फैटी लिवर: लक्षण, कारण, उपचार इत्यादि (Fatty Liver in Hindi)

Fatty liver in hindi

फैटी लिवर (Fatty Liver) की समस्या काफी तेज़ी से फैल रही है। हिंदुस्तान टाइम्स नामक समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार भारत में यह समस्या लगभग 70 मिलियन युवाओं में देखने को मिल रही है।

विश्व स्तर पर फैटी लिवर की समस्या कितनी तेज़ी से फैल रही है, इसका अदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि हर साल 19 अप्रैल को विश्व फैटी लिवर दिवस (World Fatty Liver Day) के रूप में मनाया जाता है।

ऐसा करने का प्रमुख उद्देश्य लोगों को इस लीवर की बीमारी के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे इसका सामना समझदारी से कर सकें और इसके साथ में वे इससे सावधान भी रहें।

इन प्रयासों के बावजूद यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अधिकांश लोगों को लिवर में फैट जमा होने की बीमारी की जानकारी नहीं है और इसी कारण वे काफी आसानी से इसका शिकार बन जाते हैं।

तो आइए, इस लेख के माध्यम से इस समस्या के बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं ताकि इसे बढ़ने से रोका जा सके।

क्या है फैटी लिवर? (What is Fatty Liver? in Hindi)

फैटी लिवर से तात्पर्य ऐसे लिवर रोग से है, जिसमें किसी व्यक्ति के लीवर में अधिक मात्रा में फैट जमा हो जाता है।

आमतौर पर, शरीर में सामान्य मात्रा में फैट का होना साधारण चीज होती है, लेकिन जब यह मात्रा अधिक हो जाती है, तो इसके कारण सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।

चूंकि, लिवर शरीर का दूसरा सबसे बड़ा अंग होता है, जो कई सारे महत्वपूर्ण कार्य जैसे हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन और पेय पदार्थ को ऊर्जा में बदलना एवं खून से नुकसानदायक पदार्थ को अलग करना इत्यादि करता है, इसी कारण जब इसमें अधिक मात्रा में फैट जमा हो जाता है तो उसका लिवर पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है और इसकी वजह से लिवर खराब भी हो सकता है।

फैटी लिवर कितने प्रकार के होता है? (Types of Fatty Liver in Hindi)

फैटी लिवर मुख्य रूप से 2 प्रकार का होता है, जो निम्नलिखित है-

  1. अल्कोहलिक फैटी लिवर- यह फैटी लिवर का साधारण प्रकार है, जो शराब पीने की शुरूआती स्थिति में उत्पन्न होता है।

    अल्कोहलिक फैटी लिवर (Alcoholic Fatty Liver) उस स्थिति में लिवर के खराब होने का कारण बन सकता है, जब कोई व्यक्ति निरंतर रूप से शराब का सेवन करता है।

  2. नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर- यह इस लिवर की बीमारी का अन्य प्रकार है, जो लिवर में सूजन का कारण बनता है।

    नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर (Non- Alcoholic Fatty Liver) कई सारे अन्य कारणों जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप इत्यादि के कारण होता है और इससे अधिकतर लोग पीड़ित होते हैं।

फैटी लिवर के कितने चरण हैं? (Stages of Fatty Liver in Hindi)

फैटी लिवर के 4 चरण होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  1. स्टीटोसिस- यह इस बीमारी का सबसे सामान्य और आरंभिक चरण होता हैं, जिसे सिम्पल फैटी लिवर (Simple Fatty Liver) के नाम से जाना जाता है।

    इस स्थिति में लिवर के आस-पास अधिक मात्रा में फैट जमा हो जाता है, जिसकी पहचान केवल मेडिकल टेस्टों के द्वारा ही किया जा सकता है।

  2. स्टीटोहेपेटाइटिस- यह इस बीमारी का गंभीर चरण है, जिसे नॉन अल्कोहलिक स्टीटोहेपटाइटिस (Non- Alcoholic steatohepatitis) के नाम से भी जाना जाता है।

    इस समस्या में लिवर के आस-पास सूजन हो जाती है और इस स्थिति में व्यक्ति को मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ती है।

  3. फाइब्रोसिस- जब लिवर में सूजन के कारण लिवर और उसके आस-पास रक्त वाहिकाओं के अधिक टिशू का निर्माण हो जाता है, लेकिन इसके बावजूद वह सामान्य रूप से कार्य करता रहता है, तो उस स्थिति को फाइब्रोसिस (fibrosis) के नाम से जाना जाता है।

  4. सिरोसिस- यह फैटी लिवर का सबसे घातक चरण होता है, जिसमें लिवर सिकुड़ जाता है और इसकी वजह से वह खराब हो जाता है।

