एन्सेफलाइटिस: लक्षण, कारण, उपचार इत्यादि (Encephalitis in hindi)

एन्सेफलाइटिस (Encephalitis) की बीमारी आमतौर पर नवजात बच्चों में देखने को मिलती है और चूंकि, वे उस स्थिति में नहीं होते हैं कि अपनी स्थिति को व्यक्त कर सकें इसी कारण उनके परिवार वालों को यह पता ही नहीं चलता है कि उन्हें क्या परेशानी है। लेकिन, फिर भी यदि लोग थोड़ी समझदारी दिखाए और डॉक्टर से संपर्क करें तो वे आसानी से जान सकते हैं कि उनका बच्चा एन्सेफलाइटिस से पीड़ित है। टाइम्स ऑफ इंडिया नामक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार भारत में इस बीमारी के लगभग 4,759 मामले सामने आए, जिनमें से 595 लोगों में मौत हो जाती  है। ये आंकडे इस बीमारी की भयावह स्थिति को बयां करने के लिए काफी हैं, लेकिन इसके बावजूद यह काफी चौंकाने वाली चीज है कि लोगों को एन्सेलाइटिस के बारे में अधिक जानकारी नहीं है और इसी कारण  वे इसका इलाज सही तरीके से नहीं करा सकता है।

यदि आप भी इस बीमारी की पूर्ण जानकारी है, तो आपको इस लेख को जरूर पढ़ना चाहिए क्योंकि हमने इसमें एन्सेफलाइटिस की आवश्यक जानकारी देने की कोशिश की है।

एन्सेफलाइटिस क्या है? (What is Encephalitis? – in Hindi)

एन्सेफलाइटिस का पूर्ण नाम एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम है, जिसे आम भाषा में चमकी बुखार या दिमागी बुखार के नामों से जाना जाता है। एन्सेफलाइटिस से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जिसमें मस्तिष्क में सूजन हो जाती है। आमतौर पर, एन्सेफलाइटिस की बीमारी वायरल संक्रमण की वजह से होती है और कुछ मामलों में इसका कारण बैक्टीरिया या फंगी होता है। यदि इसका इलाज सही समय पर न कराया जाए तो यह किसी भी व्यक्ति के लिए घातक साबित हो सकती है, जिसकी वजह से उसकी जान भी जा सकती है।

चमकी बुखार के लक्षण क्या हैं? (Encephalitis Symptoms in Hindi)

अक्सर, लोग यह शिकायत करते हैं कि उन्हें एन्सेफलाइटिस या चमकी बुखार कब हुआ, उन्हें इसका पता ही चला और इसी कारण वे चमकी बुखार का इलाज सही समय पर शुरू नहीं करा पाएं। लेकिन, यदि वे चमकी बुखार के लक्षणों पर ध्यान देते तो शायद वे इससे निजात पा सकते।

अत: यदि किसी व्यक्ति को ये 5 लक्षण नज़र आते हैं तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और अपना इलाज शुरू कराना चाहिए-

  1. बुखार होना- यह एन्सेफलाइटिस का प्रमुख लक्षण है, जिसमें व्यक्ति को काफी तेज़ बुखार होता है।

    आमतौर पर, लोग एन्सेफलाइटिस को सामान्य बीमारी समझते हैं और इसी कारण इसका इलाज सही तरीके से नहीं कराते हैं लेकिन, कई बार बुखार होना एन्सेफलाइटिस जैसे किसी बीमारी का संकेत हो सकता है।

  2. सिरदर्द होना- अक्सर, ऐसा भी देखा गया है कि चमकी बुखार होता है तो उसकी शुरूआत सिरदर्द से होती है।

    चूंकि, लोग सिरदर्द को तनाव का कारण समझते हैं और इसी कारण वे इसके लिए सिरदर्द की दवाई लेते हैं। लेकिन,जब सिरदर्द में किसी भी तरीके से आराम नहीं मिलता है, तो उसे अपने स्वास्थ की जांच करानी चाहिए क्योंकि यह माइग्रेन या अन्य किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।

