क्या आप गर्भवती हैं? तो जानें प्रसव (Delivery) से जुड़ी आवश्यक जानकारी

आपकी गर्भावस्था (Pregnancy in Hindi) के दौरान, आपको गर्भावस्था, डिलीवरी और बच्चे के जन्म से (डिलीवरी) संबंधित बहुत सारे विकल्प मिलते होंगे।

आपके बच्चे का जन्म कैसे होता है, इस बारे में आपकी पसंद आमतौर पर व्यक्तिगत राय, मेडिकल हिस्ट्री और आपके देखभालकर्ता के सुझाव /प्राथमिकताओं इत्यादि पर निर्भर करती है।

कुछ महिलाएं इस बात को नहीं जानती हैं, इसलिए वे बच्चे के जन्म देने (डिलीवरी) के अलग तरीकों का नाम सुनकर घबरा जाती हैं।

अगर आप भी डिलीवरी की पूर्ण जानकारी कोे नहीं जानती हैं तो फिर यह जानने में यह लेख आपकी  सहायता करेगा।

बेबी डिलीवरी के कितने प्रकार होते हैं? ( Types of Baby Delivery in Hindi)

प्रसव के मुख्य रूप से 4 प्रकार होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

1) नॉर्मल या वेजिनल डिलीवरी- बेबी डिलीवरी की इस विधि में बच्चे का जन्म (नॉर्मल डिलीवरी), महिला की बच्चे को जन्म देने वाली नलिका के माध्यम से होता है। इस प्रक्रिया में मां की योनि की मांसपेशियों को हिलाकर बच्चे को बाहर की ओर धकेला जाता है।

इस विधि में संक्रमण होने की संभावना काफी कम होती है और इसके बाद महिला के स्वास्थ में जल्दी से सुधार होता है।

इसके साथ में इस विधि के बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि इसके माध्यम से जन्मा बच्चा काफी सेहतमंद होता है।

इसके अलावा,सामान्य प्रसव / नॉर्मल डिलीवरी का अन्य प्रकार वाटर डिलीवरी भी है, जिसमें बच्चे का जन्म किसी जल माध्यम से होता है।

इसके अलावा वीबीएसी नामक भी सामान्य प्रसव /नॉर्मल डिलीवरी  का अनोखा प्रकार है, जिसमें किसी महिला के दूसरे बच्चे का जन्म (नॉर्मल डिलीवरी) प्राकृतिक रूप से किया जा सकता है, भले ही उसके पहले बच्चा का जन्म (नॉर्मल डिलीवरी) सी – सेक्शन और शेड्यूल डिलीवरी के माध्यम से हुआ हो।

2) सिजेरियन सेक्शन (सी-सेक्शन)- सिजेरियन सेक्शन से तात्पर्य ऐसी प्रक्रिया से है, जिसमें मां के पेट और गर्भाशय में सर्जिकल चीरे के माध्यम से बच्चे का जन्म होता है।

आम तौर पर, अगर बच्चे की नॉर्मल डिलीवरी में किसी तरह की जटिलता होती है और उसमें बच्चे को किसी तरह का खतरा होता है तो उस स्थिति में डॉक्टर सी – सेक्शन को अपनाते हैं।

स्वाभाविक रूप से इस प्रक्रिया को करने से पहले मां-बाप की सहमति लेना आवश्यक होता है।

इस तरह की डिलीवरी खतरनाक लग सकती है लेकिन यह सत्य नहीं है। आज की तकनीक और चिकित्सा उन्नति के साथ इसे करना काफी सुरक्षित और आसान बन गया है।

हालांकि, इस विधि के बाद मां के फिर से सेहतमंद होना थोड़ा समय लग सकता है और उसे इसके बाद अपने स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखना जरूरी होता है।

3) वैक्यूम एक्सट्रैक्शन- यह डिलीवरी का ऐसा तरीका होता है, जिसमें बच्चे को गर्भ से बाहर निकालने के लिए वैक्यूम पंप का उपयोग किया जाता है।

इस विधि में वैक्यूम पंप के द्वारा बच्चे के सिर को पकड़कर मां की योनि से बाहर खींचा जाता है।

4) फोरसेप्स डिलीवरी- वैक्यूम एकस्ट्रैक्शन की तरह, फोरसेप्स डिलीवरी भी एक प्रकार की ऑपरेटिव प्राकृतिक डिलीवरी है, जिसमें योनि नलिका से बच्चे को खींचने के लिए एक विशेष फोरसेप्स का उपयोग किया जाता है।

1. वेजिनल डिलीवरी- यह प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) का सबसे साधारण तरीका है।

