वायु प्रदूषण किस तरह से आपको बीमार कर सकता है?

आज के दौरे में, हार्ट पेशेंटों की संख्या काफी तेज़ी से बढ़ रही है। इनमें से ज्यादातर लोगों को इस बात का एहसास ही नहीं हो पाता है कि वे कब हार्ट पेशेंट बन गए और इसी कारण वे इससे छुटकारा नहीं पा पाते हैं।
आमतौर पर, ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति ज्यादा टेंशन लेता है उसके हार्ट पेशेंट बनने की संभावना काफी ज्यादा होती है।
वाकई यह बात सही है लेकिन पूरी तरह से नहीं क्योंकि हार्ट पेशेंट में कई सारे कारण शामिल होते हैं जिनमें सबसे बड़ा कारण वायु प्रदूषण या एयर पॉल्यूशन है।

हो सकता है कि कुछ लोगों को यह बात थोड़ी अटपटी लगे, लेकिन वायु प्रदूषण हमें कई सारी बीमारियों का शिकार बना सकता है।
आइए, इस लेख के माध्यम से यह जानने की कोशिश करते हैं कि आखिरकार वायु  प्रदूषण से कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं और हम इससे किस तरह से बच सकते हैं-

क्या है वायु प्रदूषण? (Meaning of Air pollution in Hindi)

जब वातावरण में खतरनाक पदार्थों जैसे गैस, कण (particles) और जैविक अणु की मात्रा काफी ज्यादा हो जाती है, तो उस स्थिति को वायु प्रदूषण या एयर पॉल्यूशन कहा जाता है।

अगर वायु प्रदूषण को समय रहते काबू में न किया जाए तो यह कई सारी समस्याओं जैसे ग्लोबल वार्मिंग  का होना, दिल की बीमारी का होना, फेफड़ों की बीमारी होना, कैंसर होना, मानसिक समस्या, किडनी की बीमारी इत्यादि  हो सकती हैं।

वायु प्रदूषण किन कारणों से होता है? (Air pollution causes in Hindi)

वायु प्रदूषण कई कारणों से हो सकता है, जिनमे से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

  • लकड़ी को जलाना- अक्सर,लोग खाना बनाने के लिए लकड़ियों का इस्तेमाल करते हैं।
    उनके लकड़ी के जलाने का असर वातावरण पर पड़ता है और वह ज्यादा खराब हो जाता है।
    इस तरह से वायु प्रदूषण को बढ़ाने में लकड़ी को जलाना भी शामिल है।

  • गाड़ियों से निकलने वाला धुंआ- आज के दौर में, लोग गाड़ियों का इस्तेमाल काफी ज्यादा करते हैं।
    इन गाड़ियों से निकलने वाला धुंआ वायु प्रदूषण को बढ़ाता है और वातावरण को खराब करता है।   

  • उद्योगों से निकलने वाला धुंआ- फैक्टरियों का विकास लगभग सभी जगह हो गया है।
    आप किसी भी शहर में जाएं, वहां पर आपको एक या दो फैक्टरी देखने को मिल ही जाएगी।
    एक ओर, जहां फैक्टरियां जहां पर देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, वहीं दूसरी ओर, इन फैक्टरियों से निकले वाला धुंआ वायु प्रदूषण को भी काफी हद तक बढ़ाता है। 

  • खराब फसलों को जलाना- जब किसानों की फसले खराब हो जाती है, तब वे इन फसलों को जलाते हैं।
    ये फसले वातावरण को प्रदूषित करती हैं और वायु प्रदूषण का कारण बनती हैं।

  • प्लास्टिक या पत्तों इत्यादि को जलाना- वायु प्रदूषण के बढ़ने में प्लास्टिक या पत्तों जैसे पदार्थों को जलाना भी शामिल है।
    इसी कारण, लोगों को ऐसी चीजों को नहीं चलाना जाए, तो वातावरण को नुकसान पहुंचाएं। 

  • जंगलों में लगी आग का धुंआ- इन दिनों जंगलों में आग लगने की खबरे काफी आती रहती हैं।
    यह आग भी हमारे वातावरण को खराब करती है और वायु प्रदूषण को बढ़ाती है।

वायु प्रदूषण से कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं? (Air pollution diseases in Hindi)

वायु प्रदूषण कई सारी बीमारियों का कारण बन सकता है, जिनमें से प्रमुख 5 बीमारियां इस प्रकार हैं-

  1. दिल की बीमारी- वायु प्रदूषण की वजह से दिल की बीमारी के होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
    वायु प्रदूषण से लोगों को दिल के दौरे पड़ने, कोरोनरी धमनी रोग, दिल के वॉल्व में ब्लॉकेज इत्यादि हो सकती है।
    यदि वे इनका इलाज सही समय पर न कराए तो उनके लिए अंतिम विकल्प हार्ट ट्रांसप्लांट ही बचता है।

