कैल्शियम की कमी को कैसे दूर करें? (calcium deficiency in Hindi)

What is calcium deficiency?

कैल्शियम की कमी किसी भी व्यक्ति के लिए खतरनाक साबित हो सकती है, क्योंकि यह उसे काफी सारी गंभीर बीमारियों का शिकार बना सकती है।
चूंकि,कैलशियम की कमी की शुरूआत सामान्य समस्या की तरह होती है, इसलिए ज्यादातर लोग इसकी पहचान समय रहते नहीं कर पाते हैं।
इसी कारण, कुछ समय के बाद यह समस्या गंभीर रूप ले जाती है, तब इसका इलाज कराना काफी मुश्किल हो जाता है।
यदि आप इस स्थिति का सामना नहीं करना चाहते हैं, तो आपको इस लेख को ज़रुर पढ़ना चाहिए क्योंकि इसमे हमने कैल्शियम की कमी से जुड़ी आवश्यक जानकारी दी है।

कैल्शियम की कमी क्या है? (what is calcium deficiency? In Hindi)

कैल्शियम की कमी को ह्य्पोकाल्सेमिअ (Hypocalcemia) के नाम से भी जाता है, जिसका तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जब खून में कैल्शियम का स्तर कम हो जाता है।
हालांकि, इसका इलाज संभव है, लेकिन यदि यह काफी लंबे समय तक लाइलाज रहे तो इसका असर शरीर के अन्य अंगों जैसे दाँत, आंख, मस्तिष्क इत्यादि पर भी पड़ सकता है।

कैल्शियम की कमी के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of calcium deficiency in Hindi)

Calcium deficiency symptoms
Calcium deficiency symptoms

किसी भी अन्य बीमारी की तरह कैल्शियम की कमी के भी अपने कुछ लक्षण होते हैं, जो इसके होने का संकेत देते हैं।
इस प्रकार, यदि किसी व्यक्ति को अपने शरीर में ये 6 लक्षण नज़र आए, तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर अपना हेल्थचेकअप कराना चाहिए ताकि कैल्शियम की कमी को बढ़ने से रोका जा सकता है-

  • उंगलियों में झुनझुनी होना- कैल्शियम की कमी का प्रमुख लक्षण उंगलियों में झुनझुनी होना है।
    ऐसी स्थिति में लोगों को डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और इस बात की जांच करानी चाहिए कि ऐसा कैल्शियम की कमी की वजह से है अथवा नहीं।
  • मांसपेशियों में ऐंठन होना- यदि लोगों को मांसपेशियों में ऐंठन होता है, तो उन्हें इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि यह कैल्शियम की कमी का लक्षण हो सकता है।
  • थकावट महसूस होना- किसी काम या एक्टिविटी करने के बाद थकावट होना आम चीज़ है, लेकिन जब लोगों को थोड़ा सा काम करने पर ही अधिक थकान होती है, तो यह चिंताजनक चीज़ होती है।
    ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द हेल्थचेकअप कराना काफी जरूरी हो जाता है क्योंकि यह कैल्शियम की कमी का संकेत हो सकता है।
  • भूख न लगना- कैल्शियम की कमी का अन्य लक्षण भूख न लगना भी है। हालांकि, लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं, जिसकी वजह से उन्हें कैल्शियम की कमी जैसी बीमारी का शिकार होना पड़ता है।
  • नाखुन का कमज़ोर होना या निकलना- कैल्शियम की कमी होने का खतरा ऐसे लोगों में अधिक रहता है, जिनके नाखुन कमज़ोर होते हैं।
    ऐसे लोगों को अपने नाखुनों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है।
  • निगलने में कठिनाई होना- आमतौर पर, निगलने में कठिनाई होने को गले में खराश या फिर जुखाम से जोड़कर देखा जाता है,लेकिन कई बार यह कैल्शियम की कमी जैसी अन्य बीमारियों का लक्षण भी हो सकता है। 

कैल्शियम की कमी के कारण क्या है? (Causes of calcium deficiency in Hindi)

कैल्शियम की कमी की सामना किसी भी व्यक्ति को करना पड़ सकता है।
इस बीमारी के होने के कई सारे कारण हो सकते हैं, जिनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

