क्या है हीमोग्लोबिन, इसे कैसे बढ़ाएं? (Haemoglobin in Hindi)

हीमोग्लोबिन (Haemoglobin) के बारे में हम सभी ने कभी-न-कभी सुना ही होगा, लेकिन इसके बावजूद इस बात को कोई भी व्यक्ति नकार नहीं सकता है, हम सभी से कुछ लोगों को हीमोग्लोबिन की पूरी जानकारी नहीं है।
इसी कारण, जब किसी व्यक्ति को हीमोग्लोबिन की कमी का पता चलता है, तब उन्हें यह समझ में नहीं आता है कि वह इसे कैसे बढ़ाए।
ऐसा मुख्य रूप से इसके प्रति जागरूकता की कमी का नतीजा होता है। अत:यह जरूरी है कि लोगों में हीमोग्लोबिन की जागरूकता को बढ़ाना चाहिए।
यदि आप भी इसके बारे में अधिक जानकारी जानना चाहते हैं तो आपको इस लेख को ज़रूर पढ़ना चाहिए।

क्या है हीमोग्लोबिन? (What is Haemoglobin? In Hindi)

हीमोग्लोबिन से तात्पर्य ऐसे लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद ऐसे प्रोटीन से है, जो मानव शरीर के अंगों एवं टिशू में ऑक्सीजन पहुँचाता है और कॉर्बनडॉक्साइड को अंगों से फेफड़ों में पहुँचाता है।
यदि हीमोग्लोबिन टेस्ट में हीमोग्लोबिन लेवल कम की पुष्टि होने का अर्थ मानव शरीर में कम लाल रक्त कोशिकाओं का कम होना है।

हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए? (Normal level of Haemoglobin in Hindi)

पुरूष और महिलाओं के लिए हीमोग्लोबिन औसतन स्तर अलग होता है।
पुरूषों के लिए 13.5 से 17.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर और महिलाओं के लिए 12.0 से 15.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर को औसतन स्तर माना जाता है।

हीमोग्लोबिन की कमी के लक्षण – Symptoms of Haemoglobin deficiency in Hindi)

सभी लोगों के लिए हीमोग्लोबिन काफी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह उन्हें सेहतमंद रहता है।
लेकिन, कुछ लोगों का हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, जिसकी वजह से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
अत: किसी भी व्यक्ति को इन 5 लक्षणों को नज़रअदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि यह हीमोग्लोबिन की कमी के संकेत हो सकते हैं-

  • कमज़ोरी महसूस होना- हीमोग्लोबिन की कमी का प्रमुख लक्षण कमज़ोरी महसूस होना।
    आमतौर पर,बहुत सारे लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं क्योंकि उनकी नज़र कमज़ोरी अधिक काम करने या मेहनत करने इत्यादि का नतीजा मानते हैं।
    लेकिन, किसी भी व्यक्ति को किसी भी नतीजे से पहले डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए क्योंकि यह हीमोग्लोबिन की कमी का संकेत हो सकता है।
  • हाथ-पैरों का ठंडा पड़ना- हिमोग्लोबिन की कमी का लक्षण हाथ-पैरों का ठंडा होना भी हो सकता है।
    अत: इससे पीड़ित लोगों को इसकी सूचना अपने डॉक्टर को देनी चाहिए ताकि इसे जल्द से जल्द दूर किया जा सके।
  • सांस लेने में तकलीफ़ होना- यदि किसी व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ़ होती है, तो उसे इसे नज़रअदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि यह हीमोग्लोबिन की कमी का संकेत हो सकता है।
  • सिरदर्द होना- हीमोग्लोबिन की कमी का अन्य लक्षण सिरदर्द होना भी है।
    जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि हीमोग्लोबिन की शुरूआत कमज़ोरी महसूस होने के साथ हो सकती है।
    अत: इसमें सिरदर्द भी हो सकता है, जिसकी जांच कराना अत्यंत आवश्यक है ताकि हीमोग्लोबिन की कमी को समय रहते दूर किया जा सके।
  • स्कीन का पीला पड़ना- अक्सर, हीमोग्लोबिन की कमी का संकेत स्कीन का पीला होना भी हो सकता है।