  2. फेफड़ों की बीमारी- चूंकि, वायु प्रदूषण वातावरण की हवा को प्रदूषित करती है।
    इसी कारण जब लोग सांस लेते हैं, तो उनके शरीर में खराब हवा जाती है जिसकी वजह से उनके फेफड़े खराब हो जाते हैं।

  3. कैंसर- जैसा कि ऊपर  स्पष्ट किया गया है कि वायु प्रदूषण की वजह से फेफड़े भी खराब होते हैं।
    अत: यह फेफड़ों के कैंसर (Lung cancer) का कारण भी बन सकता है, जिसकी वजह से काफी सारे लोगों की मौत भी हो सकती है।

  4. किडनी की बीमारी- ऐसे बहुत सारे मामले सामने आते हैं, जिनमें किडनी की बीमारी वायु प्रदूषण से हो जाती है।
    हालांकि, किडनी की बीमारी का इलाज किडनी डायलिसिस से संभव है, मगर काफी देर होने पर किडनी खराब भी हो सकती हैं, जिनका इलाज केवल किडनी ट्रांसप्लांट के द्वारा ही किया जा सकता है।

  5. प्रेग्नेंट महिला और उसके होने वाले बच्चे की जान को खतरा होना- अगर कोई गर्भवती महिला वायु प्रदूषण में रहते है तो यह उसकी हेल्थ के लिए सही नहीं है।
    वायु प्रदूषण से प्रेग्नेंट महिला और उसके होने वाले बच्चे की जान को भी खतरा हो सकता है।

  6. अस्थमा- वायु प्रदूषण हवा को काफी प्रदूषित कर देता है, जिसकी वजह से लोगों को सांस लेने में तकलीफ का सामना करना पड़ता है।
    एयर पॉल्यूशन से ज्यादातर लोगों को अस्थमा की बीमारी भी हो जाती है।

  7. जीने की औसतन उम्र को कम करना- हालिया, कई सारी स्टडी से इस बात का पता चला है कि पहले की तुलना में लोगों के जीने की औसतन उम्र (average live age) में कमी आई है।
    इस कमी का प्रमुख कारण वायु प्रदूषण का बढ़ना।

  8. ब्लड कैंसर- ऐसे बहुत सारे मामले देखने को मिलते हैं, जिनमें लोगों को वायु प्रदूषण की वजह से ब्लड कैंसर की शिकायत रहती है।

  9. मानसिक समस्याएं होना- वायु प्रदूषण की वजह से लोगों को मानसिक समस्याएं जैसे चक्कर आना, मेमोरी कमजोर होना इत्यादि हो सकती हैं।     

हम सभी लोग हेल्थी रहना चाहते हैं और अपनी हेल्थ को बनाए रखने के लिए हर संभव कोशिश भी करते हैं, लेकिन जब हमारा वातावरण ही हेल्थी न हो तो हम हेल्थी कैसे रह सकते हैं।

हमें इस स्थिति को बदलना होगा ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को रहने लायक वातावरण दे सकें। इस प्रकार हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित हुआ होगा क्योंकि हमने इसमें वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों और उसे ठीक करने के तरीकों की जानकारी दी है।

सबसे अधिक पूछे जाने वाले सवाल-

  • वायु प्रदूषण के 3 प्रकार कौन-से हैं?
    वायु प्रदूषण कई प्रकार के होते हैं, जिनमें से प्रमुख 3 प्रकार- पर्टिकुलर मेटर, नॉइड्रोजन डाय ऑक्साइड, ओज़ोन,सल्फर डायॉक्साईड हैं। 

  • क्या स्मोग वायु प्रदूषण होता है?
    जी हां,स्मोग एक तरह का वायु प्रदूषण है,जो सामान्य रूप से धुंध की तरह लगता है लेकिन इसकी वजह से लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है।
    पिछले साल स्मोग काफी  ज्यादा फैल गया था, जिसकी वजह से बहुत सारे लोगों को खांसी,आंखों में जलन इत्यादि जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।

  • क्या किसी व्यक्ति की मौत वायु प्रदूषण से हो सकती है?
    विश्व स्वास्थ संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार हर साल लगभग 7 मिलियन लोगों की मौत वायु प्रदूषण की वजह से हो जाती है।

  • क्या मेडिकल इंश्योरेंस कैंसर के इलाज को कवर करता है?
    हालांकि, आज कल बाजार ऐसी बहुत सारी इंश्योरेंस कंपनियां हैं, जो कैंसर समेत कई सारे इलाज को कवर  करती हैं, लेकिन इनके अपने Term and conditions होते हैं, जिनमें कैंसर के सीमित इलाज ही शामिल होते हैं।
    दूसरे शब्दों, में मेडिकल इंश्योरेंस कैंसर के इलाज की पूरी कीमत को कवर नहीं करते हैं और उनमें से कुछ हिस्से लोगों को अपनी जेब से देने होते हैं।