क्या है एसीएल सर्जरी? पूर्ण जानकारी (ACL Surgery in Hindi)

एसीएल सर्जरी (ACL Surgery) को नी लिगमेंट सर्जरी के नाम से भी जाना जाता है, इसे उस स्थिति में किया जाता है जब किसी व्यक्ति के लिंगामेंट पर चोट लग जाती है।

इस सर्जरी का उपयोग मुख्य रूप से खेलकूद के क्षेत्र में लगने वाली चोटों को ठीक करने के लिए किया जाता है।

इस प्रकार यह खिलाड़ियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि इसके माध्यम से उनकी चोट जल्दी से ठीक हो जाती है और वे अपने खेल प्रर्दशन को भी बनाए रख सकते हैं।

 

इन सबके बावजूद लोगों में इस सर्जरी के प्रति जागरूकता की कमी है और इसी कारण वे एसीएल सर्जरी का लाभ नहीं उठा पाते हैं।

 

यदि आप भी इस सर्जरी की आवश्यक जानकारी से वंचित हैं तो आप इस लेख के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

 

क्या है एसीएल सर्जरी? (ACL Surgery in Hindi)

 

एसीएल सर्जरी से तात्पर्य ऐसी सर्जरी है, जिसमें घुटने के सबसे बड़े लिगमेंट अर्थात् इंटीरियर क्रिएट लिगामेंट को ठीक किया जाता है।

इस घुटने की सर्जरी में, फटे हुए लिगमेंट को सही लिगमेंट से बदला जाता है। यह एक आसान प्रक्रिया है,जिसमें काफी कम समय लगता है।

 


एसीएल सर्जरी कराने की सलाह कब दी जाती है? (Indications of ACL Surgery in Hindi)

 


एसीएल सर्जरी को मुख्य रूप से इन 5 स्थितियों में ही किया जाता है-

 

  1. घुटने में असहनीय दर्द होना- घुटने में दर्द की समस्या ज्यादातर लोगों को होती है, जिसके लिए सामान्य तरीकों को अपनाते हैं।

    कई बार यह समस्या कुछ समय के बाद स्वयं ही ठीक हो जाती है, लेकिन यदि किसी व्यक्ति को घुटने में दर्द बढ़ता ही जाता है, तो उसे डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि तब हो सकता है कि उसे एसीएल सर्जरी कराने की जरूरत पड़े।

     

  2. घुटने में चोट लगना- कई बार, एसीएल सर्जरी को घुटने में चोट लगने की स्थिति में भी किया जाता है।

    ऐसा इसलिए किया जाता है, क्योंकि घुटने की चोट का असरलिगमेंट पर भी हो सकता है, जिसकी वजह से वह खराब हो सकता है।

     

  3. चलने में तकलीफ होना- यदि कोई व्यक्ति घुटने के असहनीय दर्द से परेशान है, जिसकी वजह से उसे चलने में तकलीफ भी होती है, तो उसका इलाज सर्जरी के द्वारा ही संभव होता है।

    उस स्थिति में एसीएल सर्जरी को कराया जा सकता है,ताकि उसे इस परेशानी से आराम मिल सके।

     

  4. कार्यक्षमता को प्रभावित करना- मानवशरीर का घुटना काफी महत्वपूर्ण होता है, जिसके माध्यम से उसे चलने फिरने में आसानी होती है, लेकिन जब यह अंग खराब हो जाता है, तो इसका असर उसकी कार्यक्षमता पर पड़ता है।

    इस समस्या का समाधान एसीएल सर्जरी के द्वारा किया जा सकता है।

     

  5. पेशेवर खिलाड़ी का होना- एसीएल सर्जरी को मुख्य रूप से उन लोगों पर किया जाता है, तो पेशेवर खिलाड़ी होते हैं क्योंकि उन्हें खेल के दौरान काफी सारी चोटे लगती हैं और उन्हें इसका इलाज जल्दी से कराने की जरूरत होती है।

 

