क्या है फीमेल एग डोनेशन? (Female Egg Donation in Hindi)

फीमेल एग डोनेशन (Female Egg Donation) ऐसी महिला को संतान सुख देने का अनोखा तरीका है, जो किसी कारणवश मां बनने में असर्मथ है। जिस तरह से ‘विक्की डोनर ने लड़को को स्पर्म डोनेशन के लिए प्रेरित किया है उसी तरह से इससे कॉलेज की लड़कियों में भी फीमेल एग डोनेशन (Female Egg Donation) के प्रति जागरूकता बढ़ी है। लेकिन, इस तकनीक की पूर्ण जानकारी न होने के कारण उन्हें इसकी वजह से काफी सारी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।

अत: यह जरूरी है कि सभी महिलाओं को फीमेल एग डोनेशन की पूर्ण जानकारी दी जाए ताकि वे इसका लाभ सही तरीके से उठा सकें। इसी आवश्यकता को देखते हुए हमने इस लेख में फीमेल एग डोनेशन की जानकारी देने की कोशिश की है, तो और समय तक लेते हुए आइए इस लेख को शुरू करते हैं।

फीमेल एग क्या है? (What is Female Egg? -Hindi)

फीमेल एग भ्रूण का निर्माण करने वाला तत्व है, जिसके द्वारा किसी बच्चे का जन्म होता है।

फीमेल एग डोनेशन क्या है? (What is Female Egg Donation-Hindi)

फीमेल एग डोनेशन की प्रक्रिया में एग डोनर महिला के अंडाणु (एग) को मां बनने की इच्छुक महिला के गर्भाशय में डाला जाता है, ताकि उसे संतान सुख मिल सके।

फीमेल एग डोनेशन की प्रक्रिया (Procedure of Female Egg Donation-Hindi)

फीमेल एग डोनेशन में निम्नलिखित स्टेप शामिल हैं-

  • स्टेप 1: एग डोनर साइकिल को करना- फीमेल एग डोनेशन के दौरान एग डोनर साइकिल (अंडाणु दाता चक्र) को किया जाता है। इसमें एग डोनर महिला को एक तरह की साइकिल से गुजरना पड़ता है।

  • स्टेप 2: फीमेल एग डोनेशन के चरणों को करना-  फीमेल एग डोनर में मुख्य रूप से छह चरण अर्थात् पर्सनल स्क्रिनिंग, सिंक्रनाइज़ेशन विद द रेसिपेंट साइकिल, सुपरेशन ऑफ द साइकिल, स्टिमुलेशन ऑफ फॉलिकल्स, रिट्रीवल ऑफ एग्स और फॉलो-अप शामिल हैं।

  • स्टेप 3: पर्सनल स्क्रीनिंग को करना-  यह महिलाओं के फीमेल एग डोनेशन प्रक्रिया का सबसे पहला चरण है। डोनेट किए गए एग की स्क्रीनिंग अल्ड्रासाउंड, रक्त जांच और यूरिन ड्रग स्क्रीन टेस्ट के द्वारा की जाती है और इसके साथ में महिला की मनोवैज्ञानिक जांच करके  इस बात का पता लगाया जाता है कि उस महिला में किसी भी प्रकार की अनुवांशिक, मानसिक या शारीरिक बीमारी की संभावना का पता लगाया जा सके। इन टेस्टों के परिणाम और रिपोर्ट आने पर इसे डोनर और अंडाणु पाने वाली महिला के अंडाशय से मिलाकर उनसे सिंक्रनाइज़ेशन विद द रेसिपेंट साइकिल प्रक्रिया की शुरूआत करने के लिए पूछा जाता है।

  • स्टेप 4: सिंक्रनाइज़ेशन विद द रेसिपेंट साइकिल को करना- इस चरण में, एग डोनर को उसके मासिक धर्म चक्र (मेंस्ट्रुअल साइकिल) के तीसरे दिन पर गर्भनिरोधक दवाईयां दी जाती हैं ताकि उनके हार्मोन और अंडाशय को क्रियाशील रखा जा सके। इसके अलावा, एग पाने वाली महिला के मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) की तारीख के आधार पर, डोनेट एग को इसके शुरू होने पर उस महिला के अंडाशय में डाला जाता है और इसके साथ में उसे गर्भनिरोधक दवाईयों को देना बंद करके दिया जाता है, ताकि उनके मासिक धर्म सही समय से हो सके।