हीमोग्लोबिन की कमी के कारण – (Causes of Haemoglobin deficiency in Hindi)

हालांकि, किसी भी व्यक्ति को हीमोग्लोबिन की कमी हो सकती है और इसे समय रहते ठीक न किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकती है।
हीमोग्लोबिन की कमी कई कारणों से हो सकती है, जिनमें प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

  • मानव-शरीर में खून की कमी का होना- हीमोग्लोबिन की कमी का प्रमुख कारण मानव-शरीर में खून की कमी का होना है।
    हालांकि, इस समस्या को दवाइयों या इलाज के अन्य तरीकों से ठीक किया जा सकता है, लेकिन फिर भी लोगों को खून की पर्याप्त मात्रा को बनाए रखना चाहिए।
  • बोन मैरो से पीड़ित होना- यदि कोई शख्स बोन मैरो से पीड़ित है, तो उसे हीमोग्लोबिन की कमी हो सकती है।
    इसी कारण, बोन मैरो का सही इलाज कराना काफी जरूरी होता है। 
  • विटामिन, कैल्शियम इत्यादि की कमी का होना- जैसा कि हम सभी यह जानते हैं कि मानव-शरीर में सभी तत्वों जैसे विटामिन, कैल्शियम इत्यादि का पर्याप्त मात्रा में होना बहुत जरूरी है क्योंकि यह लोगों को सेहतमंद रहने में सहायता करती है।
    यह बात हीमोग्लोबिन की कमी पर भी लागू होती है क्योंकि इस समस्या की ऐसे लोगों में होने की संभावना रहती है, जिनमें इनमें से किसी तत्वों की कमी होती है।
  • किडनी का खराब होना- हीमोग्लोबिन की कमी की समस्या ऐसे व्यक्ति को हो सकती है, जो किडनी के खराब होना (किडनी फेल्यियर) से पीड़ित है।
    ऐसे व्यक्ति को किडनी की बीमारी का इलाज कराना चाहिए ताकि उसे कोई गंभीर बीमारी न हो। 
  • मासिक धर्म के दौरान अधिक मात्रा में रक्तस्राव (बिल्डिंग) का होना- अक्सर, आपने ऐसा सुना होगा कि कुछ महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान अधिक मात्रा में रक्तस्राव होता है।
    हालांकि, वे ऐसा समझती हैं कि ऐसा मासिक धर्म के समय पर न होने के कारण हो सकता है।
    लेकिन, उन्हें किसी भी नतीजे पर पहुंचने की बजाय रक्तस्राव की जांच डॉक्टर से करानी चाहिए क्योंकि यह हीमोग्लोबिन की कमी का लक्षण हो सकता है।

हीमोग्लोबिन की कमी से होने वाले रोग – (Disease caused by Haemoglobin deficiency in Hindi)

हीमोग्लोबिन किसी भी व्यक्ति के लिए कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि उसके शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी काफी सारी बीमारियों का कारण बन सकता है।

यदि कोई शख्स हीमोग्लोबिन की कमी से पीड़ित है, तो उसे ये 3 बीमारियों का भी शिकार बन सकता है-

  • सिरोसिस का होना- अक्सर,हीमोग्लोबिन की कमी कई सारी गंभीर बीमारियों जैसे सिरोसिस का कारण बन सकता है।
  • ल्यूकेमिया का शिकार होना- हीमोग्लोबिन की कमी के ऐसे बहुत सारे मामले देखने को मिलते हैं, जिनमें ल्यूकेमिया हो सकता है।
  • यूरीन इंफेक्शन का होना- हीमोग्लोबिन का इलाज समय रहते न करने पर यह यूरीन इंफेक्शन की वजह भी बन सकता है।
  • दिल संबंधी बीमारियों का होना- यदि कोई व्यक्ति हीमोग्लोबिन की कमी का शिकार है, तो उसमें दिल संबंधी बीमारियाँ होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। 
  • अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार होना- इन दिनों हीमोग्लोबिन की कमी के ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें हीमोग्लोबिन की कमी अवसाद (डिप्रेशन) का कारण बन जाता है।