  • खून में प्रोटीन स्तर का कम होना- कैल्शियम की कमी होने का प्रमुख कारण खून में प्रोटीन स्तर का कम होना है।
    ऐसा मुख्य रूप से तब होता है, जब किसी व्यक्ति के शरीर में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन नहीं जा पाता है।
  • अच्छी तरह से भोजन न करना- भागदौड़ भरी ज़िदगी में हमारे पास इतना भी समय नहीं होता है कि अच्छी तरह से भोजन कर पाए। इसी कारण, हमें काफी सारी बीमारियों का शिकार बना देती है।
    अत: अच्छी तरह से भोजन न करना भी कैल्शियम की कमी का कारण बन सकता है।
  • दवाइयों का साइड इफेक्ट्स होना- अक्सर, कैल्शियम की कमी तब भी हो सकता है, जब लोगों को दवाइयों का साइड-इफेक्ट्स हो जाता है।
    ऐसे लोगों को डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए ताकि वे कैल्शियम की कमी जैसी गंभीर बीमारी का शिकार न बन पाए।
  • होर्मोन का असामान्य तरीके से बदलना- यदि किसी शख्स के हार्मोन का असामान्य तरीके से बदलाव हो जाता है, तो उसे कैल्शियम की कमी होने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है।
  • जेनेटिक कारण होना- कैल्शियम की कमी की समस्या ऐसे लोगों को भी हो सकती है, जिनके परिवार में कोई अन्य सदस्य इस बीमारी से पीड़ित होता है।
    ऐसे लोगों को समय-समय पर अपना हेल्थचेकअप कराने की जरूरत होती है, ताकि इस बात का पता चल सके कि उन्हें कैल्शियम की कमी की समस्या तो नहीं।

कैल्शियम की कमी की पहचान कैसे करें? (calcium deficiency diagnosis in Hindi)

ऐसा माना जाता है कि यदि किसी बीमारी की पहचान समय रहते हो जाए तो उसका इलाज आसान हो जाता है।
यह बात कैल्शियम की कमी पर भी लागू होती है, इसलिए इसकी पहचान करना महत्वपूर्ण बन जाता है।
यदि डॉक्टर को किसी व्यक्ति में कैल्शियम की कमी का पता लगना होता है, तो वह इसके लिए ये 4 तरीके को अपना सकते हैं-

  • मेडिकल हिस्ट्री देखना- कैल्शियम की कमी की पहचान करने का सबसे आसान तरीका मेडिकल हिस्ट्री देखना या फिर उसकी अच्छी तरह से जांच करना है।
    ऐसा करने से इस बात का पता चलता है कि अतीत में किसी व्यक्ति में कैल्शियम संबंधी कोई बीमारी तरह अथवा नहीं।
  • ब्लड टेस्ट करना- मेडिकल हिस्ट्री की जांच करने के कैल्शियम की कमी की पहचान ब्लड टेस्ट के द्वारा भी की जा सकती है।
    ब्लड टेस्ट के द्वारा इस बात की पुष्टि की जाती है किसी शख्स के शरीर में कैल्शियम की मात्रा कितनी है।
  • एल्युबिन टेस्ट करना- अक्सर, डॉक्टर कैल्शियम की कमी की पहचान एल्युबिन टेस्ट के द्वारा भी किया जाता है।
    एल्युबिन मुख्य रूप से हड्डियों में मौजूद प्रोटीन है, जो कैल्शियम की गणना को बताता है।
  • हड्डियों की जांच करना- कैल्शियम की कमी की पहचान हड्डियों की जांच के द्वारा भी संभव है।
    हड्डियों की जांच करके इस बात का पता लगाया जाता है कि किसी व्यक्ति की हड्डियों की गुणवत्ता (बोन डेंसिटी) कितनी कम है।

कैल्शियम की कमी का इलाज कैसे किया जा सकता है? (calcium deficiency treatments in Hindi)

आमतौर पर, कैल्शियम की कमी बहुत सारे लोगों में देखने को मिलती है, लेकिन अगर इसके इलाज के तरीके की जानकारी हो तो इससे निजात पाना आसान हो जाता है।
इस प्रकार, यदि किसी व्यक्ति के शरीर में कैल्शियम की कमी है, तो वह निम्नलिखित तरीके से इसे दूर कर सकता है-