  • स्टेप 5: सुपरेशन ऑफ द साइकिल को करना-  एग डोनर के शरीर के तंत्र को बंद करने के लिए उसे लूप्रोन इंजेक्शन दिया जाता है ताकि इस प्रक्रिया को सही तरीके से किया जा सके। लूप्रोन इंजेक्शन को देने से पहले एग डोनर को लगभग एक हफ्ते से दस दिनों पहले मासिक धर्म होते हैं और उसके लगभग तीन से पांच दिनों बाद दवाईयों को बंद कर दिया जाता है।

  • स्टेप 6: स्टिमुलेशन करना- एग डोनर के अंडाशय में गोनॅडॉट्रपिन्ज़ कहा जाता है, उसके बाद से एग डोनर पर्याप्त मात्रा में एलएच और एफएसएच को नहीं बना सकता है। गोनॅडॉट्रपिन्ज़ को दिन में दो बार दिया जाता है और विकसित होने वाले कूपों के आकार और संख्या पर नजर रखने के लिए अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। रक्त की जांच (ब्लड टेस्ट) एसेट्रोजेन की मात्रा को निर्धारित करने के लिए की जाती है, जो 1 से 4 दिन तक अंतराल में बनते हैं।
    एक बार जब एग डोनर के फॉलिकल पूरी तरह विकसित हो जाते हैं, तो उसे एक ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (एचसीजी) इंजेक्शन दिया जाता है, जो अंडाणु को फॉलिकूलर वॉल से अलग करता है और इससे वे फॉलिकूलर फ्लूइड में आराम से मिल जाते हैं।
    ऐसा एचसीजी इंजेक्शन देने के 35 घंटो के बाद होता है और 39 घंटों के बाद अंडाशय से अंडाणु निकलते हैं।
    इस इंजेक्शन देने के 34.5 से 39 घंटों के बीच में अंडा पुनप्राप्ति (एग रिट्रीवल) प्रक्रिया की योजना बनाई जाती है। अगली सुबह अंतिम रक्त की जांच (ब्लड टेस्ट) की जाती है।

  •  स्टेप 7:  रिट्रीवल ऑफ एग्स को करना- फीमेल एग डोनेशन की प्रक्रिया को रोगी की बेहोशी में किया जाता है ताकि फीमेल एग डोनेशन  की प्रक्रिया के दौरान को रोगी को किसी तरह का दर्द न हो।
    विशेष सुइयों, अल्ट्रासाउंड के अनुसार, अंडाशय के फॉलिकूलर फ्लुइड में शामिल फीमेल एग को फिर से प्राप्त किया जाता है।

  • स्टेप 8: फॉलो-अप करना- अंत में, डोनर के मासिक धर्म पूरे होने के बाद डोनर के साथ इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है। अल्ट्रासाउंड किया जाता है ताकि इस बात का पता चल सके कि वह ठीक है।
    इस प्रक्रिया के सभी चरण पूरे होने के बाद वाइयबल एग्स को प्राप्त किया जाता है, जिनका प्रयोग आईवीएफ (IVF) के लिए किया जा सकता है।

आईवीएफ (IVF) क्या होता है? (What is IVF?-Hindi)

आईवीएफ ऐसी कृत्रिम प्रक्रिया है जिसमें किसी महिला के अंडाशय से अंडे को निकालकर उसे वैज्ञानिक तरीके से स्पर्म (शुक्राणु) से मिलाया जाता है।

आईवीएफ प्रक्रिया में उन दंपत्तियों को मां-बाप बनने का सुख दिया जाता है, जिनमें से महिला स्वस्थ अंडाशय (ovum) नहीं बना सकती है।

फीमेल एग डोनेशन के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? (Criteria of Female Egg Donation-in Hindi)