यदि कोई व्यक्ति सिरोसिस (cirrhosis) की अवस्था तक पहुंच जाता है, तो उसके लिए लिवर ट्रांसप्लांट की एकमात्र विकल्प बचता है।

फैटी लिवर के लक्षण क्या होते हैं? (Symptoms of Fatty Liver in Hindi)

संभवत: कुछ लोगों को इस बीमारी की शुरूआत का पता न चले और फिर उन्हें इस बात का भी अफसोस हो कि यदि वे समय रहते इसके लक्षणों पर ध्यान देते, शायद वे भी इससे निजात पा पातें।

आपको भी ऐसा अफसोस न हो, इसके लिए बेहतर है कि आप फैटी लिवर के लक्षणों की जानकारी प्राप्त करें ताकि आप इसकी रोकथाम समय रहते कर सकें।

फैटी लिवर के मुख्य रूप से कुछ लक्षण होते हैं, जो इसकी शुरूआत होने के संकेत देते हैं, उनमें से मुख्य इस प्रकार हैं-

  • पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होना- यह इस लिवर  की बीमारी का प्रमुख लक्षण होता है, जिसमें व्यक्ति के पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होता है।

    इस स्थिति में उसे दर्द निवारक दवाई लेने की भी जरूरत पड़ सकती है।

  • वजन में कमी का होना- यदि किसी व्यक्ति का वजन काफी तेज़ी से कम होता है, तो उसे इसकी जांच डॉक्टर से करानी चाहिए क्योंकि यह फैटी लिवर का लक्षण हो सकता है।

  • त्वचा और आंखों का पीला होना- कई बार लिवर में फैट के जमा होने की समस्या उस स्थिति में भी हो जाती है, जब किसी व्यक्ति की त्वचा और आंखों का रंग पीला हो जाता है।

    इस स्थिति में व्यक्ति को अपने स्वास्थ की जांच करानी चाहिए ताकि इस बात की पुष्टि हो सके कि उसे फैटी लिवर की समस्या नहीं है।

  • पेट पर सूजन का होना- यह समस्या होने पर कुछ लोगों को पेट में दर्द होने के साथ-साथ वहां पर सूजन भी हो जाती है।

    इसी कारण किसी भी व्यक्ति को पेट पर सूजन होने पर, इसकी सूचना डॉक्टर को देनी चाहिए।

  • हथेलियों का लाल पड़ना- अक्सर, फैटी लिवर होने पर लोगों की हथेलियों में बदलाव होता है और उसका रंग लाल हो जाता है।

    यदि किसी व्यक्ति को यह परिवर्तन नज़र आता है, तो उसे इसकी सूचना अपने डॉक्टर को देनी चाहिए ताकि वह इसकी जांच कर सके।

फैटी लिवर के कारण क्या हैं? (Causes of Fatty Liver in Hindi)

यह बीमारी कई सारे कारणों से हो सकती है, जिनमें से प्रमुख 5 कारण निम्नलिखित हैं-

  1. वजन का अधिक होना- इस लिवर की बीमारी होने की संभावना उन लोगों में अधिक रहती है, जिनका वजन अधिक होता है।

    इसी कारण ऐसे लोगों को वजन कम करने का प्रयास करना चाहिए और यदि उसे किसी तरीके से आराम नहीं मिल रहा है, तो उसे बेरियाट्रिक सर्जरी का सहारा लेना चाहिए।

  2. मधुमेह का होना- यदि कोई व्यक्ति मधुमेह या डायबिटीज का मरीज है तो उसे फैटी लिवर की बीमारी हो सकती है।

    ऐसे में इससे पीड़ित व्यक्ति को अपने मधुमेह को नियंत्रित करने की कोशिश करनी चाहिए।

  3. उच्च ब्लड शुगर लेवल का होना- अक्सर ऐसा देखा गया है कि यह बीमारी उन लोगों को अधिक होती है, जिनका ब्लड शुगर लेवल अधिक रहता है।

  4. खून में फैट की मात्रा का अधिक होना- लिवर में फैट के जमा होने की समस्या मुख्य रूप से उस स्थिति में होती है, जब किसी व्यक्ति के खून में फैट की मात्रा अधिक हो जाती है।

    इसी कारण किसी भी व्यक्ति को ऐसी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए, जिनमें फैट की मात्रा अधिक होती है।

  5. उच्च रक्तचाप का होना- फैटी लिवर की बीमारी होने की संभावना उच्च रक्तचाप वाले लोगों में अधिक रहती है।

फैटी लिवर का इलाज कैसे किया जा सकता है? (How Fatty Liver is treated? in Hindi)