हीमोग्लोबिन की कमी का परीक्षण – (Diagnosis of Haemoglobin deficiency in Hindi)

हालांकि, मानव-शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होना कई सारी बीमारियों का कारण बन सकता है, लेकिन इसके बावजूद राहत की बात यह है कि यदि इसका परीक्षण समय रहते किया जाए तो हीमोग्लोबिन की कमी को दूर किया जा सकता है।
हीमोग्लोबिन की कमी का परीक्षण निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकता है-

  • ब्लड टेस्ट करना- हीमोग्लोबिन की कमी का परीक्षण ब्लड टेस्ट के द्वारा संभव है।
    इस टेस्ट के द्वारा मानव-शरीर में हीमोग्लोबिन की स्थिति का पता लगाया जाता है और फिर उसके अनुसार आगे का इलाज किया जाता है।
  • एक्स-रे कराना- ब्लड टेस्ट करने के अलावा एक्स-रे से भी हीमोग्लोबिन की कमी का पता लगया जा सकता है।
  • अल्ट्रासाउंड कराना- अक्सर, डॉक्टर अल्ट्रासाउंड से भी हीमोग्लोबिन की कमी का परीक्षण करते हैं। 
  • सी.टी स्कैन करना- यदि डॉक्टर को किसी व्यक्ति में हीमोग्लोबिन की कमी की शंका होती है, तो वे इसे सी.टी स्कैन करके भी दूर सकते हैं।
  • एम.आर.आई कराना- कई बार, हीमोग्लोबिन की कमी के परीक्षण में एम.आर. आई कराना भी उपयोगी साबित हो सकता है।

हीमोग्लोबिन की कमी का इलाज – (Treatment of Haemoglobin deficiency in Hindi)

जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि हीमोग्लोबिन का परीक्षण काफी सारे तरीकों से किया जा सकता है, तो उसके बाद इसका इलाज कराना भी संभव हो जाता है।
यदि कोई व्यक्ति हीमोग्लोबिन की कमी से पीड़ित है, तो वह इन 5 तरीकों से इलाज करा सकता है-

  • खान-पान में बदलाव करना- हीमोग्लोबिन की कमी का इलाज करने का सबसे आसान तरीका खान-पान में बदलाव करना है।
    हेल्थी डाइट अपनाने से मानव-शरीर में हीमोग्लोबिन की बढ़ोतरी होती है और व्यक्ति की सेहत में सुधार होता है।
  • एक्सराइज़ करना- खान-पान के अलावा हीमोग्लोबिन की कमी का इलाज एक्सराइज़ से भी संभव है।
    एक्सराइज़ हीमोग्लोबिन की कमी से पीड़ित शख्स में रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक साबित होती है। 
  • दवाई लेना- किसी भी अन्य बीमारी की तरह हीमोग्लोबिन की कमी का इलाज भी दवाइयों से संभव है।
    इसी प्रकार, हीमोग्लोबिन की कमी से पीड़ित व्यक्ति डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का सेवन करके इससे छुटकारा पा सकता है।
  • सप्लीमेंट लेना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि हीमोग्लोबिन की कमी मानव-शरीर में विटामिन, कैल्शियम इत्यादि जैसे तत्वों की कमी के कारण भी हो सकती है।
    इसी कारण, इसका इलाज ऐसे सप्लीमेंटों का सेवन करके भी किया जा सकता है, जिनमें ये तत्व अधिक मात्रा में मौजूद हो।
  • विटामिन बी के इंजेक्शन लगाना- सप्लीमेंट लेने के अलावा हीमोग्लोबिन की कमी का इलाज विटामिन बी के इंजेक्शन को लाकर भी किया जा सकता है।
    ये इंजेक्शन मानव-शरीर में विटामिन बी की कमी को पूरे करकर हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करते हैं।

हीमोग्लोबिन की कमी से बचाव – (How to prevent Haemoglobin deficiency in Hindi)

हालांकि, किसी भी व्यक्ति को हीमोग्लोबिन की कमी हो सकती है।
जिसकी वजह से उसे काफी सारी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।

