क्या है ब्रेस्ट इम्प्लांट सर्जरी? (Breast Implant Surgery in Hindi)

ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी

ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी को ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन/ ऑग्मेंटेशन मैमोप्लास्टी के नामों से भी जाना जाता है और इसके अलावा इसे अंग्रेजी में Boob Job भी कहा जाता है। ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी से तात्पर्य ऐसी सर्जरी से है, जिसके माध्यम से ब्रेस्ट के आकारों को बढ़ाया जाता है या ठीक किया जाता है। ब्रेस्ट को बढ़ाने के अलावा, ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी का उपयोग ब्रेस्ट के आकार को बदलने के लिए भी किया जाता है। ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी (Breast Implant Surgery) के माध्यम से केवल ब्रेस्ट के आकार को ही बढ़ाया जा सकता है और ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी उसके ढीलेपन को दूर नहीं करती है।

ब्रेस्ट के ढीलेपन की समस्या को केवल ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी के माध्यम से ही ठीक किया जा सकता है। ब्रेस्ट के आकार को बढ़ाने की सर्जरी को ब्रेस्ट टिशू के तहत ब्रेस्ट इंप्लांट या फैट को ट्रांसफर करके किया जाता है। ब्रेस्ट इंप्लांट कृत्रिम उत्पादों से निर्मित होते हैं।

ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी के प्रकार (Types Of Breast Implant Surgery- In Hindi)

ब्रेस्ट इंप्लांट मुख्य रूप से तीन प्रकार- सिलिकॉन जेल, सेलाइन और फैट ट्रांसफर हैं।

-सिलिकॉन जेल:

इस सर्जरी में सिलिकॉन जेल का उपयोग किया जाता है, जिसे सिलिकॉन शैल की कवरिंग में भरा जाता है। सिलिकॉन जेल सिलिकॉन, ऑक्सीजन और अन्य पदार्थों से बना हुआ बहुलक (पॉलीमर) होता है। यह मुख्य रूप से तरल, जेल या रबड जैसे ठोस प्रारूप में पाया जाता है। इस जेल का उपयोग व्यक्तिगत देखभाल उत्पाद और सर्जिकल इंप्लांट में किया जा सकता है। सिलिकॉन से बने हुए उत्पाद के बहुत सारे लाभ होते हैं जैसे यह उच्च तापमान में स्थायी रहते हैं और इसके अलावा ये एजिंग, सूरज की रोशनी, नमी और तापमान विभिन्नता की स्थिति में भी क्रियाशील रहते हैं।

लाभ:

सिलिकॉन ब्रेस्ट इंप्लांट ऐसे सिलिकॉन शैल होते हैं, जो सिलिकॉन जेल से भरपूर होते हैं। इन शैलों के अन्य इंप्लांट की तुलना में काफी लाभ होते हैं जैसे ये प्राकृतिक रुप से चमक देते हैं और इसमें झुरियां भी कम पड़ती हैं।

जोखिम:

सिलिकॉन इंप्लांट के कुछ जोखिम भी होते हैं जैसे सिलिकॉन इंप्लांट को डालने के लिए बड़े कट लगाने की आवश्यकता पड़ती है, अत: इस सर्जरी के निशान काफी समय तक रहते हैं। अगर कुछ समय के बाद इंप्लांट फट जाता है, तो उसे ठीक करने के लिए अन्य सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है और उस सर्जरी के बाद वह काफी भद्दा दिखाई देता है।

-सिलाइन इंप्लांट:

सिलाइन इंप्लांट सर्जरी से तात्पर्य ऐसी सर्जरी से है, जिसमें सिलिकॉन शैल में सिलाइन वाटर को भरा जाता है। इसमें भी सिलिकॉन का बाहरी भाग होता है, लेकिन यह इस रूप में अलग होता है कि इसमें सिलिकॉन जेल की बजाय सिलाइन शॉलूशन होता है। इसके कुछ लाभ और जोखिम भी होते हैं।

लाभ:

इस सर्जरी का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इस सर्जरी में ब्रेस्ट इंप्लांट की प्रक्रिया में कम दर्द होता है क्योंकि इस पूरी प्रक्रिया में कम स्कॉरिंग किया जाता है।

इस सर्जरी में छोेटे टांके लगाए जाते हैं और अत: इस सर्जरी के बाद कम निशान दिखाई देते हैं और काफी कम रसाव होता है।

जोखिम:

इस सर्जरी के बाद ब्रेस्ट कम दृढ़ होते हैं, जो बनावटी नज़र आते हैं, लेकिन इनका वजन सिलिकॉन इंप्लांट से कम होता है।

-फैट ट्रांसफर:

