है-

  • मुंह में सूजन का होना- यह एचआईवी एड्स का प्रमुख लक्षण है, जिसमें व्यक्ति के मुंह में सूजन हो जाती है।

    ऐसा सलाइवा के असंतुलित होने के कारण होता है और यदि इसका इलाज सही समय पर न किया जाए तो फिर यह घातक  रूप ले सकता है।

  • लीवर या किडनी का खराब होना- यदि एचआईवी एड्स का इलाज लंबे समय तक न किया जाए तो इसका असर लीवर या किडनी पर पड़ता है और इसकी वजह से वे खराब हो जाते हैं।

  • टी.बी का होना- अक्सर, ऐसे मामले में देखने को मिले हैं, जब एचआईवी एड्स से पीड़ित लोगों को टी.बी की बीमारी हो जाती है।

    इस समस्या को टी.बी का इलाज करके नियंत्रण में किया जा सकता है।

  • कमजोरी महसूस होना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि एचआईवी एड्स का असर व्यक्ति की रोग-प्रतिरोधक क्षमता पर भी पड़ता है।

    इसी कारण यदि एचआईवी एड्स का इलाज न हो तो इसकी वजह से लोगों को कमजोरी महसूस हो सकती है।

  • मौत होना- यह एचआईवी एड्स का सबसे घातक जोखिम है, जिसकी वजह से शख्स की मौत भी हो सकती है।

    इसी कारण, एचआईवी एड्स से पीड़ित सभी लोगों को अपने स्वास्थ का विशेष ध्यान रखना चाहिए और जितना जल्दी हो एचआईवी एड्स का इलाज शुरू कराना चाहिए।

एचआईवी एड्स की रोकथाम कैसे करें? (Precautions of HIV AIDS  in Hindi)

एचआईवी एड्स की वजह बहुत सारे लोगों के अपमान सहने के कारण उनकी शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक क्षमता भी प्रभावित होती है। लेकिन, खुशी की बात यह है कि किसी भी अन्य बीमारी की तरह एचआईवी एड्स की भी रोकथाम संभव है।

अत: यदि कोई व्यक्ति इन 5 सावधानियों को अपनाए तो वह एचआईवी एड्स की संभावना को कम कर सकता है-

  1. हमेशा कंडोम का इस्तेमाल करना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि एचआईवी एड्स की बीमारी मुख्य रूप से असुरक्षित यौनिक गतिविधिया करने की वजह से होती है।

    इसी कारण सभी लोगों को पर्याप्त सुरक्षा अपनानी चाहिए और हमेशा कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए।

  2. साफ-सुथरी सुईयां का उपयोग करना- इसके अलावा, जब भी व्यक्ति इंजेक्शन लगवाने किसी डॉक्टर के पास जाए तो उन्हें हर बार नई सुईय का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

  3. गर्भावस्था में स्वास्थ का विशेष ध्यान रखना- चूंकि, एचआईवी एड्स गर्भवती महिलाओं को भी हो सकता है।

    इसी कारण सभी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान अपने स्वास्थ का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

  4. सफाई का ध्यान रखना- ऐसी बहुत सारी बीमारियां,जो गंदे वातावरण के कारण होती हैं, उनमें एचआईवी एड्स भी शामिल हैं।

    अत: सभी लोगों को सफाई को बनाए रखना चाहिए ताकि उसे किसी गंभीर बीमारी होने की संभावना न हो।

  5. डॉक्टर के संपर्क में रहना- यह सबसे महत्वपूर्ण चीज है जिसका पालन सभी लोगों को रखना चाहिए।

    यदि किसी व्यक्ति का एचआईवी एड्स का इलाज चल रहा है तो उसे तब तक डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए जब तक वे उसे पूरी तरह से सेहतमंद घोषित  न कर दें।

हालांकि, वर्तमान समय काफी आधुनिक है, जिसमें हमने हर क्षेत्र में विकास किया है। लेकिन, दूसरी ओर अब भी ऐसे कुछ विषय हैं, जिन पर हम खुलकर बात से करने से बचते हैं। उनमें एचआईवी एड्स (HIV AIDS) भी शामिल है, जिस पर कोई बात नहीं करना चाहता है और इसी का परिणाम होता है कि लोग काफी आसानी से इसका शिकार हो जाते हैं। इस स्थिति में वे इस बात से अनजान होते हैं कि वे इसका इलाज किस तरीके से करें। अत: यह जरूरी है कि इसके बारे में लोगों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी दी जाए ताकि वे इसका इलाज सही समय पर शुरू करा सकें।

इस प्रकार हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित हुआ होगा क्योंकि इसमें हमने एचआईवी एड्स (HIV AIDS) से संबंधित आवश्यक जानकारी देने की कोशिश की है।

यदि आप या आपकी जान-पहचान में कोई व्यक्ति स्वास्थ संबंधी किसी समस्या और  उसके उपचार के संभावित तरीकों की अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहता है तो वह इसके +91-8448398633 पर Call करके उसकी मुफ्त सलाह प्राप्त कर सकता है।

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