  3. कमजोरी महसूस होना- यदि कोई व्यक्ति किसी काम को ज्यादा देर तक नहीं कर पाता है और वह जल्द ही थक जाता है तो उसे इस समस्या को नज़रअदाज़ नहीं कराना चाहिए बल्कि डॉक्टर से मिलकर उसका सही इलाज कराना चाहिए क्योंकि यह चमकी बुखार का संकेत हो सकता है।

  4. गर्दन में अकड़न होना- एन्सेफलाइटिस की शुरूआत गर्दन में अकड़न के साथ भी होती है।

    इसी कारण अगर किसी व्यक्ति को यह समस्या है तो उसे तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए और अपना इलाज  शुरू कराना चाहिए।

  5. बोलने या सुनने में तकलीफ होना- यदि किसी व्यक्ति को बोलने या सुनने में अचानक से तकलीफ होने लगती है तो उसे इसे नज़रअदाज़ नहीं करना चाहिए बल्कि इसकी जांच डॉक्टर से करानी चाहिए क्योंंकि यह एन्सेफलाइटिस का संकेत हो सकता है।

दिमागी बुखार क्यों होता है? (Causes of Encephalitis Hindi)

किसी भी व्यक्ति को एन्सेफलाइटिस की बीमारी कई कारणों से हो सकती है, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

  • वायरल संंक्रमण से पीड़ित होना- यह एन्सेफलाइटिस का प्रमुख कारण है, जिसमें एन्सेफलाइटिस की बीमारी ऐसे व्यक्ति को होती है, जो किसी वायरल संक्रमण से ग्रस्त होता है।

  • रोग-प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना- ऐसा माना जाता है कि शख्स की रोग-प्रतिरोधक क्षमता का सही होना काफी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह उसे किसी भी बीमारी का सामना करने में सहायक साबित होती है।

    इसके विपरीत, जिस व्यक्ति की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उस व्यक्ति के बीमार होने की संभावना काफी अधिक रहती है।

  • नवजात शिशु का होना- चमकी बुखार होने की संभावना नवजात शिशु भी होती है।

    इसी कारण एन्सेफलाइटिस होने की प्रमुख वजह नवजात शिशु होना भी होता है।

  • बैक्टीरिया या फंगी से संपर्क में आना- यदि कोई शख्स बैक्टीरिया या फंगी के  संपर्क में आ जाता है, तो उसे एन्सेफलाइटिस होने की संभावना काफी अधिक बढ़ जाती है।

    अत: ऐसे व्यक्ति को अपने स्वास्थ का विशेष ध्यान रखना चाहिए और स्वास्थ संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या होती है, तो उसकी सूचना अपने डॉक्टर को देनी चाहिए।

  • किसी तरह की बीमारी का होना- यह एन्सेफलाइटिस का अन्य कारण है क्योंकि ऐसे बहुत सारे मामले सामने आते हैं, जिनमें एन्सेफलाइटिस से पीड़ित व्यक्ति पहले किसी अन्य बीमारी से पीड़ित होता है।

एन्सेफलाइटिस का इलाज कैसे किया जा सकता है? (Treatments of Encephalitis in Hindi)

हालांकि, एन्सेफलाइटिस की वजह से काफी सारे लोगों की जान चली जाती है, लेकिन यदि लोगों को इसके उपचार के सही तरीकों की जानकारी हो तो ये आंकड़ें  काफी कम हो सकते हैं।

अत: यदि कोई व्यक्ति चमकी बुखार या दिमागी खुबार से पीड़ित है, तो वे उपचार  के इन 5 तरीकों के माध्यम से इससे निजात पा सकते हैं-

  1. एंटीवायरल दवाई लेना-  जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि दिमागी बुखार वायरल के कारण भी होता है।

    इसी कारण एन्सेफलाइटिस का इलाज एंटीवायरल दवाई लेकर भी किया जा सकता है। ये दवाईयां शरीर को वायरल की संभावना को कम करते हैं और वे स्वस्थ रह सकें।