अगर आप एक एग डोनर बनना चाहती हैं, तो आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • आपकी उम्र 21 से 28 साल के बीच होनी चाहिए
  • आपके नियमित रूप से मासिक धर्म (पीरियड्स) होने चाहिए
  • आपको किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं होनी चाहिए
  • आप शारीरिक और भावनात्मक रूप से मजबूत होनी चाहिए
  • आपका बीएमआई (BMI) 28 से कम होना चाहिए
  • आप किसी भी तरह के नशीले पदार्थ, ध्रूमपान आदि का सेवन न करती हो

एग डोनेशन बैंक क्या होता है? (What is Egg Donation Bank-in Hindi)

एग डोनेशन बैंक ऐसी प्रयोगशाला होती है, जिसमें जमे हुए अंडाणु की कोशिकाओं (फ्रॉजन एग सेल) को रखा जाता है। इसमें कुछ ब्लड टेस्ट के साथ एग डोनर द्वारा दिए गए अंडे को बॉयोलॉजिकल पिता के शुक्राणाओं के साथ फर्टिलाइजड किया जाता है। फिर विकसित हुए भ्रूण को मां के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है।

फीमेल एग डोनेशन की कितनी लागत है? (Cost of Female Egg Donation-in Hindi)

फीमेल एग डोनेशन ऐसी चीज है, जिसके मुख्य रूप से दो फायदे होते हैं- एक इससे किसी दंपत्ति को संतान सुख मिलता है और दूसरा इसमें एग डोनर को भी पैसे मिलते हैं।
ऐसी बहुत सारी जगह होती हैं, जहां पर जाकर आप अपने एग को डोनेट कर सकती हैं जैसे क्लीनिक, अस्पताल, एग डोनेशन बैंक।
इन सभी में फीमेल एग डोनेशन की अलग-अलग लागत होती हैं। उदाहरण के लिए एक बार फीमेल एग डोनेशन  करने पर आपको 50 से 60 हजार रूपये मिलते हैं।

फीमेल एग डोनेशन के कौन-कौन सेे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं? (Side effects of Female Egg Donation)

चूंकि, फीमेल एग डोनेशन की प्रक्रिया में बहुत सारी जिदगी दाव पर लगी होती हैं।

ऐसे में इससे फीमेल एग डोनेशन के साथ-साथ गर्भधारण करने वाली महिला को भी निम्नलिखित जोखिम हो सकते हैं:

  • फीमेल एग डोनेशन सबसे बड़ा खतरा गर्भपात का होता है।
  • फीमेल एग डोनेशन का अन्य जोखिम समय-पूर्व प्रसव (प्रीमैच्योर डिलीवरी) हो सकती है।
  • आपको बहुत सारी बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है जैसे एचआईवी, उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), मधुमेह (डायबिटीज) आदि।
  • फीमेल एग डोनेशन से जुड़वा बच्चे होने की 36.6 प्रतिशत संभावना होती है।

जहां एक ओर फीमेल एग डोनेशन गर्भधारण करने वाली महिला को प्रभावित करता है, वही दूसरी ओर इससे एग डोनर को भी बहुत सारे खतरे होते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं:

  • वजन का बढ़ जाना
  • मूड स्विंग होना
  • त्वचा के उस हिस्से से खून निकल सकता है या फिर लाल दब्बे पड़ सकते हैं, जहां पर एग डोनेशन की प्रक्रिया की जाती है।
  • भविष्य में गर्भधारण करने में परेशानी

ऐसा कहा जाता है कि एक महिला के दुख को कोई महिला ही सबसे अच्छे तरीके से समझ सकती है। अत: अगर आप एक स्वस्थ महिला हैं, तो आपको फीमेल एग डोनेशन (Female Egg Donation) जरूर करना चाहिए और ऐसी महिला की सहायता जरूर करनी चाहिए, जो किसी कारण से बच्चे को जन्म नहीं पाती है।

इस प्रकार हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित हुआ होगा क्योंकि हमने इस लेख में फीमेल एग डोनेशन से संबंधित आवश्यक जानकारी दी है। किसी भी नि:संतान दंपत्तियों के लिए संतान सुख से वंचित रहना सबसे बड़े दुख की बात होती है। ऐसी स्थिति में जो महिला अपने अंडों को डोनेट करती है, उसके लिए यह काम काफी पुण्य का होता है।

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