यह प्रश्न हर उस व्यक्ति के लिए मायने रखता है, जो इस लिवर की बीमारी से इस पीड़ित होता है। उसे हमेशा उपचार के सर्वोत्तम तरीके की तलाश रहती है, जिसके माध्यम से वह इससे निजात पा सके।

यदि आप भी फैटी लिवर की समस्या से पीड़ित हैं, तो आप इसका इलाज निम्नलिखित तरीकों से माध्यम से कर सकते हैं-

  • देसी इलाज करना- इस लिवर की बीमारी में देसी इलाज काफी लाभदायक उपाय साबित हो सकता है।

    इस उपचार करने के लिए सिरके, नींबू, हल्दी, पपीते इत्यादि का सेवन किया जा सकता है।

  • ग्रीन टी पीना- फैटी लिवर का इलाज ग्रीन टी के माध्यम से भी किया जा सकता है।

    ग्रीन टी लिवर की कार्यक्षमता में सुधार करती है, इसलिए इसके सेवन से फैटी लिवर से छुटकारा पाया जा सकता है।

  • आयुर्वेदिक इलाज को अपनाना- लिवर में फैट जमा होने की बीमारी आयुर्वेदिक तरीके से भी किया जा सकता है।

    अत: इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति आयुर्वेदिक तरीके का भी सहारा ले सकता है।

  • होम्योपैथिक इलाज कराना- चूंकि, होम्योपैथिक के जोखिम काफी कम होते हैं, इसलिए बहुत सारे लोग विभिन्न बीमारियों का इलाज इसके द्वारा कराना चाहते हैं।

    यह तर्क फैटी लिवर के संदर्भ में भी लागू होता है, अत: इससे पीड़ित व्यक्ति होम्योपैथिक तरीके से भी इसका इलाज करा सकता है।

  • योगा करना- किसी भी अन्य बीमारियों की भांति फैटी लिवर में भी योगा करना लाभदायक विकल्प साबित हो सकता है।

    योगा में ऐसे बहुत सारे योगासान मौजूद हैं, जो लिवर की कार्यक्षमता को सुधारने में सहायक होते हैं।

  • लिवर ट्रांसप्लांट कराना- यदि इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को किसी भी अन्य तरीके से लाभ नहीं मिलता है, तो फिर डॉक्टर उसे लिवर ट्रांसप्लांट कराने की सलाह देते हैं।

    इस प्रक्रिया के माध्यम से डॉक्टर खराब लिवर को सेहतमंद व्यक्ति के लिवर से बदलते हैं।

दिल्ली-NCR में लिवर ट्रांसप्लांट की कीमत क्या है? (liver Transplant Cost in Hindi)

जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि फैटी लिवर या लिवर में फैट के जमा होने की बीमार का इलाज करने का सर्वोत्त्म तरीका लिवर ट्रांसप्लांट होता है।

जब भी कोई डॉक्टर किसी व्यक्ति को इस प्रत्यारोपण को कराने की सलाह देते हैं तो उसके मन में इसे लेकर बहुत सारे सवाल आते हैं जैसे उसे इस प्रक्रिया को कहां कराना चाहिए और इसकी कीमत क्या होती है।

यदि कोई व्यक्ति लिवर ट्रांसप्लांट कराना चाहता है तो वह इसके लिए दिल्ली-NCR को चुन सकता है क्योंकि भारत की राजधानी होने के कारण यहां पर लिवर ट्रांसप्लांट के सर्वोत्तम अस्पताल/क्लीनिक मौजूद हैं, जहां पर उसे मात्र 1.5 लाख से 2.5 लाख रूपये खर्ज करने की आवश्यकता पड़ती है।

फैटी लिवर के जोखिम क्या हो सकते हैं? (Complications of fatty liver in Hindi)

किसी भी व्यक्ति को फैटी लिवर को नज़रअदाज़ नहीं करना चाहिए और उसके समय रहते इलाज शुरू कराना चाहिए क्योंकि इसके अधिक समय तक लाइलाज रहने पर लिवर की बीमारी घातक रूप ले सकती है।

यदि को व्यक्ति लिवर में फैट के जमने की बीमारी का इलाज नहीं कराता है, उसे कुछ जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है, जिनमें से प्रमुख 5 जोखिम इस प्रकार हैं-

  1. पेट में तरल प्रदार्थ का बनना– यदि फैटी लिवर का इलाज सही समय पर नहीं होता है, तो उस स्थिति में पेट में एक प्रकार के तरल प्रदार्थ का निर्माण हो जाता है, जिसे अस्किट्स (ascites) के नाम से जाना जाता है।

  2. अन्नप्रणाली की नसों में सूजन का होना- इस बीमारी के लाइलाइज रहने पर अन्नप्रणाली (esophagus) की नसों में सूजन हो सकती है।