एसीएल सर्जरी से पहले कौन-से कार्य किए जाते हैं? (Pre-Procedure of ACL Surgery in Hindi)


चूंकि, एसीएल सर्जरी को घुटने पर की जाती है, इसी कारण डॉक्टर किसी भी तरह की लापरवाही को करने से बचते हुए पर्याप्त तैयारी करते हैं।
 

इस सर्जरी को करने से पहले डॉक्टर इन 5 कार्यों को करते हैं, ताकि वे इसे सही तरीके से कर सकें-

 

  1. फिजिकल थैरेपी लेना- इस घुटने की सर्जरी को कराने से पहले डॉक्टर व्यक्ति को फिजिकल थैरेपी कराने की सलाह देते हैं, ताकि उसके घुटने की मांसपेशियां मजबूत हो सके और इसके साथ यदि वहां पर सूजन है, तो कम हो सके।
     

  2. दवाई लेना- कई बार, डॉक्टर दवाई देने की भी सलाह देते हैं, ये दवाइयां व्यक्ति के शरीर में आवश्यक ऊर्जा को उत्पन्न करने में सहायक होती हैं।
     

  3. खान-पान का ध्यान रखना- इस घुटने की सर्जरी को करने से पहले डॉक्टर टाइम प्लान बनाते हैं, जिसके भोजन करने, सोने इत्यादि का विवरण होता है।
     

  4. अपने साथ किसी दूसरे व्यक्ति को लाना- चूंकि, इस सर्जरी को घुटने पर किया जाता है, इसी कारण इसे कराने के बाद व्यक्ति को चलने-फिरने में तकलीफ होती है।

    इसी कारण डॉक्टर उसे अपने साथ किसी दूसरे शख्स लाने की सलाह देते हैं, जो उसे घर ले जा सके।

     

  5. घुटने की जांच करना- एसीएल सर्जरी को करने से पहले डॉक्टर घुटने की जांच करते हैं ताकि इस बात की पुष्टि हो सके कि उसका घुटना इस सर्जरी के लिए सही स्थिति में है या नहीं।
     


एसीएल सर्जरी को कैसे किया जाता है? (Procedure of ACL Surgery in Hindi)

 

यह घुटने की समस्या को ठीक करने की बेहतरीन सर्जरी है, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण स्टेप शामिल होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

 

  • स्टेप 1: एनेस्थीसिया इंजेक्शन देना- एसीएल सर्जरी को शुरू करने से पहले घुटने में एनेस्थीसिया इंजेक्शन दिया जाता है, व्यक्ति को इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी तरह का दर्द महसूस न हो।
     

  • स्टेप 2:  कंधे में इंट्रावेनस लाइन (IV) को लगाना- एनेस्थीसिया इंजेक्शन देने के बाद डॉक्टर शख्स के कंधे में इंट्रावेनस लाइन को लगाते हैं।

    ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि इसके माध्यम से सर्जन दवाई इत्यादि को मानवशरीर में डाल सकें।

     

  • स्टेप 3: घुटने के सामने वाले हिस्से में कट को लगाना- कंधे में इंट्रावेनस लाइन को लगाने के बाद शख्स के घुटने के सामने वाले हिस्से में कट को लगाया जाता है।

    इस कट के माध्यम से सर्जिकल कैमरे और उपकरण को शरीर के भीतर डाला जाता है।

     

  • स्टेप 4: फटे लिगमेंट को निकालना- घुटने में कट को लगाने के बाद फटे हुए लिगमेंट को बाहर निकाला जाता है।

    इस लिगमेंट को बाहर निकालने के बाद सर्जन उस जगह को साफ कर देते हैं।

     

  • स्टेप 5: नए लिगमेंट को लगाना- खराब लिगमेंट को निकालने के बाद उसकी जगह पर नए लिगमेंट को लगा दिया जाता है।

    नए लिगमेंट को लगाने के बाद डॉक्टर कट को बंद कर देते हैं और इसी के साथ यह प्रक्रिया समाप्त हो जाती है।

     