इसके निम्नलिखत लाभ होते हैं-

  • महिला का अस्पताल में कम समय तक रहना

  • बच्चे के जन्म (नॉर्मल डिलीवरी) के बाद कम दर्द होना

  • महिला की सेहत में जल्दी-से सुधार होना

    वेजिनल प्रसव के कुछ जोखिम भी होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  • इसके लगभग 2 घंटों तक महिला की सेहत में कोई सुधार नज़र नहीं आना।

  • महिला को काफी थकान का महसूस होना।

  • बच्चे की स्थित में कुछ परेशानी का होना।

2.सिजेरियन सेक्शन – सिजेरियन सेक्शन से तात्पर्य ऐसी प्रक्रिया से है, जिसमें मां के पेट और गर्भाशय में सर्जिकल चीरे के माध्यम से बच्चे का जन्म होता है।

सिजेरियन सेक्शन के अपने लाभ होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  • मां और बच्चे की जान बचाने का सर्वेश्रेष्ठ तरीका

  • किसी प्रकार का दर्द न होना

    सिजेरियन सेक्शन के कुछ जोखिम भी होते हैं,जो इस प्रकार हैं-

  • रक्तस्राव होना

  • गर्भाशय में संक्रमण होना

  • गर्भपात का खतरा होना

3. वैक्यूम एक्सट्रैक्शन डिलीवरी – जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि इस प्रक्रिया में वैक्यूम का उपयोग किया जाता है, जिसकी सहायता से बच्चे को मां की गर्भ नली से बाहर निकाला जाता है।

वैक्यूम एक्सट्रैक्शन डिलीवरी के निम्नलिखित लाभ होते हैं-

  • एक वेंटहाउस में वैक्यूम की तुलना में योनि के फटने की संभावना का कम होना।

  • तमाम जटिलताओं के साथ में बच्चे के प्रसव को संभव करना।

  • सी-सेक्शन से बेहतर विकल्प

    इसके कुछ जोखिम भी होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  • एनेस्थेसिया की आवश्यकता का पड़ना।

  • वैक्यूम से बच्चे के सिर पर चोट लगना।

  • बच्चे की रेटिना में चोट लगने की संभावना।

4. फोरसेप्स डिलीवरी- वैक्यूम एकस्ट्रैक्शन की तरह, फोरसेप्स डिलीवरी भी एक प्रकार की ऑपरेटिव प्राकृतिक डिलीवरी है, जिसमें योनि नलिका से बच्चे को खींचने के लिए एक विशेष फोरसेप्स का उपयोग किया जाता है।

फोरसेप्स डिलीवरी के निम्नलिखित लाभ होते हैं-

  • कम समय में प्रसव (नॉर्मल डिलावरी) करना

  • वैक्यूम की तुलना में अधिक सफल होना

  • एनेस्थेसिया का उपयोग करना

फोरसेप्स डिलीवरी के कुछ जोखिम भी होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  • दिमाग में रक्तस्राव होना

  • बच्चे के सिर और त्वचा पर चोट के निशान पड़ना।

  • योनि को नुकसान पहुंचना।

प्रसव की कितनी लागत होती है? (Cost of Baby Delivery in Hindi)

जब बच्चे को जन्म  देने की बात आती है, तो इसके लिए भारत में दिल्ली से बेहतर और कोई जगह हो नहीं सकती है।

भारत की राजधानी होने के कारण, दिल्ली में बच्चे को जन्म देने के सबसे अच्छे क्लीनिक और डॉक्टर मौजूद हैं।

दिल्ली में प्रसव कराने की औसतन लागत 50,000 से 80,000 रूपये होती है, यह लागत मुख्य रूप से कई तत्वों पर निर्भर करती है, जो इस प्रकार हैं-

  • अस्पताल

  • डॉक्टर

  • महिला के स्वास्थ की स्थिति

  • प्रसव (डिलीवरी) के प्रकार

प्रसव के लिए सर्वोत्तम अस्पताल/क्लीनिक कौन-से हैं? (Hospitals/Clinics of Baby Delivery in Hindi)

जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि प्रसव (डिलीवरी) के लिए सबसे अच्छी जगह दिल्ली-NCR है, इसलिए लोगों के मन में इस प्रश्न का आना स्वाभाविक है, कि दिल्ली में प्रसव (डिलीवरी)  के लिए कौन से उपयुक्त अस्पताल/क्लीनिक हैं।

इसी प्रश्न का उत्तर देने के लिए हम दिल्ली-NCR के बेहतरीन अस्पतालों की सूची दे रहे हैं, जो इस प्रकार है-

  • Max Hospital- गर्भवती महिलाएं अक्सर बच्चे को जन्म देने के लिए इसी अस्पताल को चुनती हैं, जो मुख्य रूप से दिल्ली की कई जगहों जैसे साकेत, शालीमार बाग और पपड़गज इत्यादि पर स्थित है।