इन सबके बावजूद राहत की बात यह है कि यदि लोग निम्नलिखित चीज़ों का पालन करें तो वह हीमोग्लोबिन की कमी से बचाव कर सकते हैं-

  • हेल्थी भोजन करना- ऐसा माना जाता है कि हमारे खान-पान का हमारी सेहत पर काफी गहरा असर पड़ता है।
    यह बात हीमोग्लोबिन की कमी पर भी लागू होती है।
    इसी कारण, हीमोग्लोबिन की कमी से बचाव में हेल्थी भोजन करना काफी उपयोगी उपाय साबित हो सकता है।
  • समय-समय पर हेल्थचेकअप कराना- चूंकि, वर्तमान समय में काफी सारी बीमारियाँ फैल रही हैं।
    इसी कारण, हम सभी लोगों के लिए समय-समय पर हेल्थचेकअप कराना काफी महत्वपूर्ण बन गया है।
    यह बात हीमोग्लोबिन की कमी पर भी लागू होती है, इसलिए इससे बचाव हेल्थचेकअप करवाकर किया जा सकता है।
  • सही समय पर जगना एवं सोना- हालांकि, आज के बिज़ी शेड्यूल में किसी भी व्यक्ति के लिए सही समय पर जगना एवं सोना काफी मुश्किल है।
    मगर, यदि वे टाइम मैनेजमेंट करें तो वे इस आदत को अपना सकते हैं और हीमोग्लोबिन की कमी जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव कर सकते हैं।
  • डॉक्टर के संपर्क में रहना- यह सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है, जिसका पालन सभी लोगों को रखना चाहिए।
    यदि किसी व्यक्ति का हीमोग्लोबिन की कमी का इलाज चल रहा है तो उसे तब तक डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए जब तक वे उसे पूरी तरह से सेहतमंद होने की पुष्टि न कर दें।

हीमोग्लोबिन की कमी में क्या खाना चाहिए? – (What to eat during Haemoglobin deficiency in Hindi?)

हीमोग्लोबिन की कमी से पीड़ित व्यक्ति के मन में यही सवाल आता है कि वह इस दौरान किस तरह का भोजन कर सकता है क्योंकि यदि वह अनहेल्थी भोजन करता है, तो यह उसकी सेहत को और भी खराब कर सकता है।
अत: यदि आप या आपकी जान-पहचान में व्यक्ति हीमोग्लोबिन की कमी से पीड़ित है तो उसे अपने खान-पान का विशेष ध्यान देना चाहिए और ऐसा ही भोजन करना चाहिए, जो इन 5 तत्वों से भरपूर हो-

  • विटामिन सी से भरपूर भोजन- हीमोग्लोबिन की कमी में विटामिन सी से भरपूर भोजन जैसे संतरा, नींबू, की वी, अमरूद इत्यादि को खाना लाभदायक साबित होता है।
  • पत्तेदार सब्ज़ियाँ- हीमोग्लोबिन की कमी में विटामिन सी से भरपूर भोजन के अलावा पत्तेदार सब्ज़ियाँ जैसे पालक, गोभी इत्यादि खाना भी सेहतमंद होता है।
  • अनार या केला- हीमोग्लोबिन की कमी को अनार या केले जैसे फलों को भी खाया जा सकता है।
    ये फल हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करने में सहायक साबित हो सकता है। 
  • लाल सब्ज़ियाँ या फल- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि हीमोग्लोबिन की कमी होना खून की कमी की वजह से भी हो सकती है।
    इसी कारण, हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करने के लिए लाल सब्जियों जैसे चकदूर को खाया जा सकता है।
  • ड्राई फ्रूड्स- हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करने में सब्जियों या फल के अलावा ड्राई फ्रूड्स को भी खाया जा सकता है।

हीमोग्लोबिन की कमी में किस तरह का भोजन नहीं करना चाहिए? (Foods to avoids in hemoglobin deficiency in Hindi)

जितना महत्वपूर्ण यह जानना है कि हीमोग्लोबिन की कमी किस तरह का भोजन करना चाहिए, उतना यह भी जानना है कि इस दौरान किस तरह का भोजन नहीं करना चाहिए।
इसी कारण, हीमोग्लोबिन की कमी से पीड़ित व्यक्ति को निम्नलिखित तरह का भोजन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह उसकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है-