  2. दर्द-निवारक दवाई लेना- अक्सर, एन्सेफलाइटिस का इलाज दर्द-निवारक दवाई के द्वारा किया जाता है।

    यह दवाई सिरदर्द को कम करने में सहायक साबित होता है।

  3. सी.टी स्कैन कराना- अक्सर, एन्सेफलाइटिस का इलाज करने के लिए सी.टी स्कैन को भी किया जाता है।

    इस टेस्ट के द्वारा शरीर के आंतरिक अंगों की तस्वीर ली जाती है ताकि इस बात की पुष्टि की जा सके कि एन्सेफलाइटिस की बीमारी शरीर में किस हद तक फैल चुकी है।

  4. ब्लड टेस्ट कराना- डॉक्टर चमकी बुखार का इलाज ब्लड टेस्ट के द्वारा भी करते हैं।

    इस टेस्ट के द्वारा मनुष्य के शरीर में दिमागी बुखार की गति का पता लगाया जाता है और फिर उसके आधार पर इसका इलाज किया जाता है।

  5. बायोप्सी सर्जरी कराना- जब एन्सेफलाइटिस से ग्रस्त व्यक्ति को उपचार के किसी भी तरीके से आराम नहीं मिलता है तब डॉक्टर उसे बायोप्सी सर्जरी कराने की सलाह देते हैं।

    बायोप्सी सर्जरी एन्सेफलाइटिस का इलाज करने का सर्वोत्तम तरीका है।

एन्सेफलाइटिस के जोखिम क्या हो सकते हैं? (Complications of Encephalitis in Hindi)

ऐसा माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ संबंधी किसी भी समस्या को नज़रअदाज़ करता है तो उससे इसकी वजह से काफी सारे जोखिमों का सामना  करना पड़ सकता है।

यह बात एन्सेफलाइटिस पर भी लागू होती है क्योंकि ऐसा अक्सर देखा गया है कि यदि एन्सेफलाइटिस का इलाज काफी समय तक न कराया जाए तो एन्सेफलाइटिस गंभीर रूप ले सकती है और एन्सेफलाइटिस की वजह से लोगों को निम्नलिखित जोखिमों का सामना करना पड़ता है-

  • याददाश्त का जाना- यह दिमागी बुखार का प्रमुख जोखिम होता है।

    चूंकि, एन्सेफलाइटिस बीमारी का संबंध मस्तिष्क से है इसलिए इसका असर व्यक्ति की याददाशत पर पड़ता है और इसकी वजह से उसकी याददाशत भी चली जाती है।

  • शारीरिक कमजोरी होना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि एन्सेफलाइटिस होने पर व्यक्ति को शारीरिक कमजोरी महसूस होती है।

    यदि एन्सेफलाइटिस का इलाज कुछ समय तक न किया जाए तो यह समस्या बनी रह सकती है।

  • व्यवहार में बदलाव होना- ऐसा देखा गया है कि जब दिमागी  बुखार का इलाज सही समय पर नहीं होता है तो इसका असर व्यक्ति के व्यक्तित्व पर पड़ता है और उसमें काफी बदलाव हो जाता है।

  • कोमा में जाना- यदि एन्सेफलाइटिस लाइलाज रह जाती है तो एन्सेफलाइटिस की वजह से लोग कोमा भी जा सकते हैं।

    हालांकि, कोमा कुछ ही समय के लिए रहता है लेकिन फिर भी डॉक्टर को सावधानी बरतनी चाहिए।

  • मौत होना- यह एन्सेफलाइटिस का सबसे गंभीर जोखिम है,जिसमें लोगों की मौत हो जाती है।

    इसी कारण सभी लोगों को यह कोशिश करनी चाहिए कि वे सही समय पर दिमागी बुखार का इलाज शुरू कराएं क्योंकि उनकी ज़िदगी सबसे अनमोल होती है औऱ उसे बचाने के लिए सभी तरीकों को अपनाना चाहिए।