  • खान पान में बदलाव करना- कैल्शियम की कमी का इलाज करने का सबसे आसान तरीका खान-पान में बदलाव करना है।
    डॉक्टर कैल्शियम की कमी से पीड़ित लोगों को ऐसे दही, चीज़, बीच इत्यादि खाने की सलाह देते हैं, जिससे कि उनके शरीर में कैल्शियम की कमी दूर हो सके।
  • एक्सराइज़ करना- किसी भी अन्य बीमारी की तरह कैल्शियम की कमी का भी इलाज एक्सराइज़ के द्वारा किया जा सकता है।
    इस प्रकार, कैल्शियम की कमी से पीड़ित लोगों को चलना, दौड़ना, जॉगिंग करना इत्यादि एक्सराइज़ को करना चाहिए ताकि उनके शरीर में कैल्शियम की कमी दूर हो सके
  • कैल्शियम का सप्लीमेंट का सेवन करना- इन दिनों, बाज़ार में ऐसे बहुत सारे सप्लीमेंट मिलते हैं, जिनका सेवन कैल्शियम की कमी को दूर करने के लिए किया जा सकता है।
  • कैल्शियम के इंजेक्शन लगाना- कैल्शियम संप्लीमेट का सेवन करने के साथ-साथ कैल्शियम की कमी को इंजेक्शनों के द्वारा भी दूर किया जा सकता है।
  • कैल्शियम की दवाई खाना- अक्सर, कैल्शियम की कमी को दूर करने के लिए डॉक्टर इससे पीड़ित लोगों को कैल्शियम की दवाई भी देते हैं।
    ये दवाईयाँ शरीर में कैल्शियम की सही मात्रा को बनाए रखने में सहायक साबित होती हैं।

कैल्शियम की कमी से होने वाले रोग कौन-से हैं? (Diseases caused by calcium deficiency in Hindi)

कैल्शियम की कमी ऐसी बीमारियों में शामिल हैं, जिनकी वजह से कई सारी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।
अभी तक किए गए अध्ययनों से स्पष्ट हुआ है कि कैल्शियम की कमी मुख्य रूप से इन 5 बीमारियों का कारण बन सकती है-

  • दाँतों की संरचना में बदलाव होना- कैल्शियम की कमी से होने वाला प्रमुख रोग या बीमारी दाँतों की संरचना में बदलाव होना है।
    इसकी वजह से दाँतों की कई अन्य समस्याएं जैसे दाँतों में दर्द होना, मसूड़ों से खून आना इत्यादि हो सकते हैं।
  • मोतियाबिंद होना- अक्सर, कैल्शियम की कमी मोतियाबिंद का कारण भी बन सकती है। हालांकि,मोतियाबिंद का इलाज संभव है।
    लेकिन यदि यह लंबे समय तक लाइलाज रहे तो इसकी वजह से आंखों की रोशनी भी जा सकती है।
  • मस्तिष्क में बदलाव होना- कैल्शियम की कमी के ऐसे मामले भी देखने को मिले हैं, जिनमें इसका असर लोगों के मस्तिष्क पर भी पड़ जाता है।
    ऐसी स्थिति में लोगों को मस्तिष्क संबंधी काफी सारी समस्याएं जैसे चीज़ों को भूलना, सिरदर्द होना इत्यादि का सामना करना पड़ता है।
  • हड्डियों का कमज़ोर होना- चूंकि, कैल्शियम का संबंध हड्डियों की मज़बूती से है।
    इसी कारण, जब किसी व्यक्ति के शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है, तो इसका सीधा असर हड्डियों की क्षमता पर पड़ती हैं और वे कमज़ोर हो जाती हैं।
  • ऑस्टियोपोरोसिस होना- कैल्शियम की कमी ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) की संभावना को भी बढ़ा सकती है।
    ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों की ऐसी बीमारी है, जिससे फ्रेक्चर या चोट लगने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है।

कैल्शियम की कमी से बचाव कैसे किया जा सकता है? (Calcium deficiency precautions in Hindi)

अभी तक आप यह समझ गए होंगे कि कैल्शियम की कमी कितनी खतरनाक हो सकती है।
इसके बावजूद राहत की बात यह है कि थोड़ी-सी सावधानियाँ बरतकर कैल्शियम की कमी से बचाव किया जा सकता है।
अत: यदि कोई व्यक्ति निम्नलिखित उपायों को अपनाए तो वह कैल्शियम की कमी से बचाव कर सकता है-