  3. लिवर कैंसर का होना- इस लिवर की बीमारी के अधिक समय तक बने रहने पर कैंसर का रूप ले सकती है और इससे पीड़ित व्यक्ति को लिवर कैंसर की समस्या हो सकती है।

  4. लिवर का खराब होना- कई बार लिवर में फैटी के जमा होने के कारण लिवर की कार्यक्षमता पूरी तरह से प्रभावित हो जाती है और इसकी वजह से लिवर खराब (Liver Failure) भी हो जाता है।

  5. सिरोसिस का होना- फैटी लिवर के लाइलाज रहने पर इससे पीड़ित व्यक्ति को लिवर सिरोसिस की समस्या हो सकती है।

फैटी लिवर की रोकथाम कैसे की जा सकती है? (How Fatty Liver can be prevented in Hindi)

ऐसा माना जाता है कि कोई भी बीमारी कभी भी हो सकती है, ऐसे में किसी भी व्यक्ति के लिए यह जानना मुश्किल होता है कि वह कब बीमार होने वाला है।

लेकिन, इसके बावजूद लोग कुछ महत्वपूर्ण आदातों को अपनाकर किसी भी बीमारी से अपनी रक्षा कर सकता है।

यह बात लिवर में फैट के जमा होने की बीमारी के संदर्भ में भी लागू होती है, अत: यदि कोई व्यक्ति इस लिवर की बीमारी की रोकथाम करना चाहता है, तो वह निम्नलिखित तरीकों को अपना सकता है-

  • हेल्थी डाइट को अपनाना- किसी भी अन्य बीमारी की तरह फैटी लिवर की भी रोकथाम हेल्थी डाइट को अपनाने के साथ किया जा सकता है।

    इसके लिए व्यक्ति अपने खान-पान फल एवं सब्जियों को शामिल कर सकता है और इसके साथ में फल के जूस का भी सेवन कर सकता है।

  • नियमित रूप से व्यायाम करना- ऐसा माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को सेहतमंद रहना है तो उसे नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए।

    यह बात इस लिवर की बीमारी में भी लागू होती है क्योंकि इससे लिवर में साफ हवा जाती है और उससे वह बेहतर तरीके से काम करने लगता है।

  • ध्रूमपान न करना- इससे पीड़ित व्यक्ति को ध्रूमपान नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे इसका उसकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।

  • शराब की आदात न डालना- शराब का सेवन लिवर के लिए सबसे बुरा माना जाता है इसी कारण फैटी लिवर से पीड़ित व्यक्ति को शराब की आदात नहीं डालनी चाहिए क्योंकि उससे उसकी स्थिति और भी खराब हो सकती है।

  • सामान्य वजन को बनाए रखना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि यह बीमारी अधिक वजन के कारण भी होती है।

    अत: इससे पीड़ित व्यक्ति को अपने वजन का विशेष ध्यान रखना चाहिए और उसे यह सामान्य बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।

  • मधुमेह को नियंत्रित रखना- लिवर में फैट जमा होने की समस्या मधुमेह के कारण भी होती है।

    अत: यदि किसी व्यक्ति को मधुमेह है, तो उसे डायबिटीज को नियंत्रण करने की कोशिश करते रहनी चाहिए ताकि वह सेहतमंद ज़िदगी बित सके।

जैसा कि हम सभी यह जानते हैं कि आज कल बहुत सारी बीमारियां फैल रही हैं। इनमें फैटी लिवर (Fatty Liver) की समस्या भी शामिल है, जो मुख्य रूप से अनियमित दिनचर्या के कारण होती है। यह एक ऐसी समस्या, जो बुर्जुगों के साथ-साथ युवाओं में भी देखने को मिल रही है, इसी कारण लोगों के बीच में यह चर्चा का विषय बन रही है।

लोग इसके बारे में पर्याप्त जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, ताकि वे इससे अपनी रक्षा कर सकें। इसके बावजूद ऐसे भी कुछ लोग हैं, जो इसकी आवश्यक जानकारी से वंचित हैं और इसी कारण इसके मरीजों की तादात दिन-प्रति-दिन बढ़ रही है।

यदि सभी लोगों को फैटी लिवर की संपूर्ण जानकारी होती तो यह समस्या पूरी तरह से समाप्त हो जाती। इस प्रकार हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख में फैटी लिवर की आवश्यक जानकारी देने की कोशिश की है।

यदि आप या आपकी जान-पहचान में कोई व्यक्ति लिवर संबंधी किसी समस्या और उसके इलाज के संभावित तरीकों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहता है तो वह इसके लिए +91-8448398633 पर Call करके उसकी मुफ्त सलाह प्राप्त कर सकता है।

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