  • स्टेप 6:  व्यक्ति को सुधार कक्ष में ले जाना- इस घुटने की सर्जरी के समाप्त होने के बाद व्यक्ति को सुधार कक्ष (रिकवरी रूम) में ले जाया जाता है।

    इस कक्ष में व्यक्ति के स्वास्थ को मॉनिटर को किया जाता है, ताकि इस बात की पुष्टि हो सके कि वह पूरी तरह से स्वस्थ है।


 

एसीएल सर्जरी की कीमत कितनी है? (Cost of ACL Surgery in Hindi)

 

जब बात एसीएल सर्जरी को कराने की आती है, तो इसके लिए दिल्ली से बेहतर जगह और कोई हो नहीं सकती है।

भारत की राजधानी होने के कारण यहां पर इसके लिए सर्वोत्तम अस्पताल/क्लीनिक मौजूद हैं, जहां पर इस सर्जरी को बेहतर तरीके से किया जाता है।

 

यह भी देखें- एसीएल सर्जरी के लिए सर्वोत्तम अस्पताल/क्लीनिक

 

इसके अलावा जब भी कोई डॉक्टर किसी व्यक्ति को यह घुटने की सर्जरी को कराने की सलाह देते हैं, तो उस समय उसके मन में इस सर्जरी की कीमत को लेकर सवाल जरूर आता है।

संभवत: अधिकांश लोगों को यह एक महंगी प्रक्रिया लगे और इसी कारण वे इसे न करा पाएं, लेकिन यदि उन्हें यह जानकारी हो कि यह एक किफायती प्रक्रिया है, जिसकी कीमत मात्र होती है, तो शायद वे भी घुटने की समस्या से निजात पा सकें।

 

एसीएल सर्जरी के जोखिम क्या हो सकते हैं? (Complications of ACL Surgery in Hindi)

 

निश्चित रूप से एसीएल घुटने की समस्या को ठीक करने की सर्वोत्तम प्रक्रिया है, लेकिन इसके बावजूद किसी भी अन्य प्रक्रिया की भांति लिगमेंट बदलने की सर्जरी के भी कुछ जोखिम होते हैं, जिसकी जानकारी होना महत्वपूर्ण है।

 

यदि किसी व्यक्ति ने हाल ही एसीएल सर्जरी को कराया है, तो उसे इन 5 जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है-

 

  1. घुटने में दर्द होना- हालांकि, एसीएल सर्जरी को घुटने की समस्या को ठीक करने के लिए किया जाता है, लेकिन कुछ लोगों में इस सर्जरी के बाद घुटने में दर्द की समस्या यूंही बनी रहती है।
     

  2. ग्राफ्ट का सही तरीके से न लगना- इस सर्जरी के माध्यम से व्यक्ति के घुटने में ग्राफ्ट को लगाया जाता है।

    अक्सर, यह ग्राफ्ट सही तरीके से काम नहीं करता है और इसकी वजह से लोगों को काफी परेशानियां भी होती हैं।

     

  3. घुटने में संक्रमण का होना- यदि किसी व्यक्ति ने हाल ही में एसीएल सर्जरी को कराया है, तो इसकी वजह से उसके घुटने में संक्रमण भी हो सकता है।

    ऐसी स्थिति में उसका घुटना पूरी तरह से खराब हो सकता है और फिर उसे घुटने का ऑपरेशन कराने की जरूरत पड़ता है।

     

  4. अधिक मात्रा में रक्तस्राव का होना- किसी भी अन्य प्रक्रिया की तरह एसीएल सर्जरी के बाद कुछ मात्रा में रक्तस्राव होना सामान्य चीज है, लेकिन जब यह मात्रा बढ़ जाती है, तो यह गंभीर रूप ले सकती है।

    इसकी वजह से व्यक्ति के शरीर में खून की कमी भी हो सकती है।

     

  5. अन्य सर्जरी की जरूरत पड़ना- कई बार एसीएल सर्जरी असफल हो जाती है, इसी स्थिति में डॉक्टर घुटने के ऑपरेशन कराने की भी सलाह देते हैं।