    अत: आप भी इन जगहों पर मौजूद मैक्स अस्पताल में जाकर बच्चे की सफल प्रसव (डिलीवरी) करा सकती हैं।

  • Indra IVF- इन दिनों यह कलीनिक स्वास्थ के लिए काफी लोकप्रिय हो रहा है, जिसकी दिल्ली-NCR में कई शाखाएं मौजूद हैं।

    इसके लिए आप पटेल नगर, लाजपत नगर इत्यादि में मौजूद इंद्रा आईवीएफ में जा सकते हैं।

  • Sir Ganga Ram Hospital- यह दिल्ली के करोल बाग में स्थित है, जो अपनी आधुनिक सुविधाओं के लिए प्रसिद्ध है।

नोट: ये सभी अस्पताल Letsmd के पैनल में शामिल हैं

प्रसव के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? (Precautions After Baby Delivery in Hindi)

प्रसव (डिलीवरी) के बाद इन 7 बातों का ध्यान रखना, मां और बच्चे के लिए लाभदायक होता है, जो इस प्रकार हैं-

  1. खान-पान का ध्यान रखना- प्रसव (डिलीवरी) के बाद महिला को अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए, जो पूर्ण रूप से पौष्टिक होना चाहिए।

  2. हल्के-फुल्के व्यायाम करना- यदि किसी महिला ने हाल ही में किसी बच्चे को जन्म  दिया है तो उसे हल्के- फुल्के व्यायाम करने चाहिए।

  3. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना- प्रसव के बाद महिला को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए ताकि उसके शरीर में पानी की कमी न हो।

  4. योनि के आस-पास की जगह को गर्म पानी से साफ करना – चूंकि, प्रसव  के बाद का समय किसी भी महिला के लिए काफी नाज़ुक होता है, अत: उसे योनि के आस-पास की जगह को गर्म पानी से ही साफ करना चाहिए ताकि वहां पर किसी तरह का संक्रमण न हो।

  5. योनि के पास होने वाले दर्द के लिए आइस पैक्स का प्रयोग करना- आइस पैक बच्चे के जन्म  के बाद योनि के आस-पास होने वाले के दर्द को कम करने में सहायक होता है।

    डॉक्टर यह सलाह देते हैं कि किसी भी महिला योनि में दर्द  होने पर आइस पैक का उपयोग करना सीधे तौर पर नहीं करना चाहिए अपितु उसका प्रयोग तौलिये में लपेटकर करना चाहिए।

  6. आराम करना- एक मां के लिए पर्याप्त आराम और अच्छी नींद अनिवार्य होते हैं।

    एक नवजात शिशु को हर तीन घंटे में दूध पिलाना, साफ रखना और आराम करने की आवश्यकता होती है।

    चूंकि, किसी भी महिला के लिए एक समय में 7-8 घंटे सोना असंभव होता है, तो इसके लिए उसे अपने सोने के समय को बदलने की आवश्यकता होती है।

  7. सहायता लेना- चूंकि, आपके पति आपके साथ हर समय नहीं रह सकते हैं, इसलिए आप अपने और अपने बच्चे की देखभाल के लिए किसी आया को काम पर रख सकती हैं।

    इसके साथ में आपको अपने परिवार या दोस्तों की भी मदद ले सकती हैं।

    कोई भी मां यह चाहती है कि उसके बच्चे को किसी तरह की तकलीफ हो। वह उसे सुरक्षित रखने के लिए हर संभव करती है, लेकिन कुछ महिलाएं इस बात को लेकर चिंतित रहती है कि वह अपने प्रसव के बाद अपना और अपने नवजात बच्चे का इस तरह से ख्याल रखें।

    इसके अलावा उसे गर्भावस्था के बाद होने वाले प्रसव के दर्द (लेबर पैन) की भी चिंता रहती है।

    लेकिन उन्हें इसकी पूर्ण आवश्यक जानकारी हो तो शायद उन्हें इतनी चिंता करने की जरूरत न पड़े। हमने इस लेख के माध्यम से इसी चिंता को कम करने की कोशिश की है।

    अत: हमें यह उम्मीद है कि इस लेख को पढ़ना आपके लिए लाभदायक साबित हुआ होगा।

    अगर आप या आपकी जान-पहचान में महिला गर्भवती है तो उसे अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

    इसके लिए उसे अनुभवी डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए और उसके द्वारा बताए गए निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए।

    अगर आप महिला स्वास्थ से संबंधित किसी भी प्रकार जानकारी चाहती हैं तो वह इसके लिए 95558-12112 पर Call करके Letsmd से संपर्क कर सकती हैं और इसके साथ में किसी भी तरह की फाइनेंस सहायता के लिए वह Letsmd से आसान दरों पर मेडिकल लोन ले सकती हैं।

 

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