इस विधि को उन महिलाओं के लिए किया जाता है, जो इंप्लांट के बिना अपने ब्रेस्ट के आकार को बढ़ाना चाहती हैं। इसका उपयोग ब्रेस्ट इंप्लांट में कोमलता और इंप्लांट को ढकने के लिए भी किया जाता है।

इस सर्जरी में  महिला के विभिन्न अंगों जैसे जांघो, पेट या कूल्हे से फैट को लिपोसक्शन के द्वारा निकाला जाता है और उसका उपयोग ब्रेस्ट के आकार को बढ़ाने के लिए किया जाता है।

लाभ:

इस सर्जरी का लाभ यह होता है कि इस पूरी प्रक्रिया में शरीर पर काफी कम काट-छाट लगाए जाते हैं अत: इसके बाद शरीर पर काफी कम निशान पड़ते हैं। इस सर्जरी के अन्य लाभ भी हैं जैसे कि इससे ब्रेस्ट का आकार को बढ़ता ही है, इसके साथ में इस सर्जरी से महिला के अन्य अंगों में भी सुधार आता है।

जोखिम:

यह सर्जरी अधिक उपयोगी साबित नहीं होती है, इससे ब्रेस्ट का आकार एक सीमा तक ही बढ़ता है। इसके अलावा शरीर के जिस अंग से फैट को लिया गया था, वह फिर से शरीर द्वारा अवशोषित हो जाता है। यह सर्जरी काफी मंहगी होती है।

ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी को क्यों कराई जाती है? (Why Breast Implant Surgery is performed?- in Hindi)

ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी को निम्नलिखित स्थितियों में किया जाता है:

  • असमान्य ब्रेस्ट: ऐसा मुख्य रूप से उस स्थिति में होता है, जब दोनों ब्रेस्ट एक-दूसरे से आकार, घनत्व, प्रारूप और स्थिति इत्यादि में पूरी तरह से भिन्न होते हैं।

    असमान्य ब्रेस्ट के विभिन्न कारण होते हैं जैसे ट्रोमा, यौवन और हॉर्मोनल परिवर्तन, स्तनपान, उम्र का बढ़ना, अचानक से वजन का कम होना इत्यादि हो सकते हैं। इसके अलावा यह स्थिति प्राकृतिक रूप से भी हो सकती है। किशोर अतिवृद्धि की स्थिति में भी ऐसा ही होता है, जिसके कारण असमान्य ब्रेस्ट हो सकता है। इस स्थिति में एक ब्रेस्ट दूसरे की तुलना में छोटी होती है।

  • माइक्रोमास्टिया : यह एक जन्मजात विकार है, जो पीक्टरल मांसपेशियों की असामान्यताओं से संबंधित होता है। इस स्थिति में स्तन युवावस्था के बाद भी अविकसित रहता है। ब्रेस्ट के आकार सीमित होते हैं।

  • मस्टेक्टॉमी: यह एक या दोनों ब्रेस्ट को हटाने के लिए एक शल्य चिकित्सा प्रक्रिया है। यह स्तन कैंसर (ब्रेस्ट कैंसर) के मामलों में किया जाता है, जो महिलाएं अपनी उपस्थिति को दर्ज करना चाहती हैं वे स्तन प्रत्यारोपण (ब्रेस्ट इंप्लांटेशन) कर सकते हैं।

  • वजन कम करना: कई बार ऐसा देखा गया है कि कई महिलाओं का वजन डाइटिंग या व्यायाम से कम हो जाता है। इसका असर उनके ब्रेस्ट के आकार भी बढ़ता है और वे समय के साथ कम हो जाते हैं।

    ऐसे मामलों में यदि कोई महिला बिना वजन को बढ़ाए, अपने ब्रेस्ट के आकार को बढ़ाना चाहती है, तो वह ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी करा सकती है।

  • अपनी उपस्थिति को दर्ज कराना: अगर किसी महिला को ऐसा लगता है कि उसके ब्रेस्ट का आकार सही नहीं हैं और ये उसकी उपस्थिति को प्रभावित करती है। ऐसे मामलों में वह ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी का सहारा ले सकती है।

ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी से पहले कौन-कौन से कार्य किए जाते हैं? (Pre-Procedure of Breast Implant surgery- in Hindi)

ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी के लिए महिला की उम्र 22 साल से कम होनी चाहिए। ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी की प्रक्रिया से पहले डॉक्टर महिला की यह निर्णय लेने में सहायता करते हैं कि उसे किस तरह का इलाज करने की आवश्यकता है।

इस दौरान डॉक्टर उसे इस सर्जरी की प्रक्रिया, ब्रेस्ट इंप्लांट के बाद की ज़िदगी, इसके परिणाम की संक्षिप्त जानकारी देते हैं।

ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी कराने का निर्णय लेने से पहले निम्नलिखित कार्य किए जाते हैं।

  • स्वास्थ जांच करना: ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी से पहले महिला के स्वास्थ की अच्छी तरह से जांच की जाती है। जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि इस सर्जरी का उस महिला के स्वास्थ पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा।

  • कुछ दवाईयों के सेवन को बंद करना: डॉक्टर द्वारा महिला के स्वास्थ की जांच करने के बाद, डॉक्टर उसे किसी भी तरह की दवाईयां जैसे एसिप्रेन को न लेने की सलाह देते हैं क्योंकि इनका सेवन करने से ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी के दौरान अधिक रक्तस्राव हो सकता है।

  • मैमोग्राम टेस्ट करना: ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी से पहले एक मैमोग्राम टेस्ट किया जाता है। मैमोग्राम मुख्य रूप से ब्रेस्ट का एक्स-रे होता है, जिसे ब्रेस्ट से संबंधित किसी बिमारी जैसे कैंसर, गांठ इत्यादि का पता लगाने के लिए किया जाता है।

  • धूम्रपान न करने की सलाह देना: जिस महिला को ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी को कराना है, उसे डॉक्टर इस सर्जरी से पहले धूम्रपान न करने की सलाह देते हैं।

ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी को कैसे किया जाता है (Procedure of Breast Implant Surgery In Hindi)

ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी को अस्पताल या सर्जिकल केंद्र में किया जाता है। इस पूरी प्रकिया में केवल एक से दो घंटों का समय लगता है। इस प्रक्रिया में निम्नलिखित बिंदू शामिल होते हैं।

  • स्टेप 1: मरीज को एनेस्थीसिया देना; सबसे पहले मरीज को साधारण एनेस्थीसिया दिया जाता है ताकि वह इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सोती रहे या बेहोश रहे ताकि उसे इस सर्जरी के दौरान किसी प्रकार का दर्द महसूस न हो।

  • स्टेप 2: कट लगाना;  जब वह महिला नींद में होती है तब सर्जन उसके शरीर के मुख्य रूप से तीन अंगों पर कट लगाता है, जो इस प्रकार हैं:

    1. इंफ्रामैमरी: यह ब्रेस्ट का निचला हिस्सा होता है।
    2. एक्ज़िलरी: इसे आम भाषा में ऑर्म्पिट कहा जाता है।
    3. पैरीएरिओलर: निपल्स के आसपास का क्षेत्र।
  • स्टेप 3: मांसपेशियों से ब्रेस्ट टिशू को अलग करना : ऊपर लिखे गए अगों में किसी एक अंग पर कट लगाने के बाद सर्जन ब्रेस्ट टिशू को मांसपेशियों और छाती के टिशू से अलग कर देते हैं।

    ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि इंप्लांट को डालने के लिए पॉकेट को बनाया जा सके।

  • स्टैप 4: इंप्लांट को लगाना: पॉकेट को बनाने के बाद सर्जन इसमें इंप्लांट को लगाता है और उसे निपल्स के निचले हिस्से में लगाता है।

  • स्टेप 5: कट को बंद करना: इंप्लांट को लगाने के बाद सर्जन इस कट को टांकोें से बंद कर देते हैं और इंप्लांटेशन की गई जगह पर सर्जरी की टेप का प्रयोग करके बैंडेज लगा देते हैं।

ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी के बाद कौन-कौन से कार्य किए जाते हैं? (Post- Procedure of Breast Implant Surgery-in Hindi)

  • दर्द-निवारक दवाई देना: इस सर्जरी के बाद कुछ हफ्तों तक सूजन, दर्द या चोट लग सकती है। इस दर्द को कम करने के लिए डॉक्टर महिला को दर्द-निवारक दवाईयां देते हैं।

  • कंप्रेशन या स्पोर्ट्स ब्रा पहनना: चूंकि, इस सर्जरी को करने का मुख्य उद्देश्य ब्रेस्ट के आकार को बढ़ाना है, अत: डॉक्टर महिला को कंप्रेशन या स्पोर्ट्स ब्रा पहनने की सलाह देते हैं, ताकि इंप्लांट सर्जरी वाली जगह स्थिर रह सके।

  • थकाने वाली गतिविधियों को करने से बचना: इस सर्जरी के कम-से-कम दो हफ्तों के लिए ऐसी किसी भी तरह की गतिविधियोें को न करें, जिनसे आपको थकान महसूस हो क्योंकि इससे आपका रक्तचाप (बी.पी) बढ़ सकता है।