  • चाय या कॉफी न पीना- यदि कोई शख्स हीमोग्लोबिन की कमी से पीड़ित है, तो उसे चाय या कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए।
    ये दोनों ही चीज़े उसके शरीर में कैफ़ीन की मात्रा को बढ़ा सकते हैं, जिससे उनकी सेहत को खराब कर सकती है।
  • डेयरी उत्पाद का सेवन न करना- हीमोग्लोबिन की कमी में डेयरी उत्पाद जैसे दूध, पनीर, मक्खन इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • टैनिन युक्त भोजन न करना- हीमोग्लोबिन की कमी में टैनिन युक्त भोजन जैसे अंगूर, कोर्न इत्यादि नहीं खाने चाहिए क्योंकि यह इसके स्तर को गिरा सकता है और इससे पीड़ित व्यक्ति की सेहत को खराब कर सकता है।
  • लस युक्त भोजन का परहेज करना- टैनिन के अलावा हीमोग्लोबिन की कमी के दौरान लस (gluten) से युक्त भोजन जैसे पास्ता का परहेज करना चाहिए।
  • फास्ट फूड न करना- जैसा कि कहा जाता है कि किसी भी व्यक्ति के लिए फास्ट फूड करना नुकसानदायक साबित हो सकता है।
    यह बात हीमोग्लोबिन की कमी पर भी लागू होती है इसलिए इससे पीड़ित व्यक्ति को फास्ट फूड नहीं करना चाहिए।

आज के दौर में, काफी सारी बीमारियाँ फैल रही हैं, जिनका समय रहते ठीक न किया जाए तो वे समय के साथ गंभीर रूप ले सकती हैं।
इनमें हीमोग्लोबिन की कमी भी शामिल है, जिसका असर व्यक्ति की रोग-प्रतिरोधक (immunity power) क्षमता पर पड़ता है।
अत: हम सभी हिमोग्लोबिन की कमी की जानकारी होनी चाहिए ताकि इसका सही इलाज किया जा सके।
इस प्रकार, हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को उपयोगी साबित हुआ होगा क्योंकि इसमें हीमोग्लोबिन की कमी से जुड़ी आवश्यक जानकारी दी है।

सबसे अधिक पूछे जाने वाले सवाल (FAQ’S)

Q1. हीमोग्लोबिन के कम होने का क्या अर्थ है?
Ans- आमतौर पर, हीमोग्लोबिन की कमी का अर्थ व्यक्ति का एनेमिया से पीड़ित होना है।

Q2. हीमोग्लोबिन को कैसे बढ़ाया जा सकता है?
Ans- हीमोग्लोबिन को बढ़ाने में आयरन से भरपूर भोजन मदद करते हैं।

Q3. क्या हीमोग्लोबिन मौत की वजह बन सकता है?
Ans- जी हां, हीमोग्लोबिन की कमी मौत की वजह बन सकता है क्योंकि इससे शरीर में सेहतमंद ब्लड सेल नहीं बनते हैं।

Q4. हीमोग्लोबिन के अधिक होने का क्या अर्थ है?
Ans- किसी व्यक्ति के शरीर में हीमोग्लोबिन के अधिक होने का अर्थ उसके शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई की कमी का होना है।

Q5. क्या एक्सराइज़ से हीमोग्लोबिन कम होता है?
Ans- हां, जी हर रोज़ एक्सराइज़ करने से हीमोग्लोबिन कम होता है।

Q6. क्या अधिक मात्रा में पानी पीने से हीमोग्लोबिन कम होता है?
Ans- जी हां, हीमोग्लोबिन को कम करना बेहतरीन तरीका अधिक मात्रा में पानी पीने है।

Q7. क्या हीमोग्लोबिन का कम होना कैंसर का लक्षण है?
Ans-  हीमोग्लोबिन की कमी मुख्य रूप से शरीर में खून की कमी का संकेत होता है, जो ब्लड कैंसर होने की संभावना को भी बढ़ता है।

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