  • हेल्थी डाइट अपनाना- कैल्शियम की कमी से बचाव का सबसे कारगर तरीका हेल्थी डाइट अपनाना है।
    ऐसी स्थिति में दूध, हरी पत्तियां सब्ज़ियाँ, दही इत्यादि का सेवन करना लाभदायक साबित हो सकता है।
  • एक्सराइज़ करना- यदि कोई व्यक्ति हर रोज़ एक्सराइज़ करता है, तो उसमें कैल्शियम की कमी होने की संभावना काफी कम हो जाती है।
  • पर्याप्त नींद लेना- ऐसा कहा जाता है कि सभी लोगों को 6 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। यह उनके शरीर में एनर्जी देने के साथ-साथ उन्हें सेहतमंद भी रखता है।
    यह बात कैल्शियम की कमी पर भी लागू होती है, इसलिए इससे बचाव में पर्याप्त नींद लेना सहायक साबित हो सकता है।
  • समय-समय पर हेल्थचेकअप कराना- सभी लोगों के लिए समय-समय पर हेल्थचेकअप कराना काफी जरूरी होता है क्योंकि यह उन्हें इस बात के लिए जागरूक रखता है, कि उन्हें कोई बीमारी तो नहीं है।
    ऐसा कैल्शियम की कमी की स्थिति में भी देखने को मिलता है क्योंकि समय-समय पर हेल्थचेकअप कराने पर लोग से इस बात को लेकर जागरूक हो जाते हैं कि उनके शरीर में कैल्शियम की कमी के संकेत हैं या नहीं।
  • डॉक्टर के संपर्क में रहना- यदि किसी शख्स का कैल्शियम की कमी का इलाज चल रहा है, तो तब तक डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए जब तक वे उनके पूरी तरह से सेहतमंद होने की पुष्टि नहीं करते हैं।

आपने अक्सर,यह सुना होगा कि हमारे शरीर को सभी तत्वों जैसे प्रोटीन, कैल्शियम,आयरन इत्यादि की आवश्यकता होती है, क्योंकि ये उसे ऊर्जा (एनर्जी) प्रदान करते हैं।
यदि कैल्शियम की बात की जाए तो यह हड्डियों को मजबूत करने के साथ-साथ रोग-प्रतिरोधक क्षमता (immunity power) को बढ़ाने में भी सहायता करता है।
इसी कारण, कैल्शियम की कमी लोगों को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है, जिसे दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।
इस प्रकार, हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित होगा और इस जानकारी की सहायता से आप कैल्शियम की कमी को दूर कर पाएँगे।

सबसे अधिक पूछे जाने वाले सवाल (FAQ’S)

Q1. कैल्शियम की कमी के लक्षण क्या हैं?
Ans- कैल्शियम की कमी के लक्षणों में मांसपेशियों संबंधी समस्याएं होना, चक्कर आना, त्वचा संबंधी समस्याएं होना, दाँतों संबंधी समस्याएं होना इत्यादि शामिल हैं।

Q2. क्या कैल्शियम की कमी को बढ़ाया जा सकता है?
Ans- जी हां, यदि कोई व्यक्ति अपनी डाइट में कैल्शियम संबंधी खाने को मिलाए, हरी सब्ज़ियाँ खाए, अधिक मात्रा में मछली खाए तो वह कैल्शियम की मात्रा को बढ़ा सकता है।

Q3. कैल्शियम की कमी किन लोगों को हो सकती है?
Ans- कैल्शियम की कमी की समस्या होने की संभावना पुरूषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है। इसी कारण, महिलाओं को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए और हेल्थ संबंधी किसी भी तरह की समस्या होने पर उसकी सूचना डॉक्टर को देनी चाहिए।

Q4. कैल्शियम की कमी से कौन-सी बीमारी हो सकती है?
Ans- कुछ समय के बाद, कैल्शियम की कमी का असर शरीर के अन्य अंगों जैसे दाँत, आँखों, दिमाग इत्यादि पर भी पड़ने लगता है। कैल्शियम की कमी से पीड़ित लोगों को इन अंगों संबंधी बीमारियाँ हो सकती हैं।

Q5. किस फल में सबसे अधिक कैल्शियम होता है?
Ans- ऐसे बहुत सारे फल हैं, जो कैल्शियम से भरपूर होते हैं। इनमें संतरा, ब्लैक बेरी, स्ट्रोबेरी इत्यादि शामिल हैं।

Q6. क्या आप बोन डेंसिटी को फिर से बनाया जा सकता है?
Ans- जी हां, बोन डेंसिटी को फिर से बनाया जा सकता है। इसके लिए दवाई, एक्सराइज़, हेल्थी डाइट इत्यादि का सहारा लिया जा सकता है।

Q7. कैल्शियम दूध के अलावा किन चीज़ों से मिल सकता है?
Ans- हालांकि, दूध में काफी मात्रा में कैल्शियम होता है, लेकिन इसके अलावा दही, संतरा, हरी सब्ज़ियाँ, दाल इत्यादि भी कैल्शियम के भरपूर होते हैं। इसी कारण, लोग कैल्शियम की कमी को दूर करने के लिए इन चीज़ों का सेवन कर सकते हैं।

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