 

एसीएल सर्जरी के बाद क्या सावधानी बरतें? (Precautions of ACL Surgery in Hindi)

 

 

हालांकि, इस सर्जरी को कराने के बाद व्यक्ति को कुछ जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन वह इन जोखिमों को निम्नलिखित सावधानियों को बरतकर इन जोखिमों की संभावना को कम कर सकता है-

 

  • दर्द-निवारक दवाई लेना- चूंकि, इस सर्जरी के बाद घुटने में दर्द होता है, इसी कारण सर्जन दर्द-निवारक दवाई देते हैं, जिसका सेवन शख्स को उस स्थिति में करना चाहिए, जब उसके घुटने में दर्द होता है।
     

  • फिजिकल थैरेपी लेना- कई बार, डॉक्टर एसीएल सर्जरी के बाद फिजिकल थैरेपी करने में भी सलाह देते हैं।

    यह थैरेपी व्यक्ति को जल्दी से ठीक होने में सहायता करती है क्योंकि इसके माध्यम से उसके घुटने की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और इससे उसकी कार्यक्षमता भी बढ़ती है।

     

  • पौष्टिक भोजन करना- यदि किसी व्यक्ति ने हाल ही में एसीएल सर्जरी को कराया है, तो उसे अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    उसे केवल पौष्टिक भोजन ही करना चाहिए और इसके साथ में उसे ठंडी चीजों से परहेज करना चाहिए क्योंकि उनका असर उसके घुटने पर बुरा हो सकता है, जिसकी वजह से उसकी सेहत में गिरावट आ सकती है।

     

  • भारी शारीरिक गतिविधियां न करना- चूंकि, एसीएल सर्जरी के बाद व्यक्ति का शरीर काफी कमजोर होता है, इसी कारण उसे भारी गतिविधियों को नहीं करना चाहिए।

    यदि वह ऐसी गतिविधियों को करता है, जिसमें उसे जोर लगाना पड़ता है, तो इसका परिणाम काफी घातक हो सतका है।

     

  • भरपूर नींद लेना- सभी लोगों के लिए भरपूर नींद लेना काफी आवश्यक होता है, क्योंकि जब वे सोते हैं तो उनके शरीर में कोशिकाएं रिप्येर होती है, जिससे उनके शरीर को आवश्यक ऊर्जा भी मिलती है।

    अत: सभी लोगों को यह कोशिश करनी चाहिए कि वेे भरपूर नींद ( 8 से 10 घंटे) लेें ताकि वे सेहतमंद रह सकें।

     

  • सर्जन के संपर्क में रहना- यह सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है जिसका पालन सभी लोगों को करना चाहिए।

    यदि किसी व्यक्ति ने हाल ही में एसीएल सर्जरी को कराया है, तो उसे सर्जन के संपर्क में तब तक रहना चाहिए जब तक वे उसे पूरी तरह से सेहतमंद न घोषित न कर दें।



 

ऐसा माना जाता है कि किसी भी समस्या को नज़रअदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि वह कुछ समय के बाद गंभीर रूप ले सकती है।

यह बात घुटने से संबंधित समस्याओं पर भी लागू होती है, अक्सर हमारे घुटने में दर्द होता है, जिसे हम में से अधिकांश लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं।

 

कई बार हमारा ऐसा रवैया हमें गंभीर स्थिति में डाल सकता है और फिर हमारे लिए आईसीएल (ACL Surgery) कराना ही एक मात्र विकल्प बचता है।

चूंकि, ज्यादातर लोगों को इस घुटने की सर्जरी की जानकारी नहीं होती है, इसी कारण वे इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं, लेकिन यदि उन्हें इसकी आवश्यक जानकारी हो तो शायद वे भी घुटने की समस्या से निजात पा सकते हैं।

 

इस प्रकार हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित होगा क्योंकि हमने इसमें आईसीएल सर्जरी की पूर्ण जानकारी देने की कोशिश की है।

 

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