  • ड्रेनेज ट्यूबों को निकलवाना: इस सर्जरी के दौरान यदि सर्जन ने ड्रेनेज ट्यूब या गलने योग्य टांको का उपयोग किया है, तो उस महिला को उन्हें निकलवाने के लिए डॉक्टर से संपर्क करना होगा।

  • डॉक्टर से संपर्क करना: इस सर्जरी के बाद अगर किसी महिला को किसी तरह की परेशानियां जैसे छाती में दर्द, सांस में तकलीफ होना इत्यादि होता है, तो ऐसी स्थिति में उसे डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिेए।

ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी की लागत (Cost of Breast Implant Surgery-in Hindi)

भारत के अन्य राज्यों की तुलना में दिल्ली में ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी कराने की लागत काफी किफायदी होती है। दिल्ली-NCR में ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी कराने की औसतन लागत रूपये 80,000-1.5 लाख तक है।

ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी की लागत कई सारे तत्वों पर निर्भर करती है, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

  1. अस्पताल
  2. महिला के स्वास्थ की स्थिति
  3. ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी के प्रकार
  4. सर्जरी कराने के तरीके

ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी के जोखिम (Side-Effects of Breast Implant Surgery-in Hindi)

हालांकि, ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी महिलाओं को खूबसूरत बनाती है और इससे उनके आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी होती है, लेकिन ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी के कुछ जोखिम भी होते हैं, जिनमें से प्रमुख 7 जोखिम इस प्रकार हैं।

  1. ब्रेस्ट इंप्लांट में लीकेज होना: ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी का सबसे बड़ा जोखिम यह होता है कि कुछ समय के बाद ब्रेस्ट इंप्लांट में लीकेज हो जाती है।

    ऐसा मुख्य रूप से छाती पर धक्का लगने या सिलिकॉन या सिलाइन के लीक होने के कारण होता है।

  2. ब्रेस्ट में दर्द या सूजन होना: ऐसा कई बार ऐसा देखा गया है कि ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी के बाद कुछ महिलाओं की ब्रेस्ट में दर्द होता है।

    इसके अलावा कुछ महिलाओं की ब्रेस्ट में सूजन भी हो जाती है।

  3. ब्रेस्ट इंप्लांट का फटना: कभी-कभी ऐसा भी देखा गया है कि जिस महिला ने ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी कराई है, उसका इंप्लांट कुछ समय के बाद फट जाता है।
    फटे हुए शेल्स से सिलिकॉन जेल या सिलाइन वाटर निकल सकता है।

  4. बैक्टीरिया का फैलना: कई बार ऐसा देखा गया है कि ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी के असफल होने पर शरीर में बैक्टरिया फैल जाते हैं।

  5. ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी का अस्थायी होना:  ब्रेस्ट इंप्लांट अधिक समय तक कारगार साबित नहीं होता है।

    प्रत्येक सर्जरी के कुछ समय बाद (लगभग 7-8 साल) में उसे ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी को फिर से कराने की आवश्यकता पड़ती है।

  6. ब्रेस्ट कैंसर का खतरा होना: ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी में उपयोग किए जाने वाले सिलिकॉन जैल में कुछ ऐसे तत्व होते हैं, जिनसे कैंसर हो सकता है, इस सर्जरी से ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।

  7. ब्रेस्टों के असमान्य आकार: ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी से ब्रेस्ट का आकार और रूप भी बढ़ जाता है, जो बेहद बनावटी लगता है।

    खासतौर से सलाइन आधारित ब्रेस्ट इंप्लांट में तो ब्रेस्ट काफी नकली दिखाई देने लगते हैं।

आज कल ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी (Breast Implant Surgery) काफी प्रचलन में हैं, लेकिन कुछ महिलाएं इसे कराने से झिझकती हैं क्योंकि उन्हें इसकी आवश्यक जानकारी नहीं होती है और इसके साथ में उन्हें सामाजिक आलोचना का भी डर होता है।

हमने इस लेख में ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी के आवश्यक जानकारी दी है ताकि आपकी यह झिझक थोड़ी कम हो सके और आप भी ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी को अपना सके।

अगर आप या आपके जान पहचाने में कोई महिला ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहती हैं तो वह इसके लिए +91-8448398633 पर Call करके इसकी मुफ्त सलाह प्राप्त कर सकती है और इसके साथ में यदि वह ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी को कराना चाहती हैं, लेकिन आर्थिक असमर्थता के कारण इसे नहीं करा पा रही है, तो वह इसे कराने के लिए letsmd से 0% की ब्याज दर पर मेडिकल लोन ले सकती है।

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