एन्सेफलाइटिस की रोकथाम कैसे करें? (Precautions of Encephalitis in Hindi)

हालांकि, चमकी बुखार या दिमागी बुखार काफी दर्दनाक होता है, जिसका असर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक क्षमता पर भी पड़ता है।

लेकिन, इनके बावजूद राहत की बात यह है कि यदि लोग कुछ सावधानियों को बरते, तो वह एन्सेफलाइटिस की रोकथाम कर सकते हैं और इसके साथ में इसकी संभावना को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं।

अत: यदि कोई व्यक्ति एन्सेफलाइटिस की रोकथाम करना चाहता है तो वह इसके लिए इन 5 तरीकों को  अपना सकता है-

  1. टीकाकरण कराना- चूंकि, वर्तमान समय में काफी सारी बीमारियां फैल  रही हैं इसी कारण लोगों को समय-समय पर टीकाकरण कराना चाहिए ताकि उन्हें किसी बीमारी होने की संभावना न हो।

  2. साफ-सफाई रखना- ऐसी बहुत सारी बीमारियां होती हैं, जो साफ सफाई न रखने की वजह से होती हैं।

    इनमें चमकी बुखार भी शामिल हैं इसलिए सभी लोगों को यह कोशिश करनी चाहिए कि साफ-सफाई बनाए रखें ताकि उन्हें एन्सेफलाइटिस न हो।

  3. मच्छरों से बचाव करना- दिमागी बुखार मच्छरों के कटाने की वजह  से भी होता है क्योंकि व्यक्ति में कुछ गंभीर बैक्टीरिया प्रवेश कर जाते हैं।

    अत: यदि कोई व्यक्ति दिमागी बुखार की रोकथाम करना चाहता है तो उसे मच्छरों से बचाव करना चाहिए। इसके लिए वह मच्छरदानी या मच्छर मारने की दवा का इस्तेमाल करना चाहिए और इसके लिए जब भी वे घर से बाहर जाते हैं तो उस समय ऐसे कपड़े पहनने चाहिए जिनसे उनके हाथ  और पैर ढके रहें।

  4. व्यायाम करना- ऐसा माना जाता है कि व्यायाम शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करता है और  इसके साथ में यह व्यक्ति की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक साबित होता है।

    इसी कारण सभी लोगोंं को नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए ताकि वे स्वस्थ रह सकें और उन्हें कोई गंभीर न हो।

  5. स्वास्थ की नियमित रूप से जांच करना- यह सबसे महत्वपूर्ण चीज है कि जिसका पालन सभी लोगों को रखना चाहिए।

    सभी लोगों को अपने स्वास्थ की नियमित रूप से जांच करानी चाहिए ताकि इस बात की पुष्टि हो सके कि वे पूरी तरह से सेहतमंद हैं और इसके साथ में यदि उन्हें किसी बीमारी के होने की संभावना है तो वे उस स्थिति में सही इलाज करा सकें।

जैसा कि हम सभी यह जानते हैं कि वर्तमान समय में काफी सारी  बीमारियां फैल रही हैं। उनमें एन्सेफलाइटिस (Encephalitis) भी शामिल है, जो ज्यादातर बच्चों में देखने को मिलती है। चूंकि, लोगों को एन्सेफलाइटिस  बीमारी की पूर्ण जानकारी नहीं होती है इसी कारण वे इससे निजात नहीं पाते हैं। लेकिन, यदि उन्हें एन्सेफलाइटिस की पूर्ण जानकारी होती तो शायद वे भी बेहतर ज़िदगी जी पातें।

इस प्रकार हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित होगी क्योंकि हमने इसमें एन्सेफलाइटिस से संबंधित आवश्यक जानकारी देने की कोशिश की है।

यदि आप या आपकी जान-पहचान में कोई व्यक्ति को किसी बीमारी या उसके उपचार के संभावित तरीकों की अधिक जानकारी जानना चाहता है तो वह  इसके लिए +91-8448398633 पर Call करके उसकी मुफ्त सलाह प्राप्त कर सकता है।

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